”मनोज कुमार की प्रेरणा ने बदली जिंदगी, लेखक कृष्ण गोपाल विद्यार्थी ने साझा किए भावुक संस्मरण”

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October 16, 2026

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”मनोज कुमार की प्रेरणा ने बदली जिंदगी, लेखक कृष्ण गोपाल विद्यार्थी ने साझा किए भावुक संस्मरण”

-भारत कुमार की जयंती पर पहली मुलाकात से लेकर जीवनभर मिले मार्गदर्शन को याद करते हुए लेखक ने सुनाए यादगार पल। V

नई दिल्ली/सिमरन मोरया/-  हिंदी सिनेमा के महान अभिनेता, निर्माता और निर्देशक मनोज कुमार की जयंती पर साहित्यकार कृष्ण गोपाल विद्यार्थी ने उनके साथ जुड़ी अपनी यादों को साझा करते हुए बताया कि कैसे “भारत कुमार” की देशभक्ति से ओत-प्रोत फिल्मों ने उनके जीवन की दिशा ही बदल दी। उन्होंने कहा कि मनोज कुमार केवल एक अभिनेता नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और राष्ट्रभक्ति के प्रतीक थे, जिनकी प्रेरणा ने उन्हें साहित्य और कविता की राह पर आगे बढ़ने का संबल दिया।

कृष्ण गोपाल विद्यार्थी ने बताया कि किशोरावस्था में देखी गई फिल्म ‘शहीद’ और उसमें मनोज कुमार द्वारा निभाई गई भूमिका ने उनके मन पर गहरी छाप छोड़ी। शहीद-ए-आजम भगत सिंह और मनोज कुमार दोनों उनके लिए प्रेरणा के स्रोत बन गए। स्कूल की बाल सभाओं में देशभक्ति गीत गाते-गाते उनका झुकाव कविता और साहित्य की ओर बढ़ता गया।

उन्होंने बताया कि आर्थिक तंगी के कारण मुंबई जाकर अपने प्रिय अभिनेता से मिलने का सपना वर्षों तक अधूरा रहा। बाद में जीवन बीमा निगम में कार्यरत अपने बड़े मौसा के मुंबई तबादले के बाद उन्हें वहां जाने का अवसर मिला। हालांकि इस यात्रा की शुरुआत एक रोचक घटना से हुई, जब उन्होंने सहकर्मियों के बीच अनजाने में यह कह दिया कि उन्हें स्वयं मनोज कुमार ने मुंबई बुलाया है। यह बात पूरे संस्थान में फैल गई और उन्हें शुभकामनाओं के साथ सम्मान भी मिला।

मुंबई पहुंचने पर उन्हें पता चला कि मनोज कुमार फिल्म ‘क्रांति’ की शूटिंग के सिलसिले में शहर से बाहर हैं। कई दिनों के इंतजार के बाद उनके छोटे भाई राजीव गोस्वामी के माध्यम से मनोज कुमार से संपर्क हुआ और आखिरकार 1 जून 1978 को उनके बंगले पर पहली मुलाकात का सपना साकार हुआ।

विद्यार्थी ने बताया कि मुलाकात के दौरान मनोज कुमार ने उनकी कविताएं सुनीं, उनके जीवन और साहित्यिक सफर पर विस्तार से बातचीत की तथा उनका आत्मविश्वास बढ़ाया। इसी दौरान प्रसिद्ध गीतकार संतोष आनंद से भी उनका परिचय कराया गया। यह मुलाकात उनके जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक बन गई।

उन्होंने कहा कि पहली मुलाकात के बाद मनोज कुमार के साथ उनका संबंध लगातार बना रहा और समय-समय पर उनसे मिलने का अवसर मिलता रहा। उनके व्यक्तित्व, सादगी और राष्ट्रप्रेम ने उन्हें हमेशा प्रेरित किया।

मनोज कुमार की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कृष्ण गोपाल विद्यार्थी ने कहा कि उनकी प्रेरणा आज भी उनके लेखन, जीवन शैली और राष्ट्र के प्रति समर्पण में जीवित है। उन्होंने विश्वास जताया कि मनोज कुमार के साथ बिताए गए अन्य यादगार पलों को भी वे भविष्य में पुस्तक के माध्यम से पाठकों के सामने प्रस्तुत करेंगे।

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