14 साल से अलग रह रही पत्नी को माना ‘क्रूरता’

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-2011 से अलग रह रहा था दंपती -पति को तलाक की मंजूरी

 बिलासपुर/उमा सक्सेना/- छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने शादी से जुड़े एक विवादित मामले में अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने कहा कि पत्नी ने बिना किसी उचित कारण के 14 साल तक पति से दूरी बनाई, जो वैवाहिक क्रूरता के अंतर्गत आता है। यही वजह है कि पति को तलाक लेने की अनुमति दी जाती है। यह मामला कोरबा जिले के कटघोरा क्षेत्र का है, जहां दंपती 2011 से अलग रह रहे थे।

पत्नी की शिकायतों से पति को झेलनी पड़ी मानसिक पीड़ा

अदालत के अनुसार, पत्नी ने कई बार पति और उसके परिवार के खिलाफ आपराधिक शिकायतें दर्ज कराईं। इनमें दहेज प्रताड़ना, घरेलू हिंसा और भरण-पोषण से जुड़े मामले भी शामिल थे। इन मामलों ने पति को लंबे समय तक मानसिक तनाव दिया। हालांकि 2019 में सेशन कोर्ट ने पति और उसके परिवार को सभी आरोपों से बरी कर दिया। इसके बावजूद पत्नी पति से अलग ही रही और रिश्ते में सुधार की कोई संभावना नहीं बची।

शादी और विवादों की पृष्ठभूमि

पति एसईसीएल में माइनिंग सरदार के पद पर कार्यरत हैं। उनकी शादी 11 फरवरी 2010 को हुई थी और कुछ समय बाद दंपती की एक बेटी हुई। इसके बाद विवाद बढ़ने लगे। पति का आरोप था कि पत्नी ने पारिवारिक जिम्मेदारियां निभाने से इनकार कर दिया और अलग घर बसाने का दबाव बनाया। वहीं पत्नी का आरोप था कि बेटी होने के बाद ससुराल पक्ष का रवैया बदल गया और पांच लाख रुपये की मांग करते हुए उसे प्रताड़ित किया गया।

फैमिली कोर्ट का फैसला और हाईकोर्ट की हस्तक्षेप

पति ने 2015 में तलाक की अर्जी लगाई थी, लेकिन 2017 में कटघोरा फैमिली कोर्ट ने इसे खारिज कर दिया। अदालत ने कहा था कि पति पत्नी की ओर से हुई कथित ‘क्रूरता’ साबित नहीं कर सका। इसके बाद पति ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। जस्टिस रजनी दुबे और जस्टिस अमितेंद्र किशोर प्रसाद की डिवीजन बेंच ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद पाया कि पत्नी के अलग रहने की कोई ठोस वजह नहीं थी और उसके कदमों ने पति को मानसिक प्रताड़ना दी।

गुजारा भत्ता देने का आदेश

हाईकोर्ट ने तलाक की मंजूरी देते हुए पति को निर्देश दिया कि वह छह महीने के भीतर पत्नी को 15 लाख रुपये स्थायी गुजारा भत्ता के तौर पर अदा करे। अदालत ने कहा कि इतने वर्षों से अलग रहने और बार-बार कानूनी विवाद खड़े करने से दंपती के बीच पुनर्मिलन की संभावना समाप्त हो चुकी है। इसके साथ ही करीब 14 साल से लंबित यह विवाहिक विवाद कानूनी रूप से खत्म हो गया।

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