11 मई मदर्स डे पर विशेष- मां के मातृत्वभाव से ही संतान का कल्याण 

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August 24, 2026

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11 मई मदर्स डे पर विशेष- मां के मातृत्वभाव से ही संतान का कल्याण 

‘गुरुणां चैव सर्वेषां माता परमं को गुरु” ।। 

भारतीय दर्शन की यह मान्यता है कि समस्त सृष्टि की रचना ब्रम्हा ने की हैं, जिसमें उसने मनुष्य को सबसे श्रेष्ठ प्राणी बनाया और भौतिक जगत में उसे जन्म देने, उसका लालन पालन करने का अधिकार नारी को उसकी जन्मदात्री बनाकर दिया। माता की बहुत बड़ी एक विशेषता यह भी है कि वह अपने जीवन को मातृत्वमय बनाकर अपने बच्चे के जीवन में  मिला देती है, जैसे उसका कोई अलग व्यक्तित्व ही नहीं। अपने समस्त सुख और एश्वर्य को संतान के लिए निछावर कर देना ही मातृत्व भावना का अहम् परिचायक हैं।

पुरुष संसार को नश्वर, दुःखदायी आदि विशेषण देकर अपने दायित्व से विमुख हो जाता है, पर एक मां नहीं ! मातृत्व और मां का महत्व इस समझाया जा सकता है की बुद्ध अपनी लहलहाती गृहस्थी, नवयौवना पत्नी तथा नवजात शिशु को अपने मार्ग का कंटक बताकर उन्हें अकेला छोड़कर चल दिये, किंतु माँ यशोधरा ऐसा नहीं कर सकी। उनके अंदर की मां संतान का त्याग नहीं सह सकती थी। प्रश्न यह उठता है कि क्या उसे भी अपना लोक और परलोक सुधारने का मोह नहीं रह होगा? किंतु नहीं वह एक मां थी। इस गौरव को नारी किसी भी रुप में नहीं त्याग सकती। पिता अपनी संतान से विमुख हो सकता है पर मां नहीं। यदि पुरुष की इस उच्छृंखल प्रवृत्ति का कुप्रभाव कहीं नारी (मां) पर आ जाये तो क्या सृष्टि का उद्यान इसी प्रकार लहलहाता रह सकता है? पति को भी पत्नी जब कष्ट में पाती है तब उसके अंदर की मां करवट लेने लगती है। सब विरोध भूलकर वह नयनों में मातृत्व स्नेह का सागर उमड़ाकर उसके कल्याण हेतु तत्पर हो जाती हैं। अपनी संतान के कल्याण के लिये माता दधिचि के जैसे त्याग के लिये भी हर हमेशा तत्पर रहती है। गर्भ से लेकर बालक के पैरों पर खड़ा होने तक मां किनकिन कष्टों को सहकर उसका लालन पालन करती है। इसे बताने की आवश्यकता नहीं हैं संतान के लिये वह दिनरात एक कर देती है इतना ही नहीं, अपनी योग्यतानुसार वह उसका चरित्र निर्माण भी करती है। यदि मां समझदार, सुचरित्र तथा राष्ट्र कल्याण की भावना से परिचित हुई तो निश्चित रुप से वह महाराणा प्रताप, वीर शिवाजी और नेपोलियन जैसे वीर, देशप्रेमी तथा महान पुरुष अपने देश को भेंट करेगी। नेपोलियन बोनापार्ट का कथन था। 

“तुम मुझे योग्य माताएं दो।  मैं तुम्हें सुदृढ़ राष्ट्र दूंगा “।।

 नेपोलियन की यह उद्घोषणा निश्चित रूप से उनके जीवन में मां के प्रभाव को भी दिखाती है । मां के दिए गए संस्कार ऊंचे आदर्शों का ही परिणाम था कि इन्हीं संस्कारों में सींचे रचे गए नेपोलियन ने विश्व विजेता बनने का गौरव हासिल किया। परोक्ष रुप से एक मां ही राष्ट्र का निर्माण करती है। जहां की माताएं‌ योग्य व विद्वान होंगी, वहां का राष्ट्र दासता से कभी भी ग्रसित नहीं हो सकता।

– सुरेश सिंह बैस “शाश्वत”

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