मास्टर प्लान-2047 को मंजूरी, बदलेगी दिल्ली की तस्वीर!

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October 14, 2026

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-3.2 करोड़ की संभावित आबादी के लिए नए घर, री-डेवलपमेंट और लैंड पूलिंग पर जोर

नई दिल्ली/सिमरन मोरया/-  राजधानी दिल्ली के अगले दो दशकों के विकास की दिशा तय करने वाले मास्टर प्लान-2047 को मंजूरी मिल गई है। नए प्लान में दिल्ली के विकास को 2041 के बजाय सीधे 2047 के विजन से जोड़ते हुए आवास, परिवहन, रोजगार, इंफ्रास्ट्रक्चर और पर्यावरण को प्राथमिकता दी गई है।

मास्टर प्लान में अनुमान लगाया गया है कि आने वाले वर्षों में दिल्ली की आबादी करीब 3.2 करोड़ तक पहुंच सकती है। इस बढ़ती आबादी को ध्यान में रखते हुए नए आवासीय क्षेत्रों के विकास के साथ मौजूदा इलाकों के पुनर्विकास पर भी जोर दिया गया है।

50 साल पुराने मकानों के री-डेवलपमेंट का रास्ता आसान
मास्टर प्लान-2047 में करीब 50 साल पुराने मकानों और आवासीय क्षेत्रों के पुनर्विकास को बढ़ावा देने का प्रावधान किया गया है। पुराने और जर्जर मकानों को आधुनिक सुविधाओं के साथ दोबारा विकसित कर अतिरिक्त आवास उपलब्ध कराने की योजना है।

इसके साथ ही ग्रुप हाउसिंग सोसायटियों के री-डेवलपमेंट पर भी विशेष ध्यान दिया गया है, ताकि मौजूदा आवासीय क्षेत्रों में बेहतर सुविधाओं के साथ अधिक आवास उपलब्ध कराए जा सकें।

लैंड पूलिंग से बढ़ेगी अफोर्डेबल हाउसिंग
दिल्ली में नए आवासीय क्षेत्रों के योजनाबद्ध विकास के लिए लैंड पूलिंग पॉलिसी को महत्वपूर्ण भूमिका दी गई है। इसके जरिए बड़े भू-क्षेत्रों को एक साथ विकसित कर नए आवासीय क्षेत्र तैयार किए जाने हैं।

मास्टर प्लान का एक प्रमुख उद्देश्य अफोर्डेबल हाउसिंग को बढ़ावा देना है, ताकि बढ़ती आबादी के लिए अपेक्षाकृत किफायती घर उपलब्ध कराए जा सकें और अनियोजित निर्माण पर अंकुश लगाया जा सके।

जोनल प्लानिंग से होगा व्यवस्थित विकास
मास्टर प्लान के तहत दिल्ली को अलग-अलग जोन में बांटकर क्षेत्रवार विकास योजनाएं तैयार की जाएंगी। इनमें आवास, व्यापार, परिवहन, हरित क्षेत्र और सार्वजनिक सुविधाओं के लिए भूमि उपयोग को अधिक व्यवस्थित करने पर जोर रहेगा।

पुरानी दिल्ली और यमुना किनारे के क्षेत्रों के लिए भी विशेष प्रावधान किए गए हैं। इन इलाकों में ऐतिहासिक विरासत, पर्यावरण और नागरिक सुविधाओं के बीच संतुलन बनाकर विकास करने की योजना है।

स्लम और लाल डोरा क्षेत्रों पर भी फोकस
मास्टर प्लान में स्लम और लाल डोरा क्षेत्रों के पुनर्विकास को भी शामिल किया गया है। इन इलाकों में रहने वाले लोगों को बेहतर आवास और बुनियादी सुविधाओं से जोड़ने के साथ योजनाबद्ध विकास की दिशा में काम किया जाएगा।

रोजगार और परिवहन को भी मिलेगी प्राथमिकता
मास्टर प्लान में केवल आवास बढ़ाने के बजाय रोजगार के अवसरों और परिवहन व्यवस्था को भी विकास योजना से जोड़ा गया है। इसके तहत ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट और लो डेंसिटी एरिया डेवलपमेंट जैसे प्रावधानों पर जोर दिया गया है।

भवन निर्माण की NOC प्रक्रिया होगी आसान
भवन निर्माण से जुड़े नियमों को सरल बनाने की दिशा में भी बदलाव किए गए हैं। यूनिफाइड बिल्डिंग बायलॉज-2016 में बदलाव को मंजूरी दी गई है। इसका उद्देश्य कई मामलों में अलग-अलग विभागों से NOC लेने की प्रक्रिया को कम कर निर्माण अनुमति की प्रक्रिया को आसान और तेज बनाना है।

नरेला में मेट्रो डिपो के लिए 19.63 हेक्टेयर जमीन
मास्टर प्लान के तहत नरेला में मेट्रो डिपो के लिए करीब 19.63 हेक्टेयर जमीन का लैंड यूज बदलकर इसे ट्रांसपोर्ट उपयोग के लिए मंजूरी दी गई है। इससे नरेला सब-सिटी और आसपास के क्षेत्रों में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को मजबूत करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

अवैध निर्माण पर रोक बड़ी चुनौती
बाहरी दिल्ली में बढ़ते अनियोजित और अवैध निर्माण को रोकना मास्टर प्लान-2047 के सामने बड़ी चुनौती होगी। योजना का उद्देश्य दिल्ली के तेजी से बढ़ते शहरी विस्तार को अनियोजित निर्माण के बजाय सुनियोजित विकास की दिशा में ले जाना है।

अब लागू करने पर होगी नजर
मास्टर प्लान-2047 का व्यापक लक्ष्य दिल्ली को आधुनिक सुविधाओं से लैस ‘वर्ल्ड क्लास सिटी’ के रूप में विकसित करना है। इसमें आवास, परिवहन, रोजगार, पर्यावरण, इंफ्रास्ट्रक्चर और नागरिक सुविधाओं को एक साथ जोड़कर विकास की रूपरेखा तैयार की गई है।

मंजूरी के बाद अब इसे आगे की प्रक्रिया के लिए केंद्रीय आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय को भेजे जाने की तैयारी है। इसके बाद दिल्ली के विभिन्न हिस्सों में जोनल प्लान और विकास संबंधी योजनाओं को आगे बढ़ाया जाएगा।

मास्टर प्लान-2047 से दिल्ली के शहरी विकास में बड़े बदलाव की उम्मीद है, लेकिन इसकी वास्तविक सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि इसके प्रावधानों को जमीन पर कितनी प्रभावी और समयबद्ध तरीके से लागू किया जाता है।

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