‘बाहरी ताकतों ने भड़काई हिंसा, मजबूर किया गया तो युद्ध के लिए तैयार’

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-प्रदर्शन पर सफाई, हालात को बताया नियंत्रण में

नई दिल्ली/उमा सक्सेना/-   ईरान में जारी विरोध प्रदर्शनों को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठ रहे सवालों के बीच तेहरान की ओर से बड़ा बयान सामने आया है। भारत दौरे पर आए ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के विशेष दूत डॉ. अब्दुल मजीद हकीम इलाही ने कहा कि देश की स्थिति को लेकर बाहर जो तस्वीर पेश की जा रही है, वह वास्तविकता से बिल्कुल अलग है। उनके मुताबिक, ईरान में हालात सामान्य और नियंत्रण में हैं, जबकि कुछ विदेशी ताकतें और मीडिया संस्थान जानबूझकर भ्रम फैलाने की कोशिश कर रहे हैं।

‘प्रतिबंधों ने बढ़ाई आर्थिक मुश्किलें’
डॉ. इलाही ने स्वीकार किया कि देश आर्थिक चुनौतियों से जूझ रहा है और कुछ नागरिक असंतुष्ट भी हैं, लेकिन इसके लिए उन्होंने पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों को जिम्मेदार ठहराया। उनका कहना है कि इन प्रतिबंधों के चलते हालात कठिन हुए, जिसका फायदा उठाकर बाहरी तत्वों ने लोगों को भड़काने का काम किया। उन्होंने दावा किया कि सोशल मीडिया और विदेशी चैनलों के जरिए युवाओं को सरकार के खिलाफ उकसाया जा रहा है।

मौतों के आंकड़ों को बताया ‘भ्रामक’
प्रदर्शनों के दौरान हजारों लोगों की मौत के दावों को खारिज करते हुए ईरानी दूत ने कहा कि ये आंकड़े अतिरंजित और भ्रामक हैं। उन्होंने कहा कि कुछ हिंसक घटनाएं जरूर हुईं, जिनमें आम नागरिकों और पुलिसकर्मियों को नुकसान पहुंचा, लेकिन विदेशी संगठनों द्वारा पेश किए गए आंकड़े वास्तविकता से मेल नहीं खाते। उनके अनुसार, कई प्रदर्शनकारी बाहरी प्रभाव में आकर अराजकता फैलाने की कोशिश कर रहे थे, जिसके कारण प्रशासन को सख्ती बरतनी पड़ी।
                                                                                                                             

इंटरनेट बंदी पर भी दिया स्पष्टीकरण
डॉ. इलाही ने बताया कि इंटरनेट सेवाओं पर लगाई गई रोक सुरक्षा कारणों से थी। उनका कहना है कि अफवाहों और दुष्प्रचार को रोकने के लिए यह कदम उठाया गया, जबकि स्थानीय नेटवर्क चालू रखा गया ताकि जरूरी सेवाएं प्रभावित न हों।

अमेरिका को चेतावनी, ‘युद्ध नहीं चाहते, पर तैयार हैं’
पश्चिम एशिया में अमेरिकी सैन्य गतिविधियों और युद्धपोतों की तैनाती के सवाल पर ईरान ने सख्त रुख दिखाया। डॉ. इलाही ने स्पष्ट कहा कि ईरान शांति चाहता है, लेकिन यदि उस पर जबरन संघर्ष थोपा गया तो वह जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने यह भी दोहराया कि ईरान का परमाणु कार्यक्रम रक्षा और ऊर्जा जरूरतों के लिए है, न कि हथियार बनाने के उद्देश्य से।

भारत-ईरान संबंधों पर सकारात्मक संकेत
भारत के साथ रिश्तों पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि दोनों देशों के संबंध ऐतिहासिक और सांस्कृतिक रूप से बेहद मजबूत रहे हैं। ईरान भारत को एक भरोसेमंद मित्र मानता है और भविष्य में सहयोग को और बढ़ाने की इच्छा रखता है।

ईरान ने साफ कर दिया है कि देश के अंदरूनी हालात को लेकर बाहरी हस्तक्षेप स्वीकार नहीं किया जाएगा। साथ ही, किसी भी तरह की सैन्य चुनौती का सामना करने के लिए वह तैयार है, हालांकि प्राथमिकता शांति और स्थिरता बनाए रखने की ही है।

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