गुभाना में मनाई गई अमर शहीद चंद्रशेखर आजाद की जयंती!

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November 6, 2026

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-ग्रामीणों ने अर्पित की श्रद्धांजलि -लोकहित पुस्तकालय में आयोजित कार्यक्रम में आजाद के अदम्य साहस, राष्ट्रभक्ति और बलिदान को किया गया याद

गुभाना/झज्जर/सिमरन मोरया/-  बादली क्षेत्र के गुभाना गांव स्थित लोकहित पुस्तकालय में महान क्रांतिकारी अमर शहीद चंद्रशेखर आजाद की जयंती श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाई गई। कार्यक्रम में ग्रामीणों एवं समिति सदस्यों ने उनके चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी तथा देश की आजादी के लिए दिए गए उनके सर्वोच्च बलिदान को याद किया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए लोकहित पुस्तकालय समिति के अध्यक्ष नरेश कौशिक ने चंद्रशेखर आजाद के जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उनका जन्म 23 जुलाई 1906 को मध्य प्रदेश के भाबरा (वर्तमान चंद्रशेखर आजाद नगर) में हुआ था। उन्होंने ब्रिटिश शासन के खिलाफ सशस्त्र क्रांति का मार्ग अपनाया और अपने साहस एवं नेतृत्व से स्वतंत्रता आंदोलन को नई दिशा दी।

उन्होंने बताया कि 9 अगस्त 1925 को राम प्रसाद बिस्मिल के नेतृत्व में हुए काकोरी कांड में आजाद की महत्वपूर्ण भूमिका रही। वर्ष 1927 में बिस्मिल सहित अन्य क्रांतिकारियों के बलिदान के बाद उन्होंने उत्तर भारत के विभिन्न क्रांतिकारी संगठनों को एकजुट कर हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन (HSRA) को मजबूत किया।

नरेश कौशिक ने कहा कि चंद्रशेखर आजाद ने भगत सिंह और अन्य साथियों के साथ मिलकर लाला लाजपत राय की मृत्यु का बदला लेते हुए अंग्रेज अधिकारी सांडर्स की हत्या की और दिल्ली विधानसभा बम कांड जैसी ऐतिहासिक घटनाओं में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

उन्होंने बताया कि 27 फरवरी 1931 को प्रयागराज के अल्फ्रेड पार्क (वर्तमान चंद्रशेखर आजाद पार्क) में अंग्रेज पुलिस से वीरतापूर्वक मुकाबला करते हुए आजाद ने स्वयं को गोली मारकर अपने प्रण को निभाया और मातृभूमि के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया।

कार्यक्रम के अंत में उपस्थित सभी लोगों ने उनके आदर्शों पर चलने और देशभक्ति की भावना को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया।

इस अवसर पर सूबेदार मेजर सुरेश कुमार, जय भगवान, प्रधान पहलवान रामकुमार, हरिओम कौशिक, दीपक कौशिक, फूल कुमार सहित अनेक गणमान्य नागरिक एवं पुस्तकालय समिति के सदस्य उपस्थित रहे।

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