बांग्लादेश में हिंसा की आग: आरक्षण विरोधी प्रदर्शन और शेख हसीना के इस्तीफे की मांग

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October 18, 2026

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बांग्लादेश में हिंसा की आग: आरक्षण विरोधी प्रदर्शन और शेख हसीना के इस्तीफे की मांग

-देशव्यापी कर्फ्यू और इंटरनेट पर रोक

बांग्लादेश/नई दिल्ली/अनीशा चौहान/-  बांग्लादेश इस वक्त हिंसा की आग में जल रहा है। सरकारी नौकरियों में आरक्षण खत्म करने और प्रधानमंत्री शेख हसीना के इस्तीफे की मांग कर रहे प्रदर्शनकारियों और सत्तारूढ़ पार्टी के समर्थकों के बीच हुई हिंसा में अब तक 14 पुलिसकर्मियों समेत करीब 300 लोगों की जान जा चुकी है। हिंसा में हजारों लोग घायल हुए हैं।

देशव्यापी कर्फ्यू और इंटरनेट पर रोक

बांग्लादेश में हालात इतने खराब हो गए हैं कि पूरे देश में अनिश्चितकाल के लिए कर्फ्यू लगा दिया गया है। साथ ही विरोध को दबाने के लिए देश में इंटरनेट सेवा पर भी रोक लगा दी गई है। हाईवे और सरकारी संपत्तियों को नुकसान पहुंचा रहे छात्रों पर पुलिस गोलीबारी और आंसू गैस के गोले भी दाग रही है।

 20 जिलों में पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प

छात्र देश में असहयोग अभियान चला रहे हैं। रविवार को कम से कम 20 जिलों में पुलिस बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प हुई। प्रदर्शनकारी लगातार प्रदर्शन के जरिए प्रधानमंत्री शेख हसीना पर इस्तीफे का दबाव बनाए रखना चाहते हैं.

प्रदर्शनकारियों की मांगें

बांग्लादेश में हो रही हिंसा का मुख्य कारण सरकारी नौकरियों में आरक्षण व्यवस्था है। बांग्लादेश में 56 प्रतिशत सरकारी नौकरियाँ आरक्षण प्रणाली के तहत आरक्षित हैं। स्वतंत्रता सेनानियों के परिवारों के लिए 30 प्रतिशत आरक्षण, पिछड़े प्रशासनिक जिलों के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण, महिलाओं के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण, जातीय अल्पसंख्यक समूहों के लिए 5 प्रतिशत और विकलांग लोगों के लिए 1 प्रतिशत आरक्षण निर्धारित है।

आरक्षण को लेकर विवाद

विवाद मुख्य रूप से 30 प्रतिशत आरक्षण को लेकर है, जो स्वतंत्रता सेनानियों के परिवारों को दिया जाता है। प्रदर्शनकारी छात्रों का कहना है कि सरकार उन लोगों को आरक्षण देने के पक्ष में है जो शेख हसीना सरकार का समर्थन करते हैं। छात्रों का आरोप है कि सरकारी नौकरियां योग्यता के आधार पर नहीं दी जा रही हैं।

हिंसक विरोध प्रदर्शन की शुरुआत

पिछले महीने बांग्लादेश में सरकारी नौकरियों में 30 प्रतिशत आरक्षण की कोटा व्यवस्था को लेकर हिंसक विरोध प्रदर्शन शुरू हुआ था। जैसे ही विरोध तेज़ हुआ, सुप्रीम कोर्ट ने कोटा घटाकर 5 प्रतिशत कर दिया, जिसमें से 3 प्रतिशत सेनानियों के रिश्तेदारों को दिया गया।

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