“वंदे मातरम: राष्ट्र चेतना का शाश्वत उद्घोष”

स्वामी,मुद्रक एवं प्रमुख संपादक

शिव कुमार यादव

वरिष्ठ पत्रकार एवं समाजसेवी

संपादक

भावना शर्मा

पत्रकार एवं समाजसेवी

प्रबन्धक

Birendra Kumar

बिरेन्द्र कुमार

सामाजिक कार्यकर्ता एवं आईटी प्रबंधक

Categories

October 2026
MTWTFSS
 1234
567891011
12131415161718
19202122232425
262728293031 
October 19, 2026

हर ख़बर पर हमारी पकड़

“वंदे मातरम: राष्ट्र चेतना का शाश्वत उद्घोष”

150 वर्ष की यात्रा का मधुर संगीत है वंदे मातरम।
भारत को एकता के सूत्र में बांधने वाला उद्घोष है वंदे मातरम।
सामूहिक चेतना का अनुपम वक्तव्य है वंदे मातरम।
देशभक्ति के जोश का उत्कर्ष है वंदे मातरम।
क्रांतिकारियों के बलिदान की आवाज है वंदे मातरम।
स्वतंत्रता संग्राम के नारे का उन्मुक्त रूप है वंदे मातरम।
मातृभूमि की भव्यता का साक्षात्कार है वंदे मातरम।
भारतीय संस्कृति की भावनात्मक दृढ़ता है वंदे मातरम।
अनेकता में एकता का अप्रतिम स्वर है वंदे मातरम।
नवीन ऊर्जा एवं अनुभूति का समन्वय है वंदे मातरम।
माँ भारती को समर्पित राष्ट्रभक्ति का प्रतीक है वंदे मातरम।
आत्मविश्वास के भाव से परिपूरित है वंदे मातरम।
इतिहास की स्मृति का जीवंत रूप है वंदे मातरम।
संकल्प के प्रति पूर्णनिष्ठा प्रदर्शित करता है वंदे मातरम।
विश्व के परिवर्तित भूगोल का साक्ष्य है वंदे मातरम।
भारत के स्वतंत्र अस्तित्व का शंखनाद है वंदे मातरम।
भारत के उन्नत स्वरूप का परिचायक है वंदे मातरम।
स्वर्णिम, अरुणिम भारत का हर्ष है वंदे मातरम।
देशप्रेम की अविरल शौर्य गंगा-यमुना है वंदे मातरम।
शांति, सौहद्र और सतत प्रगति का आह्वान है वंदे मातरम।
हर भारतवासी के दिल में गूँजता एक शाश्वत गीत है वंदे मातरम।
डॉ. रीना कहती, भारत की आन-बान और शान की स्तुति वंदन है वंदे मातरम।  

डॉ. रीना रवि मालपानी (कवयित्री एवं लेखिका)

About Post Author

आपने शायद इसे नहीं पढ़ा

Subscribe to get news in your inbox