नजफगढ़ मैट्रो न्यूज/जयपुर/मानसी शर्मा/- यमुना को स्वच्छ बनाने के लिए दिल्ली सरकार जल्द एक बड़ा कदम उठाने जा रही है। सरकार की योजना है कि नजफगढ़ नाले के समानांतर एक और नाला बनाकर अन्य नालों के पानी को दिल्ली में शोधित कर यमुना में छोड़ा जाये। दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने जयपुर में आयोजित अन्तरराज्यीय परिषद द्वारा आयोजित उत्तरी क्षेत्रीय परिषद् की 30वीं बैठक में प्रदूषण, पानी की कमी और यमुना का मुद्दा उठाया। उन्होंने हरियाणा की ओर से छोड़े जाने वाले प्रदूषित पानी का मुद्द केंद्र सरकार के समक्ष उठा आगे बात बढ़ाने पर जोर दिया। बैठक में उपराज्यपाल विनय सक्सेना भी अधिकारियों के साथ शामिल हुए।

बैठक में गृहमंत्री अमित शाह ने उपमुख्यमंत्री के अनुरोध पर गृहसचिव अजय भल्ला की अध्यक्षता में एक समिति बनाने का निर्णय लेते हुए इस मुद्दे को जल्द से जल्द सुलझाने का निर्देश दिया है।
उपमुख्यमंत्री ने जोर दिया कि दिल्ली सरकार अब नजफगढ़ नाले में दिल्ली से जा रहे गंदे पानी को शोधित जल संयंत्र के जरीये शोधित करके नजफगढ़ नाले में डालने वाली है और दिल्ली सरकार द्वारा नजफगढ़ नाले की सफाई का काम शुरू कर दिया गया है। लेकिन, जबतक हरियाणा से आने वाला केमिकल और औद्योगिक कचरा युक्त पानी बिना शोधित किए नजफगढ़ नाले में भेजा जाएगा, तबतक इस नाले की सफाई संभव नहीं हो पाएगी। सिसोदिया ने उपराज्यपाल द्वारा दिए गए एक अन्य प्रस्ताव का भी समर्थन किया, जिसमें नजफगढ़ नाले के समानांतर एक दूसरे नाले को बनाने की बात कही गई थी। इसके तहत अन्य नाले के पानी को दिल्ली में लाकर वहां एक शोधित जल संयंत्र बनाकर साफ कर लिया जाएगा और उसके बाद यमुना में छोड़ा जाएगा।
बैठक के दौरान उपराज्यपाल ने भी हरियाणा से आने वाले प्रदूषित पानी का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि हरियाणा के तीन नाले नजफगढ़ नाले में आकर गिरते हैं, जो नजफगढ़ नाले को और प्रदूषित कर रहे हैं और यही प्रदूषित पानी यमुना में गिर रहा है। उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने इस मुद्दे पर जोर देते हुए इससे संबंधित आंकड़ों को अन्तर्राजीय परिषद् के समक्ष रखा। उन्होंने कहा कि वर्तमान में औद्योगिक व केमिकल एफ्यूलेंट वाला पांच हजार क्यूसेक पानी हरियाणा से आता है और नजफगढ़ नाले में मिलता है। इतना ही पानी दिल्ली के अलग-अलग नालों से नजफगढ़ नाले में मिलता है और लगभग 10 हजार क्यूसेक गंदा पानी नजफगढ़ नाले में जा रहा है। इसमें हरियाणा से आने वाले औद्योगिक व केमिकल एफ्यूलेंट की मात्रा बहुत ज्यादा है, जिसे यदि नहीं रोका गया तो दिल्ली व उत्तर प्रदेश को लगातार इसका नुकसान उठाना पड़ेगा।

उपमुख्यमंत्री ने परिषद में प्रदूषण के मुद्दे को भी उठाया। उन्होंने कहा कि प्रदूषण को कम करने के लिए दिल्ली द्वारा जो कदम उठाये जा रहे हैं, वही कदम पूरे एनसीआर में भी उठाए जाने की जरुरत है। खासकर उत्तर प्रदेश के नोएडा, गाजियाबाद, लोनी आदि शहरों तथा हरियाणा के गुडगांव, फरीदाबाद, बहादुरगढ़ व सोनीपत आदि शहरों में इसी तरह के कदम उठाने की जरुरत है। क्योंकि, दिल्ली में धूल से होने वाला प्रदूषण कम हो गया, लेकिन इन शहरों में डीजल वाहन ऐसे ही चलते रहे तो दिल्ली को प्रदूषण मुक्त नहीं हो सकेगी। उपमुख्यमंत्री ने कहा कि पड़ोसी राज्यों से आने वाली अन्तर्राजीय बसें, जो अभी डीजल पर चलती हैं उन्हें भी ई-वाहन या सीएनजी में बदला जाए या कम से कम वो बसें बीएस-6 मानक की हो।
सिसोदिया ने रेणुका डैम के निर्माण कार्य में तेजी लाने की मांग उठाई और अनुरोध किया कि रेणुका डैम में इकठ्ठा होने वाले पानी में से दिल्ली को मिलने वाले पानी की मात्रा अभी से तय कर कर ली जाए, ताकि दिल्ली की आगे की पानी से संबंधित योजनाओं में इसे शामिल किया जा सके। दिल्ली सरकार ने रेणुका डैम बनाने में साझेदारी के तहत 214 करोड़ रूपये दिए हैं। इसके अतिरिक्त उत्तराखंड में बन रहे लखावर बांध और किसाऊ बांध को बनाने में दिल्ली सरकार सहयोग दे रही है। इसमें भी इकठ्ठा होने वाले पानी में दिल्ली को हिस्सा मिलेगा। आने वाले समय में दिल्ली की पानी की मांग को पूरा किया जा सके, इस दिशा में दिल्ली सरकार अन्य राज्यों के साथ सहयोग व समझौते कर रही है।


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