बद्रीनाथ धाम/चमोली/अनीशा चौहान/- शीतकालीन प्रवास के पश्चात भगवान विष्णु के प्रतिनिधि उद्धव जी तथा देवताओं के खजांची कुबेर जी की पवित्र उत्सव डोलियाँ आज सकुशल श्री बद्रीनाथ धाम पहुँच गईं। यह यात्रा धार्मिक आस्था, वैदिक परंपराओं और लोक श्रद्धा का अद्वितीय उदाहरण रही, जिसने हज़ारों श्रद्धालुओं के हृदय को भावविभोर कर दिया।

सुबह योगध्यान बद्री मंदिर, पांडुकेश्वर में विधिवत पूजा-अर्चना और वैदिक अनुष्ठानों के साथ इस दिव्य यात्रा का शुभारंभ हुआ। भगवान बद्री विशाल की उत्सव डोली, आदि गुरु शंकराचार्य की गद्दी, गाडू घड़ा (पवित्र तेल कलश), रावल जी (मुख्य पुजारी), भगवान के परम सखा उद्धव जी एवं खजांची कुबेर जी की डोलियाँ पारंपरिक रीति से यात्रा के लिए रवाना हुईं।

यात्रा के दौरान भारतीय सेना के बैंड ने भक्तिमय धुनों से वातावरण को भावपूर्ण बना दिया। “जय बद्री विशाल” के जयघोषों और श्रद्धालुओं की अपार श्रद्धा के बीच यह यात्रा आगे बढ़ती रही। सुरक्षा की दृष्टि से पुलिस प्रशासन ने पूरे मार्ग पर सख्त इंतजाम किए, जिससे यात्रा निर्विघ्न रूप से संपन्न हो सकी।

बद्रीनाथ धाम पहुँचने से पहले डोलियों का स्वागत मार्ग के पवित्र स्थलों जैसे विष्णुप्रयाग, लामबगड़ और हनुमानचट्टी में किया गया। स्थानीय श्रद्धालुओं ने डोलियों की अगवानी की, पुष्प वर्षा की और पूजा-अर्चना कर दिव्य आशीर्वाद प्राप्त किया।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जब शीतकाल में श्री बद्रीनाथ धाम के कपाट बंद हो जाते हैं, तब भगवान विष्णु के प्रतिनिधि उद्धव जी और खजांची कुबेर जी योगध्यान बद्री मंदिर, पांडुकेश्वर में प्रवास करते हैं। चारधाम यात्रा के पुनः आरंभ होने से पूर्व इन स्वरूपों का बद्रीनाथ धाम लौटना यह दर्शाता है कि भगवान की उपस्थिति धाम में निरंतर बनी रहती है और उनका दिव्य प्रशासन निरंतर चलता है।


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