अ.भा.क्षत्रिय महासभा महाराणा प्रताप के सहयोग से आरजेएस पीबीएच का 356वां वेबिनार आयोजित. 

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अ.भा.क्षत्रिय महासभा महाराणा प्रताप के सहयोग से आरजेएस पीबीएच का 356वां वेबिनार आयोजित. 

-आरजेसियंस महाराणा प्रताप से प्रेरणा लें और अपने बच्चों को ईमानदारी की रोटी खिलाएं -प्रो.राजपूत

नई दिल्ली/उदय कुमार मन्ना/-  9 मई को मेवाड़ के महाराणा प्रताप की 485वीं जयंती आरजेएस पॉजिटिव मीडिया (आरजेएस पीबीएच) द्वारा अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा महाराणा प्रताप के सहयोग से  कार्यक्रम आयोजित किया गया।कार्यवाही का शुभारंभ आरजेएस पॉजिटिव मीडिया के संस्थापक उदय कुमार मन्ना ने भविष्य की पहलों की रूपरेखा भी प्रस्तुत की, जिसमें अगस्त में तैयार की जा रही पुस्तक का लोकार्पण होगा जो ‘संस्कारों’ की पुस्तक होगी,”अंतर्राष्ट्रीय परिवार सम्मान समारोह आयोजित किया जाएगा।इस महीने होने वाली व्यक्तित्व विकास तथा आरजेएस के मिशन पर केंद्रित ओरियंटेशन कार्यशाला की घोषणा की जिसमें सभी प्रतिभागियों को सहभागिता प्रमाण पत्र प्रदान किया जाएगा।।

अ.भा.क्षत्रिय महासभा महाराणा प्रताप की महाराष्ट्र प्रदेश अध्यक्षा कवयित्री डॉ. कविता परिहार ने स्वागत व संचालन करते हुए कहा कि 9 मई, 1540 को कुम्भलगढ़ में जन्मे महाराणा प्रताप की देशभक्ति, बलिदान और आत्म-सम्मान भारतीयों को सदैव प्रेरित करते रहेंगे; वे हमारे लिए अमर हैं।”

पद्मश्री से सम्मानित और एनसीईआरटी के पूर्व निदेशक प्रोफेसर जे.एस. राजपूत का मुख्य भाषण महत्वपूर्ण अंतर्दृष्टि प्रदान करने वाला था। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि “वीरता और साहस ‘संस्कारों’ (मूल्यों/संस्कृति) से आते हैं, जो परिवार में स्थापित होते हैं।” प्रोफेसर राजपूत ने एनसीईआरटी (1999-2004) में महाराणा प्रताप और गुरु तेग बहादुर जैसे व्यक्तित्वों के बारे में विकृत ऐतिहासिक वृत्तांतों को सही करने के अपने अनुभवों को साझा किया, एक ऐसी प्रक्रिया जिसमें सर्वोच्च न्यायालय का हस्तक्षेप भी शामिल था। उन्होंने जोर देकर कहा, “महाराणा प्रताप ने व्यक्तिगत लाभ के लिए नहीं, बल्कि प्रत्येक व्यक्ति के आत्म-सम्मान को बढ़ाने के लिए संघर्ष किया।” उन्होंने प्रताप की सेना की समावेशी प्रकृति का भी उल्लेख किया, जिसमें “सभी धर्मों और वर्गों के लोग” शामिल थे। प्रोफेसर राजपूत के भाषण का एक महत्वपूर्ण हिस्सा महाराणा प्रताप के “घास की रोटी” प्रसंग की चर्चा करते हुए आरजेसियंस को शपथ दिलाई”मैं अपने बच्चों को केवल ईमानदारी से अर्जित रोटी ही खिलाऊंगा।” 

अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा की राष्ट्रीय वरिष्ठ उपाध्यक्ष अर्चना सिंह ने अध्यक्षीय भाषण दिया। उन्होंने 18 जून, 1576 को हुए हल्दीघाटी के युद्ध पर ध्यान केंद्रित किया और कहा कि “हमारा संगठन, और हम सरकार से आग्रह करते हैं, कि 9 मई, महाराणा प्रताप की जयंती को ‘स्वाभिमान शौर्य दिवस’ के रूप में घोषित किया जाए और राष्ट्रीय अवकाश घोषित किया जाए।”

कार्यक्रम की वक्ता इतिहास की शिक्षिका एडवोकेट डॉ. मुन्नी कुमारी ने सिद्धांतों से समझौता करने के युग में महाराणा प्रताप की समकालीन प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला। आरजेएस पीबीएच के अतिथि संपादक राजेंद्र सिंह कुशवाहा ने घोषणा की कि आगामी आरजेएस का मासिक समाचार पत्र  “कविता विशेषांक” के रूप में प्रकाशित किया जाएगा, जो 30मई, 2025 को हिंदी पत्रकारिता दिवस के अवसर पर दिल्ली में भौतिक रूप से लॉन्च करने की योजना है।

समारोह “वीर रस” का जश्न मनाने वाली कई काव्य प्रस्तुतियों से समृद्ध हुआ। नागपुर की हिंदी महिला समिति की अध्यक्षा रति चौबे ने एक शक्तिशाली कविता प्रस्तुत की, जिसमें महाराणा प्रताप को “अमर, कालातीत, शाश्वत, एक तारे की तरह वह क्षितिज तक चमकेंगे” के रूप में वर्णित किया गया। पत्रकार पूर्णिमा मिश्रा ने श्याम नारायण पांडे के महाकाव्य “हल्दी घाटी” से पाठ किया, जबकि सरिता कपूर ने निस्वार्थ वीरता पर एक स्व-रचित कविता प्रस्तुत की, जिसमें युवाओं में “नई चेतना” जगाने के लिए ऐसी गाथाओं को सुनाने की आवश्यकता पर जोर दिया गया। सुनीता शर्मा, वर्षा परिहार, मीनाक्षी ठाकुर और रश्मि जैसी अन्य कवयित्रियों ने भी प्रेरणादायक छंद साझा किए। इसके अलावा अन्य प्रतिभागियों ने भी अपने विचार और कविताएं प्रस्तुत की इनमें अरविंद सिंह राजपूत ,विष्णु शर्मा ,मीनाक्षी ठाकुर ,पूनम मिश्रा, कमल शर्मा, विश्वजीत  सिंह ,वर्षा परिहार ,सरिता कपूर (दिल्ली से),रितिका गुप्ता  (कानपुर  से),शिल्पा  ठाकुर ( पुलगाव  से) आदि शामिल हुए।

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