UP: पूर्व कैबिनेट मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य और उनकी पूर्व सांसद बेटी संघमित्रा को कोर्ट ने फरार घोषित किया

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August 2, 2026

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UP: पूर्व कैबिनेट मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य और उनकी पूर्व सांसद बेटी संघमित्रा को कोर्ट ने फरार घोषित किया

उत्तर प्रदेश/नई दिल्ली/सिमरन मोरया/- बिना तलाक लिए धोखाधड़ी करके विवाह करने के मामले में दायर केस में लगातार पेशी पर नहीं आने के बाद एमपी-एमएलए कोर्ट ने पूर्व मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य और उनकी पूर्व सांसद बेटी संघमित्रा को भगोड़ा घोषित कर दिया है। पूर्व कैबिनेट मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य और उनकी पूर्व सांसद बेटी संघमित्रा को कोर्ट से फरार घोषित किया है। शुक्रवार को लखनऊ की एमपी-एमएलए कोर्ट ने पिता और पुत्री को फरार घोषित किया। बिना तलाक लिए धोखाधड़ी करके विवाह करने के मामले में दायर केस में लगातार पेशी पर नहीं आने के बाद कोर्ट ने यह आदेश जारी किया है। तीन बार समन, दो बार जमानती वारंट और एक बार गैर जमानती वारंट जारी होने के बाद भी वे कोर्ट में हाजिर नहीं हो रहे हैं।

संघमित्रा, स्वामी प्रसाद मौर्य समेत पांच पर दीपक कुमार स्वर्णकार ने मारपीट, गाली गलौज, जानमाल की धमकी, साजिश रचने का मामला दर्ज कराया गया था। दीपक के अनुसार संघमित्रा मौर्य से उनकी शादी हुई है, जिसे वो नकार रही है. पिता धमकी दे रहे हैं। इसी मामले में लखनऊ की एमपी एमएलए कोर्ट में मामला दायर हुआ है। उसके बाद कोर्ट ने उन्हें भगोड़ा घोषित किया है।

कोर्ट में हाजिर नहीं होने पर जारी किया आदेश
स्वामी प्रसाद मौर्य यूपी के पूर्व मंत्री और राष्ट्रीय शोषित समाज पार्टी के प्रमुख हैं। उनकी बेटी संघमित्रा मौर्य भाजपा की पूर्व सांसद हैं। लखनऊ की एमपी और एमएलए कोर्ट ने सुनवाई के दौरान हाजिर नहीं होने के कारण उन्हें भगोड़ा घोषित किया है। आरोप है कि कोर्ट में सुनवाई के दौरान वे लोग हाजिर नहीं हो रहे थे।

एमपी-एमएल कोर्ट ने दीपक कुमार स्वर्णकार द्वारा दायर मामले में पिता और पुत्री सहित अन्य तीन के विरुद्ध धारा 82 जारी करने के आदेश जारी किया है। एसीजेएम तृतीय MP-MLA आलोक वर्मा की कोर्ट ने यह आदेश जारी किया है।

हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में हाथ लगी थी निराशा
इसके पहले स्वामी प्रसाद मौर्य और उनकी बेटी इस मामले में एमपी-एमएलए कोर्ट के खिलाफ हाईकोर्ट भी गये थे, लेकिन हाईकोर्ट ने उन्हें एमपी-एमएलए कोर्ट में जाने का निर्देश दिया था। इसके बाद मौर्य परिवार एमपी-एमएलए कोर्ट में जाने की जगह सुप्रीम कोर्ट चले गए और सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को गंभीरता से नहीं लिया था।

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