बदायूं में प्रभात फेरी को लेकर तनाव, पुलिस लाठीचार्ज में कई ग्रामीण घायल

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October 8, 2026

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-विवादित मार्ग बताकर रोकी गई प्रभात फेरी -भड़का ग्रामीणों का आक्रोश

नई दिल्ली/उमा सक्सेना/-    उत्तर प्रदेश के बदायूं जिले में माघ माह की प्रभात फेरी को लेकर शुक्रवार तड़के उस समय तनाव की स्थिति पैदा हो गई, जब पुलिस ने उसे विवादित मार्ग बताते हुए रोकने की कोशिश की। यह घटना इस्लामनगर थाना क्षेत्र के ग्राम ब्योर कासिमाबाद की है, जहां ग्रामीणों का कहना है कि प्रभात फेरी पिछले करीब 50 वर्षों से इसी मार्ग से निकाली जाती रही है। पुलिस की रोक-टोक से नाराज ग्रामीणों ने विरोध शुरू कर दिया, जिसके बाद हालात तेजी से बिगड़ते चले गए।

शिकायत के बाद मौके पर पहुंची भारी पुलिस फोर्स
बताया गया कि एक दिन पहले दूसरे समुदाय के कुछ लोगों ने प्रभात फेरी को लेकर आपत्ति जताते हुए पुलिस से शिकायत की थी। इसके बाद शुक्रवार सुबह करीब पांच बजे इस्लामनगर थाना पुलिस गांव पहुंची और प्रभात फेरी को रोकने का प्रयास किया। ग्रामीण प्रभात फेरी निकालने पर अड़े रहे, जिससे तनाव बढ़ गया। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए बिल्सी और उघैती थानों की पुलिस के साथ-साथ पीएसी बल को भी मौके पर बुला लिया गया।

लाठीचार्ज से मची अफरा-तफरी, महिलाएं और युवक घायल
स्थिति बेकाबू होती देख पुलिस ने सुबह करीब आठ बजे लाठीचार्ज कर दिया। अचानक हुई कार्रवाई से मौके पर भगदड़ मच गई। आरोप है कि पुलिस लाठीचार्ज में कई महिलाएं और युवक घायल हो गए, जिन्हें इलाज के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया। घटना के बाद गांव में तनाव और आक्रोश का माहौल बन गया।

अधिकारियों के पहुंचने के बाद निकली प्रभात फेरी
घटना की सूचना मिलने पर एसडीएम बिसौली राशि कृष्णा, सीओ बिल्सी और एसपी देहात डॉ. हृदेश कठेरिया मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने ग्रामीणों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन ग्रामीण प्रभात फेरी रोकने वाले पुलिसकर्मियों और अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग पर अड़े रहे। काफी देर चली गहमा-गहमी के बाद पुलिस को बैकफुट पर आना पड़ा और प्रभात फेरी को पुलिस की निगरानी में उसी मार्ग से निकलवाया गया।

एसपी देहात का बयान, अब नहीं होगी रोक
एसपी देहात डॉ. हृदेश कठेरिया ने बताया कि प्रारंभिक तौर पर प्रभात फेरी को लेकर विरोध की जानकारी मिली थी, जिसके चलते उसे रोका गया। बाद में यह स्पष्ट हुआ कि प्रभात फेरी कई वर्षों से उसी मार्ग से निकलती आ रही है, इसलिए मौके पर पहुंचकर उसे निकलवाया गया। उन्होंने कहा कि ग्रामीणों को समझा दिया गया है और अब प्रभात फेरी पर किसी प्रकार की रोक नहीं रहेगी।

पहले भी बदला जा चुका है मार्ग, पुराना विवाद फिर उभरा
ग्रामीणों के अनुसार, करीब दस वर्ष पहले सपा सरकार के दौरान भी एक समुदाय की आपत्ति के बाद प्रभात फेरी का मार्ग बदल दिया गया था। इस बार ग्रामीणों ने परंपरागत पुराने मार्ग से प्रभात फेरी निकालनी शुरू की, जिस पर फिर आपत्ति दर्ज कराई गई। इससे एक दिन पहले भी गांव में स्थिति तनावपूर्ण हो गई थी, हालांकि तब पुलिस ने स्थिति संभालते हुए प्रभात फेरी को वैकल्पिक मार्ग से निकलवाया था।

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