रसोई की सीटी से रेल के इंजन तक: प्रेशर कुकर के आविष्कार की अनोखी कहानी

स्वामी,मुद्रक एवं प्रमुख संपादक

शिव कुमार यादव

वरिष्ठ पत्रकार एवं समाजसेवी

संपादक

भावना शर्मा

पत्रकार एवं समाजसेवी

प्रबन्धक

Birendra Kumar

बिरेन्द्र कुमार

सामाजिक कार्यकर्ता एवं आईटी प्रबंधक

Categories

September 2026
M T W T F S S
 123456
78910111213
14151617181920
21222324252627
282930  
September 17, 2026

हर ख़बर पर हमारी पकड़

रसोई की सीटी से रेल के इंजन तक: प्रेशर कुकर के आविष्कार की अनोखी कहानी

-डेनिस पैपिन के वैज्ञानिक प्रयोग ने बदली दुनिया, भाप की ताकत से औद्योगिक क्रांति की रखी नींव

नई दिल्ली/-  आज प्रेशर कुकर लगभग हर घर की रसोई का अभिन्न हिस्सा बन चुका है, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि इसी साधारण से दिखने वाले उपकरण ने दुनिया की औद्योगिक क्रांति की नींव रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। प्रेशर कुकर का आविष्कार 1679 में फ्रांसीसी भौतिक विज्ञानी और गणितज्ञ डेनिस पैपिन ने किया था, जिसे उन्होंने “स्टीम डाइजेस्टर” नाम दिया था।

1. शाही मेहमानों के सामने ‘हड्डियों का हलवा’ 

 डेनिस पैपिन का उद्देश्य केवल खाना जल्दी पकाना नहीं था। वे भाप और दबाव के वैज्ञानिक सिद्धांतों को समझना और यह साबित करना चाहते थे कि बंद बर्तन में बढ़ता दबाव पानी के उबलने के तापमान को बढ़ा देता है, जिससे भोजन तेजी से पकाया जा सकता है। साथ ही वे सीमित संसाधनों से अधिक पोषण प्राप्त करने का समाधान भी खोज रहे थे। उनके प्रयोगों में जानवरों की कठोर हड्डियां भी इतनी मुलायम हो गईं कि उनसे पौष्टिक शोरबा और जिलेटिन तैयार किया जा सका।

2. जब कुकर बन गया तो उसका पहला धमाका

 पैपिन के आविष्कार ने वैज्ञानिक जगत में सनसनी मचा दी। वर्ष 1682 में उन्होंने इंग्लैंड के राजा चार्ल्स द्वितीय और रॉयल सोसाइटी के वैज्ञानिकों के लिए एक विशेष भोज का आयोजन किया। इस भोज में स्टीम डाइजेस्टर में पकाए गए भोजन को परोसा गया। कठोर हड्डियों से बने व्यंजन इतने मुलायम थे कि उपस्थित मेहमान आश्चर्यचकित रह गए। यह आयोजन बाद में “द फिलॉसॉफिकल सपर” के नाम से प्रसिद्ध हुआ।

हालांकि शुरुआती दौर में यह आविष्कार पूरी तरह सुरक्षित नहीं था। एक प्रयोग के दौरान अत्यधिक दबाव के कारण बर्तन में जोरदार विस्फोट हो गया। इस घटना के बाद डेनिस पैपिन ने सेफ्टी वाल्व का आविष्कार किया, जो आज के प्रेशर कुकर की सीटी का मूल आधार माना जाता है। यह वाल्व अतिरिक्त दबाव को बाहर निकालकर दुर्घटनाओं को रोकता है।

उस समय आम लोग और रसोइये इस नई तकनीक से भयभीत थे। बंद लोहे के बर्तन से निकलती आवाजें और भाप उन्हें किसी रहस्यमय यंत्र जैसी लगती थीं। कई लोगों ने इसे इस्तेमाल करने से भी इनकार कर दिया था।

लेकिन इसी स्टीम डाइजेस्टर ने वैज्ञानिकों को भाप की शक्ति का अहसास कराया। जब यह देखा गया कि भाप भारी ढक्कन को ऊपर उठा सकती है, तो वैज्ञानिकों ने सोचना शुरू किया कि यही शक्ति मशीनों को भी चला सकती है। आगे चलकर इसी विचार ने भाप के इंजन के विकास का मार्ग प्रशस्त किया। बाद में जेम्स वाट और अन्य वैज्ञानिकों ने भाप इंजन को विकसित किया, जिसने औद्योगिक क्रांति को जन्म दिया और परिवहन तथा उद्योगों की दुनिया बदल दी।

3. रसोइयों का डर और ‘जादू टोना’ 

 1713 के आसपास डेनिस पैपिन का निधन हो गया, लेकिन उनका आविष्कार आज भी दुनिया भर की रसोइयों में मौजूद है। प्रेशर कुकर न केवल भोजन पकाने का एक उपयोगी उपकरण बना, बल्कि उसने विज्ञान, उद्योग और परिवहन के क्षेत्र में भी ऐतिहासिक परिवर्तन की राह खोल दी। एक छोटे से वैज्ञानिक प्रयोग ने दुनिया को भाप इंजन, रेलगाड़ियां और आधुनिक औद्योगिक युग की सौगात दी।

About Post Author

आपने शायद इसे नहीं पढ़ा

Subscribe to get news in your inbox