छठ पूजा पर नाक से मांग तक सिंदूर लगाने की पौराणिक वजह

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छठ पूजा पर नाक से मांग तक सिंदूर लगाने की पौराणिक वजह

मानसी शर्मा/-  छठ पूजा एक ऐसा पर्व है जिसमें सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु और सुखी दांपत्य जीवन के लिए व्रत रखती हैं और सूर्य देव की पूजा करती हैं। इस दौरान महिलाएं नाक से मांग तक सिंदूर लगाती हैं, जो एक महत्वपूर्ण परंपरा है। लेकिन क्या आप नाक से मांग तक सिंदूर लगाने की परंपरा के पीछे पौराणिक, धार्मिक और वैज्ञानिक कारण जानते हैं? सिंदूर भारतीय संस्कृति का एक ऐसा प्रतीक है, जो शादीशुदा महिलाओं की पहचान और सामाजिक मान्यता का हिस्सा माना जाता है। लेकिन छठ पूजा में इसका महत्व कई ज्यादा बढ़ जाता है।
नाक से मांग तक सिंदूर लगाने की पौराणिक कथा

मालूम हो कि सिंदूर का उपयोग हिंदू धर्म में बहुत प्राचीन काल से होता आया है। इसे शक्ति और सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है। नाक से मांग तक सिंदूर लगाने के पीछे एक पौराणिक कथा है। छठ पूजा सूर्य देव और छठी माता को समर्पित होती है। इस दौरान विवाहित महिलाएं अपने परिवार की खुशहाली और बच्चों के स्वास्थ्य के लिए सिंदूर लगाती हैं। इसे सूर्य देव के प्रकाश और ऊर्जा का प्रतिनिधि भी माना जाता है।

एक कथा के अनुसार, वीरवान नामक एक युवक था जो एक शिकारी और वीर था। उसने धीरमति नामक एक युवती को जंगली जानवरों से बचाया और दोनों ने विवाह कर लिया। एक दिन वीरवान ने धीरमति की बहादुरी की सराहना की और अपना हाथ प्यार से उसके सर पर रखा। हाथ खून में रंगा था, जिससे धीरमति की मांग और माथे पर खून लग गया। तब से सिंदूर को वीरता, प्रेम और सम्मान का प्रतीक माना जाने लगा।

नाक से मांग तक सिंदूर लगाने का वैज्ञानिक कारण

नाक से मांग तक के हिस्से को अजना चक्र से जोड़ा जाता है, जो मानसिक शांति, सकारात्मक ऊर्जा और ध्यान बढ़ाने में मदद करता है। इसलिए नाक से मांग तक सिंदूर लगाने से न केवल धार्मिक बल्कि मानसिक लाभ भी होता है। ऐसा करने से रक्त संचार में सुधार होता है, जिससे ध्यान और मानसिक शक्ति बढ़ती है। इसके अलावा तंत्रिका तंत्र पर भी असर पड़ता है।  नाक के पास का क्षेत्र (जिसे विज्ञान में ‘नसें और न्यूरल पॉइंट्स’ कहते हैं) शरीर के कई अंगों से जुड़ा होता है। सिंदूर लगाने से हल्का दबाव पड़ता है, जो मानसिक संतुलन और शांति प्रदान कर सकता है।

छठ पूजा में सिंदूर का विशेष महत्व

संतान सुख और परिवार की रक्षा: सिंदूर मांग में लगाने से पारिवारिक सुख और संतान सुख की कामना की जाती है।
सूर्य देव के सम्मान में: लाल रंग सूर्य की ऊर्जा और जीवन शक्ति का प्रतीक है, इसलिए पूजा के दौरान इसका विशेष महत्व होता है।
सांस्कृतिक पहचान: यह एक सामाजिक प्रतीक भी है, जो विवाहित महिलाओं की पहचान और उनकी पारिवारिक जिम्मेदारियों को दर्शाता है।

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