नजफगढ़ मैट्रो न्यूज/नई दिल्ली/भावना शर्मा/– दिल्ली के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी (आप) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर कहा है कि उन्हें भारत का प्रतिनिधित्व करने के लिए सिंगापुर जाने की अनुमति नहीं देना गलत है। केजरीवाल को वर्ल्ड सिटीज समिट में आमंत्रित किया गया है, जहां उनकी योजना शासन के ’दिल्ली मॉडल’ पर चर्चा करने की है।
दिल्ली सरकार के प्रवक्ता के मुताबिक, सीएम अरविंद केजरीवाल ने पीएम नरेंद्र मोदी को 2-3 अगस्त को वर्ल्ड सिटीज समिट में भाग लेने के लिए सिंगापुर की उनकी योजनाबद्ध यात्रा के लिए मंजूरी मिलने में देरी का विरोध करने के लिए पत्र लिखा है और कहा है कि मुख्यमंत्री की इस तरह की महत्वपूर्ण यात्रा को रोकना देश के हितों के खिलाफ है।
पत्र में केजरीवाल ने कहा कि दुनिया दिल्ली मॉडल के बारे में जानना चाहती है, जो राष्ट्रीय गौरव का विषय है और वह शिखर सम्मेलन के दौरान दुनिया के नेताओं को इससे (दिल्ली मॉडल) अवगत कराएंगे। केजरीवाल ने यात्रा के लिए तत्काल मंजूरी मांगी है।
दिल्ली सरकार के एक अधिकारी के मुताबिक, सीएम ने देरी को गलत बताया है। सिंगापुर सरकार ने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को वैश्विक शिखर सम्मेलन में दिल्ली मॉडल पेश करने के लिए आमंत्रित किया है। इसे दुनिया के नेताओं के सामने पेश किया जाएगा।
पिछले महीने यात्रा की अनुमति में देरी को लेकर विवाद छिड़ गया था। वर्ल्ड सिटीज समिट (ॅब्ै) सरकारी नेताओं और उद्योग विशेषज्ञों के लिए रहने योग्य और टिकाऊ शहर की चुनौतियों का समाधान करने, एकीकृत शहरी समाधान साझा करने और नई साझेदारी बनाने के लिए एक विशेष मंच है। ’आप’ सरकार के एक अधिकारी के मुताबिक, सीएम कार्यालय ने 7 जून को उपराज्यपाल कार्यालय में आधिकारिक विदेश दौरे के लिए मंजूरी मांगी थी, लेकिन अभी तक मंजूरी नहीं मिली है।
केजरीवाल ने 1 जून को सिंगापुर के उच्चायुक्त साइमन वोंग को दिल्ली सचिवालय में अपने कार्यालय में दिल्ली के सीएम से मिलने और निमंत्रण देने के बाद ट्वीट किया। 1 जून को केजरीवाल ने एक ट्वीट में कहा था कि उन्हें डब्ल्यूसीएस में आमंत्रित किया गया है। “मैं वैश्विक शहरों के शिखर सम्मेलन में मुझे आमंत्रित करने के लिए सिंगापुर सरकार को धन्यवाद देता हूं। मैं शिखर सम्मेलन में भाग लेने और वैश्विक नेताओं के साथ शहरी समाधानों पर चर्चा करने के लिए उत्सुक हूं। सिंगापुर और दिल्ली निश्चित रूप से जनहित में त्वरित विकास हासिल करने की दिशा में एक साथ काम कर सकते हैं।”
एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि केंद्र सरकार के नियमों के मुताबिक, सभी मंत्रियों और नौकरशाहों को विदेश यात्रा के लिए विदेश मंत्रालय से मंजूरी की जरूरत होती है। अधिकारी ने कहा, “लोक सेवकों को प्रशासनिक अप्रूवल की आवश्यकता होती है, और दिल्ली के मुख्यमंत्री के मामले में एलजी से प्रशासनिक अनुमोदन की आवश्यकता होती है। प्रशासनिक अप्रूवल के बाद विदेश मंत्रालय से राजनीतिक मंजूरी की आवश्यकता होती है। दो मंजूरी के बिना विदेश यात्राएं नहीं की जा सकतीं।” हालांकि, अभी तक यात्रा की मंजूरी के लिए कथित देरी पर उपराज्यपाल कार्यालय से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिल सकी है।


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