टैक्स रिफंड की रफ्तार धीमी, प्रत्यक्ष कर संग्रह में 8% की बढ़ोतरी

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October 8, 2026

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-आने वाले वर्षों के लिए सरकार का लक्ष्य

नई दिल्ली/उमा सक्सेना/-    सरकार के प्रत्यक्ष कर संग्रह के आंकड़ों में चालू वित्त वर्ष के दौरान मजबूती देखने को मिली है। 1 अप्रैल से 17 दिसंबर के बीच प्रत्यक्ष कर की शुद्ध वसूली में 8 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है और यह आंकड़ा बढ़कर 17.04 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया है। आयकर विभाग द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, इस बढ़ोतरी की एक बड़ी वजह टैक्स रिफंड जारी करने की प्रक्रिया में आई सुस्ती मानी जा रही है।

कॉर्पोरेट और गैर-कॉर्पोरेट टैक्स से मजबूत योगदान
आंकड़ों के मुताबिक, इस अवधि में कॉर्पोरेट कर से शुद्ध रूप से 8.17 लाख करोड़ रुपये से अधिक की वसूली हुई, जबकि गैर-कॉर्पोरेट कर से लगभग 8.47 लाख करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ। इसके अलावा प्रतिभूति लेनदेन कर (एसटीटी) से 17 दिसंबर तक 40,195 करोड़ रुपये की शुद्ध आय दर्ज की गई है।

रिफंड जारी करने में 14% की गिरावट
पिछले वर्ष की तुलना में इस साल टैक्स रिफंड जारी करने की गति में कमी आई है। आंकड़ों के अनुसार, रिफंड की राशि में करीब 14 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई और कुल रिफंड 2.97 लाख करोड़ रुपये से अधिक रहा। विशेषज्ञों का मानना है कि रिफंड की धीमी प्रक्रिया ने शुद्ध कर संग्रह के आंकड़ों को ऊपर रखने में मदद की है।

सकल प्रत्यक्ष कर संग्रह भी बढ़ा
रिफंड को समायोजित करने से पहले सकल प्रत्यक्ष कर संग्रह में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। आयकर विभाग के अनुसार, इस अवधि में सकल प्रत्यक्ष कर संग्रह 4.16 प्रतिशत बढ़कर 20.01 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया है, जो सरकार के लिए एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।

सरकार ने चालू वित्त वर्ष 2025-26 के लिए प्रत्यक्ष कर संग्रह का लक्ष्य 25.20 लाख करोड़ रुपये रखा है, जो पिछले वर्ष के मुकाबले 12.7 प्रतिशत अधिक है। वहीं वित्त वर्ष 2026 के लिए सरकार का लक्ष्य प्रतिभूति लेनदेन कर से 78,000 करोड़ रुपये जुटाने का है।
कुल मिलाकर, प्रत्यक्ष कर संग्रह के आंकड़े यह संकेत दे रहे हैं कि आर्थिक गतिविधियों में स्थिरता बनी हुई है, हालांकि टैक्स रिफंड की रफ्तार को लेकर आगे सरकार पर नजरें टिकी रहेंगी।

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