अनुच्छेद 370 की बहाली के प्रस्ताव पर विधानसभा में हंगामा, BJP ने किया जोरदार विरोध

स्वामी,मुद्रक एवं प्रमुख संपादक

शिव कुमार यादव

वरिष्ठ पत्रकार एवं समाजसेवी

संपादक

भावना शर्मा

पत्रकार एवं समाजसेवी

प्रबन्धक

Birendra Kumar

बिरेन्द्र कुमार

सामाजिक कार्यकर्ता एवं आईटी प्रबंधक

Categories

November 2026
MTWTFSS
 1
2345678
9101112131415
16171819202122
23242526272829
30 
November 1, 2026

हर ख़बर पर हमारी पकड़

अनुच्छेद 370 की बहाली के प्रस्ताव पर विधानसभा में हंगामा, BJP ने किया जोरदार विरोध

मानसी शर्मा /-   आज जम्मू-कश्मीर की विधानसभा सत्र का दिन काफी हंगामेदार रहा। इस सत्र में अनुच्छेद 370 के तहत तत्कालीन राज्य के विशेष दर्जे को बहाल करने की मांग करते हुए एक ऐतिहासिक प्रस्ताव पारित किया गया। बता दें, पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी के विधायक वहीद उर रहमान पारा ने केंद्र सरकार के इस के फैसले की निंदा की है।

प्रस्ताव में क्या कहा गया?

विधानसभा में पेश किए गए प्रस्ताव में कहा गया ‘यह विधानसभा विशेष दर्जे और संवैधानिक गारंटी के महत्व की पुष्टि करती है। जिसने जम्मू-कश्मीर के लोगों की पहचान, संस्कृति और अधिकारों की रक्षा की हैं। उनके एकतरफा निष्कासन पर चिंता व्यक्त करती है।’

प्रस्ताव में आगे कहा गया ‘यह विधानसभा भारत सरकार से जम्मू-कश्मीर के लोगों के निर्वाचित प्रतिनिधियों के साथ विशेष दर्जे, संवैधानिक गारंटी की बहाली की मांग करती है। विधानसभा इस बात पर जोर देती है कि बहाली की कोई भी प्रक्रिया राष्ट्रीय एकता और जम्मू-कश्मीर के लोगों की वैध आकांक्षाओं दोनों की रक्षा करेगी।’

बीजेपी ने किया विरोध

नेशनल कॉन्फ्रेंस के इस प्रस्ताव को बीजेपी ने राष्ट्रविरोधी एजेंडा करार दिया है। इस दौरान पार्टी ने जमकर हंगामा किया और ‘5 अगस्त जिंदाबाद के नारे भी लगाए। बीजेपी का कहना है ‘जहां हुए बलिदान मुखर्जी, वो कश्मीर हमारा है।’ वहीं, BJP नेता शाम लाल शर्मा ने कहा ‘अनुच्छेद 370 फाइनल है। शेख अब्दुल्ला से लेकर उमर अब्दुल्ला तक, भावनात्मक ब्लैकमेल करना नेशनल कॉन्फ्रेंस की दिनचर्या है। उन्होंने आगे कहा कि स्पीकर को स्वतंत्र होना चाहिए। किसी भी पार्टी का पक्ष नहीं लेना चाहिए।

क्या है अनुच्छेद 370?

नरेंद्र मोदी सरकार ने 5 अगस्त, 2019 को जम्मू-कश्मीर से संविधान के अनुच्छेद 370 को खत्म कर एक ऐतिहासिक फैसला लिया था। अनुच्छेद 370 में जम्मू-कश्मीर को विशेष स्वायत्तता का दर्जा दिया गया था। जिससे क्षेत्र को अपने संविधान और ध्वज सहित अपने आंतरिक मामलों पर महत्वपूर्ण नियंत्रण था। लेकिन रक्षा, संचार और विदेशी मामलों को इससे बाहर रखा गया था। इसी के साथ जम्मू-कश्मीर को दो अलग-अलग केंद्र शासित प्रदेशों में बांटा गया था। जिसमें जम्मू-कश्मीर और लद्दाख बनाया गया।

About Post Author

आपने शायद इसे नहीं पढ़ा

Subscribe to get news in your inbox