नई दिल्ली/सिमरन मोरया/- दिल्ली के द्वारका मोड़ निवासी हर्ष सिंह ने कॉमनवेल्थ जूडो चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया है। इस जीत के साथ उन्होंने जूडो में भारत को पहला गोल्ड दिलाते हुए देश का नाम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रोशन किया। हर्ष की इस ऐतिहासिक सफलता के बाद उनके परिवार, दोस्तों, कोच और पूरे इलाके में जश्न का माहौल है।
हर्ष सिंह ने महज आठ साल की उम्र में विन्की जूडो एकेडमी से जूडो का प्रशिक्षण शुरू किया था। बचपन से ही उनका सपना भारत का प्रतिनिधित्व करना था। इसी लक्ष्य को हासिल करने के लिए उन्होंने लगातार मेहनत, अनुशासन और समर्पण के साथ अभ्यास जारी रखा।
हर्ष के कोच के अनुसार, वह शुरू से ही मेहनती और अनुशासित खिलाड़ी रहे हैं। उनकी लगन और लगातार अभ्यास का ही परिणाम है कि आज उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वर्ण पदक जीतकर देश का गौरव बढ़ाया है।
फाइनल मुकाबले के दौरान परिवार के सभी सदस्य टीवी के सामने बैठे रहे। आखिरी क्षण तक मुकाबला रोमांचक बना रहा, लेकिन परिवार को पूरा विश्वास था कि हर्ष स्वर्ण पदक जीतकर लौटेंगे। जैसे ही जीत की खबर मिली, घर पर मिठाइयां बांटी गईं और पूरे इलाके में खुशी का माहौल बन गया।
हर्ष के पिता उदय भान सिंह और भाई विनीत सिंह ने बताया कि हर्ष पढ़ाई और खेल, दोनों में हमेशा अव्वल रहे हैं। परिवार को पहले से भरोसा था कि एक दिन वह देश का नाम जरूर रोशन करेंगे। इस जीत का सबसे भावुक पल तब आया, जब स्वर्ण पदक जीतने के बाद हर्ष सिंह ने अपना मेडल अपनी मां बबली को समर्पित किया। इस पल ने पूरे परिवार को भावुक कर दिया।
बारहवीं कक्षा पूरी करने के बाद हर्ष सिंह भारतीय सेना में शामिल हो गए, लेकिन उन्होंने जूडो की प्रैक्टिस कभी नहीं छोड़ी। सेना की जिम्मेदारियों के साथ भी उन्होंने अपने खेल को पूरी निष्ठा से जारी रखा और आज उसी मेहनत का परिणाम पूरे देश के सामने है।
फाइनल मुकाबले में हर्ष सिंह का सामना ऑस्ट्रेलिया के अनुभवी खिलाड़ी जोशुआ काट्ज से हुआ। मुकाबले की शुरुआत में ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ी ने दबाव बनाने की कोशिश की, लेकिन हर्ष ने शानदार डिफेंस और बेहतरीन रणनीति से उनके हर प्रयास को विफल कर दिया। मैच के दौरान एक समय ऐसा भी आया जब जोशुआ काट्ज ने हर्ष को अपनी पकड़ में लेने की कोशिश की, लेकिन हर्ष ने शानदार फुर्ती दिखाते हुए खुद को छुड़ाया और तुरंत पलटवार किया। मुकाबले के 3 मिनट 19 सेकंड पर लगाए गए उनके निर्णायक दांव ने मैच का रुख पूरी तरह बदल दिया और उन्होंने स्वर्ण पदक अपने नाम कर लिया।
हर्ष सिंह की इस ऐतिहासिक उपलब्धि ने न केवल दिल्ली बल्कि पूरे देश को गर्व का अवसर दिया है। उनकी सफलता युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा है कि दृढ़ संकल्प, अनुशासन और निरंतर मेहनत से किसी भी लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है।





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