शिवसेना के 53 विधायकों को कारण बताओ नोटिस, विधानमंडल सचिव ने मांगा जवाब

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शिवसेना के 53 विधायकों को कारण बताओ नोटिस, विधानमंडल सचिव ने मांगा जवाब

-दोनो गुटों के कुल 53 विधायकों को एक सप्ताह के अंदर देना होगा जवाब नजफगढ़ मैट्रो न्यूज/मुंबई/मानसी शर्मा/- महाराष्ट्र के सियासी उठापटक के बीच राज्य

नजफगढ़ मैट्रो न्यूज/मुंबई/मानसी शर्मा/- महाराष्ट्र के सियासी उठापटक के बीच राज्य विधानमंडल सचिव राजेंद्र भागवत ने दोनों पक्षों की शिकायत मिलने पर शिवसेना के दोनों गुटों के 53 विधायकों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। सभी को एक सप्ताह के भीतर जवाब देना है। शिवसेना के 53 विधायकों को कारण बताओ नोटिस जारी करने पर महाराष्ट्र विधानमंडल सचिव राजेंद्र भागवत ने कहा कि जब भी हमें कोई आवेदन मिलता है तो हमें उस पर कार्रवाई करनी होती है इसलिए प्रत्येक विधायक को नोटिस जारी किया गया है जिसके खिलाफ आवेदन किया गया था।
             इस बीच बताया जा रहा है कि अगले सप्ताह महाराष्ट्र सरकार का मंत्रिमंडल का विस्तार हो सकता है। मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने शनिवार को कहा था कि वह उप मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के साथ विचार-विमर्श के बाद अगले सप्ताह अपने मंत्रिमंडल का विस्तार करेंगे। साथ ही उन्होंने अपना कार्यकाल पूरा करने और भाजपा के साथ गठबंधन में अगला चुनाव जीतने का भी भरोसा जताया था। उनका यह बयान दिल्ली में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और भाजपा अध्यक्ष जे पी नड्डा से मुलाकात के बाद आया।
              शिंदे और फडणवीस ने 30 जून को पदभार ग्रहण किया था। उससे पहले तत्कालीन मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने सीएम पद से इस्तीफा दे दिया था। इसके पीछे की वजह से शिवसेना में फूट थी। शिवसेना के 40 से ज्यादा विधायकों ने शिंदे के नेतृत्व में बगावत कर दी थी। उनका आरोप था कि सीएम ठाकरे ने हिंदुत्व के मुद्दे से समझौता किया और पार्टी को कमजोर किया।

सुप्रीम कोर्ट में 11 जुलाई को सुनवाई
वहीं, सुप्रीम कोर्ट एकनाथ शिंदे को मुख्यमंत्री बनाए जाने के खिलाफ शिवसेना के उद्धव ठाकरे नीत धड़े द्वारा दायर याचिका पर 11 जुलाई को सुनवाई करेगा। जस्टिस इंदिरा बनर्जी और जस्टिस जेके माहेश्वरी की अवकाशकालीन पीठ मामले को सुनेगा। शिवसेना नेता सुभाष देसाई की ओर से याचिका दायर की गई है। देसाई ने महाराष्ट्र में सरकार बनाने के लिए शिंदे गुट और भाजपा गठबंधन को आमंत्रित करने के राज्यपाल के 30 जून के फैसले को चुनौती दी है। ठाकरे गुट ने तीन और चार जुलाई को हुई विधानसभा की कार्यवाही की वैधता को भी चुनौती दी है, जिसमें सदन में नए अध्यक्ष का चुनाव किया गया था।

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