देहरादून/सिमरन मोरया/- उत्तराखंड में क्रिकेट कोच की नियुक्ति को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। बेरोजगार संघ से जुड़े राम कंडवाल ने एक गुजराती व्यक्ति की उत्तराखंड में क्रिकेट कोच के पद पर नियुक्ति पर सवाल उठाते हुए मामले की जांच और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
कंडवाल का आरोप है कि संबंधित व्यक्ति को उत्तराखंड में क्रिकेट कोच के रूप में नियुक्त किया गया है और उसे सरकारी स्तर पर वेतन एवं अन्य सुविधाएं भी मिल रही हैं। उनका कहना है कि जब उत्तराखंड में कोच के पद के लिए विज्ञप्ति जारी की गई थी, तब उसमें मूल/स्थायी निवासी होना अनिवार्य बताया गया था। ऐसे में बाहरी राज्य के व्यक्ति को नियुक्ति कैसे मिली, यह जांच का विषय है।
मूल निवास प्रमाण पत्र पर उठे सवाल
राम कंडवाल ने संबंधित व्यक्ति के स्थायी निवास प्रमाण पत्र को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं। उनका दावा है कि संबंधित व्यक्ति ने गुजरात से कक्षा 10वीं और 12वीं की पढ़ाई की तथा NIOS से भी शिक्षा प्राप्त की है। इसके अलावा उसके बड़ौदा क्रिकेट एसोसिएशन से जुड़े दस्तावेज होने की बात भी कंडवाल ने कही है।
कंडवाल के मुताबिक, संबंधित व्यक्ति बाद में उत्तराखंड की एक युवती से विवाह के बाद यहां रहने लगा। उनका दावा है कि जांच के दौरान पटवारी की रिपोर्ट में उसके वर्ष 2018 से उत्तराखंड में रहने की जानकारी सामने आई। ऐसे में, कंडवाल के अनुसार, निर्धारित अवधि पूरी हुए बिना स्थायी निवास प्रमाण पत्र जारी किए जाने पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
तहसीलदार की भूमिका पर भी जांच की मांग
कंडवाल ने सवाल उठाया कि यदि स्थायी निवास प्रमाण पत्र जारी किया गया है तो उसे जारी करने की प्रक्रिया क्या थी और संबंधित दस्तावेजों का सत्यापन किस आधार पर किया गया? उन्होंने प्रमाण पत्र जारी करने वाले अधिकारी की भूमिका की जांच तथा यदि अनियमितता सामने आती है तो कार्रवाई की मांग की है।
“उत्तराखंड में कोच बनने लायक खिलाड़ी नहीं?”
राम कंडवाल का कहना है कि उत्तराखंड में क्रिकेट के क्षेत्र में प्रतिभाओं और अनुभवी खिलाड़ियों की कोई कमी नहीं है। ऐसे में राज्य के युवाओं को अवसर देने के बजाय बाहरी व्यक्ति को सरकारी पद पर नियुक्त किए जाने से बेरोजगार युवाओं के बीच सवाल उठना स्वाभाविक है। उन्होंने पूछा कि “क्या उत्तराखंड में क्रिकेट कोच बनने के योग्य कोई व्यक्ति नहीं था?”

डीएम के पास मामला, विभाग के जवाब का इंतजार
बताया जा रहा है कि मामला फिलहाल जिलाधिकारी के स्तर पर है और जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। कंडवाल ने कहा है कि वह इस मामले को आगे भी उठाते रहेंगे और पूरे प्रकरण पर नजर रखेंगे।
कंडवाल इससे पहले भी उत्तराखंड में बाहरी राज्यों के लोगों को रोजगार मिलने से जुड़े कई मामलों को उठा चुके हैं। उनका दावा है कि ऐसे मामलों को लेकर उनके खिलाफ मुकदमे भी दर्ज किए गए हैं, लेकिन वे अपने रुख से पीछे नहीं हटेंगे।
फिलहाल सरकार या संबंधित विभाग की ओर से इस नियुक्ति और स्थायी निवास प्रमाण पत्र को लेकर कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है। ऐसे में अब निगाहें जांच और प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हैं। जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि नियुक्ति और प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया नियमों के अनुरूप थी या नहीं।


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