दिल्ली में बिल्डिंग ढहने की सजा एमसीडी अधिकारियों को ही क्यूं!

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October 21, 2026

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दिल्ली में बिल्डिंग ढहने की सजा एमसीडी अधिकारियों को ही क्यूं!

-250 निगम पार्षदों की होगी संपत्ति की जांच।

नजफगढ़ मेट्रो न्यूज/
शिवकुमार यादव नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में एक के बाद एक बिल्डिंगें जमींदोज हो रही है, जिसमें बेगुनाह मासूमों का दर्दनाक अंत हो रहा है। जब तक मामला एक। हफ्ते तक गर्म रहता है, तब तक दिल्ली के बयानवीर नेता तरह- तरह के रकड़े आदेश देते हैं, भले ही कुछ समय बाद वो आदेश रद्दी की टोकरी की शोभा बढाए, लेकिन इन घटनाओं को गंभीरता से रोके जाने का कोई ठोस उपाय नहीं होता। इतना जरूर है, कि इधर बिल्डिंग गिरी, उधर एमसीडी के अधिकारी नपे… लेकिन जग-जाहिर है, कि दिल्ली में बिल्डिंग विभाग में जितने दोषी अधिकारी होते हैं, उतने ही दोषी लगभग स्थानीय जनप्रतिनिधि भी होते हैं। लेकिन सरकार है, कि जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही पर पल्ला झाड़ लेती है और केवल अधिकारियों को बलि का बकरा

बना दिया जाता है। कहावत है, कि जहां का मंत्री बेईमान हो, तो वहां का संतरी कैसे ईमानदार हो सकता है। हमाम में भले ही सब नंगे हो, लेकिन हर बार

बिल्डिंग ढहने पर केवल मातम मनाने से कुछ नहीं होगा, बल्कि उन मासूमों के बारे में गहनता से सोचना पड़ेगा, जो अपना व अपने परिवार का उज्जवल भविष्य तय करने यहां आकर ठहरा था। सर्वविदित है, कि दिल्ली में निगम पार्षद अपने वार्ड के मुखिया होते है और उसे भी पता होता है, कि उसके

वार्ड में कहां कौनसी गतिविधियां चल रही है, लेकिन उसके बावजूद अवैध निर्माण, अतिक्रमण में मिल बांटकर खाने की नीति के चलते भ्रष्टाचार की कालिख नेता और प्रशासन के मुंह पर पोती जाती है। हादसो के बाद केवल एमसीडी अधिकारियों पर ही चाबुक चलना न्यायोचित नहीं है, इसके लिए देश के गृहमंत्री श्री अमित शाह साहब को चाहिए, कि वे दिल्ली के सभी 250 निगम पार्षदों की संपत्ति की जांच पिछले चार सालो में कितनी बढी या घटी है, कराई जाएं, जिससे की ये तय हो, कि निगम पार्षद के ठाठ-बाट पहले से कितने अधिक विकसित हो चुके हैं। विकसित भारत का सपना केन्द्र सरकार जरूर देख रही है, लेकिन विकसित निगम पार्षदों की संपत्ति की जांच के बाद ही बिल्डिंगो की तासीर समझ में आएगी।

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