“अखण्ड सौभाग्य का पर्व : हरतालिका तीज”

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September 17, 2026

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“अखण्ड सौभाग्य का पर्व : हरतालिका तीज”

शिव-शक्ति को गृहस्थ जीवन का आदर्श माना गया है। शक्ति स्वरूपा माता पार्वती ने सदैव शिव के गुणों का वरण किया है। शिव जी ही माता पार्वती के पति होंगे उक्त बात नारद जी द्वारा माता पार्वती को बताई गई थी। शिवजी को वर रूप में प्राप्त करने के लिए जगत जननी माँ पार्वती ने अत्यधिक कठिन तपस्या की। सप्त ऋषि भी उनकी परीक्षा लेने आए एवं माता पार्वती को शिव शंकर की वेशभूषा तथा दैनिक दिनचर्या का वर्णन किया और उन्हें अपना निर्णय बदलने के लिए उकसाया, परन्तु माता पार्वती तो शृद्धा एवं विश्वास की प्रतिमूर्ति है। वे शिवजी के कल्याण स्वरुप को पहचानती थी। सत्यम शिवम् सुंदरम ही शिव का सत्य स्वरुप है। पार्वतीजी बाहरी आडम्बर के विरुद्ध भीतर की सच्चाई से परिचित थी।

शिव को करुणावतार कहा जाता है। शिव तो सच्चे ह्रदय के स्वामी है, तभी तो संसार की रक्षा के लिए विष को भी सहर्ष स्वीकार कर लेते है। भगवती तो अनंत शक्ति की प्रतिक है और माँ की कृपा तो जीवन को पूर्णता प्रदान करती है। वास्तव में इस मनुष्ययोनि में महेश और भवानी तो हमारे माता-पिता का ही स्वरूप है जो सदैव भक्तो को आशीष प्रदान करते है। उनका गृहस्थ जीवन माया से नहीं बल्कि जीवन में आनंद से सुशोभित है। शिव सदैव आनंद की अवस्था में विद्यमान रहते है। शिव परिवार तो सर्वत्र पूजा जाता है। यहाँ तक कि भोलेनाथ के पौत्र शुभ-लाभ भी पूजन के अधिकारी है। उन्हीं शिव-पार्वती का वरदान यदि गृहस्थ को मिल जाए तो जीवन में और कुछ पाना शेष नहीं रह जाता।

शिव-शक्ति की आराधना का है हरतालिका तीज का त्यौहार।
महेश-भवानी की जगत में महिमा है अपरम्पार।।
शिव-शक्ति का अर्द्धनारीश्वर रूप करता समता को प्रदर्शित।
उनकी कृपा से जीवन में आनंद होता दर्शित।।


इस व्रत में निर्जल रहकर शिव-पार्वती की आराधना एवं पूजा की जाती है। विधि-विधान से पूजन किया जाता है। सुहागिन के साथ-साथ कन्याएँ भी इस व्रत को करती है और सुन्दर श्रृंगार से सुशोभित होती है। यह तीज-त्यौहार हमें ईश्वर से जुड़ने के लिए प्रेरित करते है। हरतालिका तीज का व्रत एक बार प्रारम्भ करने के पश्चात् जीवनपर्यन्त खंडित नहीं किया जा सकता है। हरतालिका तीज के विधान में वर्णित है कि माता पार्वती ने शिवजी का पार्थिव शिवलिंग बनाकर उसका पूजन-अर्चन किया तथा कठोर तपस्या की। उनकी इस तपस्या को महादेव ने स्वीकार किया और जन्म-जन्मान्तर तक शक्ति का ही अर्धांगिनी के रूप में वरण किया। शिव का अर्द्धनारीश्वर स्वरुप अत्यंत पूजनीय है, जिसमें शिव-शक्ति की समानता का दर्शन होता है। इस दिन शिव-पार्वती के नामों का उच्चारण एवं भजन-कीर्तन करना चाहिए। सोलह श्रृंगार का विधान इस पर्व में है। ईश्वर की भक्ति तो प्रत्येक परिस्थिति में कल्याण और कृपा का पात्र भक्त को बनाती है, बस ह्रदय में पवित्रता और शृद्धा-भक्ति होनी चाहिए। भक्ति में निर्मल भावों की प्रधानता होती है। भोलेनाथ और भवानी तो भक्तवत्सल है, जो गृहस्थ जीवन को सुखी एवं आनंदमय बनाने का आशीर्वाद प्रदान करते है।  

पवित्र ह्रदय से करें शिव-पार्वती का ध्यान।
उनकी आराधना है जीवन के लिए वरदान।।
शक्ति ने सदैव किया शिव के गुणों का वरण।
डॉ. रीना कहती, हरतालिका तीज से होगा संताप का हरण।।

डॉ. रीना रवि मालपानी (कवयित्री एवं लेखिका)

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