गुलाम नबी ने बनाई नई पार्टी, ’डेमोक्रेटिक आजाद पार्टी’ रखा नाम

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July 23, 2026

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गुलाम नबी ने बनाई नई पार्टी, ’डेमोक्रेटिक आजाद पार्टी’ रखा नाम

-झंडा भी किया लॉन्च, बोले- जम्मू-कश्मीर के लोगों ने उर्दू-संस्कृत में 1500 नाम भेजे थे, इनमें से चुना

जम्मू/श्रीनगर/- नवरात्रि के पहले दिन जम्मू-कश्मीर के पूर्व CM नेता गुलाम नबी आजाद ने अपनी पार्टी का ऐलान कर दिया है। उन्होंने अपनी पार्टी का नाम आजाद पार्टी रखा है। आजाद ने बताया- मेरी नई पार्टी के लिए लगभग 1,500 नाम हमें उर्दू, संस्कृत में भेजे गए थे। हिन्दी और उर्दू का मिश्रण ’हिन्दुस्तानी’ है। हम चाहते हैं कि नाम लोकतांत्रिक, शांतिपूर्ण और स्वतंत्र हो।

नई पार्टी का फ्लैग भी लॉन्च
गुलाम नबी आजाद ने जम्मू में प्रेस कॉन्फ्रेंस में अपनी नई पार्टी का फ्लैग भी लॉन्च किया। मस्टर्ड, सफेद और नीले कलर से बने इस फ्लैग का संदेश काफी अच्छा है। मस्टर्ड कलर क्रिएटिविटी और यूनिटी को दर्शानता है। सफेद शांति को दर्शाता है और नीला स्वतंत्रता, खुली जगह, कल्पना और समुद्र की गहराई से आकाश की ऊंचाइयों तक की सीमाओं को दर्शाता है। मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि नई पार्टी में उम्र की कोई सीमा नहीं होगी। युवा और दिग्गज पार्टी में एक साथ काम करेंगे।

आजाद ने 26 अगस्त को छोड़ी थी कांग्रेस
गुलाम नबी आजाद ने 26 अगस्त को कांग्रेस के सभी पदों से इस्तीफा दे दिया था। उनके बाद जम्मू-कश्मीर के पूर्व उपमुख्यमंत्री तारा चंद सहित कई पूर्व मंत्रियों और विधायकों ने कांग्रेस छोड़ दी थी। कांग्रेस छोड़ने के साथ ही उन्होंने जम्मू-कश्मीर में नई पार्टी लॉन्च करने की घोषणा की थी।
               इसके साथ ही उन्होंने कहा था कि जम्मू-कश्मीर के लोग पार्टी का नाम और झंडा तय करेंगे। उन्होंने रैली में कहा था, ’मैंने अभी तक अपनी पार्टी के लिए नाम तय नहीं किया है। जम्मू-कश्मीर के लोग पार्टी का नाम और झंडा तय करेंगे। मैं अपनी पार्टी को एक हिंदुस्तानी नाम दूंगा जिसे हर कोई समझ सके।’

आजाद ने सोनिया को पांच पन्ने की चिट्ठी भेजी
इधर. आजाद ने अपने इस्तीफे के तौर पर पार्टी की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी को पांच पन्ने की चिट्ठी भेजी है। इस्तीफे के इन पन्नों में 7 किरदार और 3 हालात हैं। सबसे सख्त बयान राहुल को लेकर है। आजाद ने उन्हें कांग्रेस की बर्बादी की वजह बताया है।

सोनिया के बारे मेंः बेशक कांग्रेस अध्यक्ष के तौर पर आपने यूपीए-1 और यूपीए-2 के गठन में शानदार काम किया। इस सफलता का सबसे बड़ा कारण यह था कि आपने अध्यक्ष के तौर पर बुद्धिमान सलाहकारों और वरिष्ठ नेताओं के फैसलों पर भरोसा किया, उन्हें ताकत दी और उनका ख्याल रखा।

राहुल के बारे मेंः गुलाम नबी आजाद ने अपने इस्तीफे में कहा है कि राहुल गांधी ने पार्टी में एंट्री के साथ ही सलाह के मैकेनिज्म को तबाह कर दिया। खासतौर पर जनवरी 2013 में उनके उपाध्यक्ष बनने के बाद तो पार्टी में यह सिस्टम पूरी तरह बंद हो गया। सभी वरिष्ठ और अनुभवी नेताओं को साइड लाइन कर दिया गया और गैर अनुभवी चापलूसों का नया ग्रुप बन गया, जो पार्टी चलाने लगा।

अपने बारे मेंः मैं लगातार 4 दशक तक कांग्रेस वर्किंग कमेटी का सदस्य रहा। 35 साल तक मैं देश के हर राज्य और केंद्र शासित प्रदेश में पार्टी का जनरल सेक्रेटरी इंचार्ज भी रहा। मैं यह बताते हुए खुश हूं कि जिन राज्यों में मैं इंचार्ज रहा, उनमें से 90 फीसदी में कांग्रेस को जीत मिली।

पार्टी के बारे मेंः यूपीए सरकार की अखंडता को तबाह करने वाला रिमोट कंट्रोल सिस्टम अब कांग्रेस पर लागू हो रहा है। आप बस नाम के लिए इस पद पर बैठी हैं। सभी जरूरी फैसले राहुल गांधी ले रहे हैं, उससे भी बदतर यह है कि उनके सुरक्षाकर्मी और पीए ये फैसले ले रहे हैं।

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