वरिष्ठ नागरिकों के स्वास्थ्य पर आरजेएस का राष्ट्रीय वेबिनार

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-सकारात्मक सोच से स्वस्थ रहे बुजुर्ग: विशेषज्ञ

नई दिल्ली/सिमरन मोरया/-  चिकित्सा दिवस की पूर्व संध्या पर राम जानकी संस्थान पॉजिटिव ब्रॉडकास्टिंग हाउस (आरजेएस पीबीएच) द्वारा वरिष्ठ नागरिकों के स्वास्थ्य विषय पर 591वें राष्ट्रीय वेबिनार का आयोजन किया गया। संस्थापक उदय कुमार मन्ना के संचालन में आयोजित इस वेबिनार में देश के वरिष्ठ चिकित्सकों और विशेषज्ञों ने वृद्धावस्था में बेहतर स्वास्थ्य, सकारात्मक मानसिकता तथा गरिमापूर्ण जीवन के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से विचार साझा किए। इस अवसर पर आरजेएस के जून माह के मासिक पत्रिका का भी लोकार्पण किया गया। साथ ही घोषणा की गई कि स्वतंत्रता के 80वें आजादी पर्व के अवसर पर संस्थान की सातवीं पुस्तक का लोकार्पण किया जाएगा।

कार्यक्रम की शुरुआत-
कार्यक्रम का स्वागत भाषण देते हुए RJS पॉजिटिव ब्रांच के राष्ट्रीय पर्यवेक्षक दीप माथुर ने कहा कि स्वस्थ और सम्मानजनक वृद्धावस्था केवल व्यक्ति की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि पूरे समाज का सामूहिक दायित्व है। उन्होंने कहा कि परिवारों को अपने बुजुर्गों को केवल भोजन और आश्रय ही नहीं, बल्कि सम्मान, अपनापन और पारिवारिक निर्णयों में उचित स्थान भी देना चाहिए। उन्होंने बताया कि आरजेएस का मंथली न्यूज लेटर और छमाही पुस्तक सकारात्मक सामाजिक आंदोलन का महत्वपूर्ण ऐतिहासिक दस्तावेज बन चुके हैं।

मुख्य वक्ता एवं एकीकृत चिकित्सा के वरिष्ठ सलाहकार तथा दिल्ली मेडिकल एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष डॉ. जी. एस. ग्रेवाल ने ‘फंक्शनल एज’ अर्थात कार्यात्मक आयु की अवधारणा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि किसी व्यक्ति की वास्तविक उम्र उसकी जन्मतिथि नहीं, बल्कि उसकी दैनिक कार्य करने की क्षमता और सामाजिक सक्रियता से तय होती है। उन्होंने कहा कि समाज में वृद्धावस्था को लेकर कई नकारात्मक धारणाएं व्याप्त हैं, जो बुजुर्गों के आत्मविश्वास और मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करती हैं। इसलिए बुजुर्गों को स्वयं को सक्रिय, आत्मनिर्भर और सकारात्मक बनाए रखना चाहिए तथा अनावश्यक दवाओं और अति-चिकित्सा से बचना चाहिए।

दिल्ली मेडिकल काउंसिल के पूर्व अध्यक्ष एवं सामाजिक-चिकित्सा कार्यकर्ता डॉ. नरेश चावला ने जबरन सेवानिवृत्ति की व्यवस्था पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि अनुभवी लोगों की क्षमता का उपयोग समाज और राष्ट्रहित में किया जाना चाहिए। उन्होंने जापान का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां 80 वर्ष से अधिक आयु के लोगों को भी कार्यक्षेत्र में सक्रिय रहने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है, जिससे उनका स्वास्थ्य और आत्मविश्वास दोनों बेहतर बने रहते हैं।

मानव व्यवहार एवं संबद्ध विज्ञान संस्थान (इहबास) के पूर्व निदेशक एवं वरिष्ठ मनोचिकित्सक डॉ. निमेश जी. देसाई ने वृद्धावस्था में मानसिक स्वास्थ्य के महत्व पर बल देते हुए कहा कि थोपे गए अकेलेपन और स्वेच्छा से चुने गए एकांत में बड़ा अंतर है। उन्होंने बताया कि वृद्धावस्था में होने वाला अवसाद एक गंभीर चिकित्सीय स्थिति है, जिसका समय पर उपचार आवश्यक है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि आधुनिक मनोरोग संबंधी दवाएं सुरक्षित, प्रभावी और व्यसनमुक्त होती हैं तथा इनके संबंध में फैली भ्रांतियों से बचना चाहिए।

वेबिनार में वरिष्ठ नागरिक उदय शंकर सिंह, आर. एस. कुशवाहा और सुदीप साहू ने अपने अनुभव साझा करते हुए नियमित योग, सुबह की सैर, निरंतर शारीरिक सक्रियता और संतुलित आहार को स्वस्थ एवं सुखद वृद्धावस्था का आधार बताया।

कार्यक्रम में पटना से जुड़े आरजेएस युवा विंग के मानद प्रभारी 84 वर्षीय ओम प्रकाश झुनझुनवाला ने कहा कि वास्तविक युवा वही है जिसकी सोच सकारात्मक और उत्साहपूर्ण हो। उन्होंने कहा कि कालानुक्रमिक आयु केवल एक संख्या है, जबकि सकारात्मक चेतना और सक्रिय जीवनशैली ही शारीरिक क्षय के विरुद्ध सबसे मजबूत सुरक्षा कवच है।

वेबिनार का समापन इस संदेश के साथ हुआ कि यदि बुजुर्ग सकारात्मक सोच, नियमित व्यायाम, संतुलित आहार, सामाजिक सहभागिता और आवश्यकतानुसार वैज्ञानिक चिकित्सा को अपनाएं, तो वे लंबे समय तक स्वस्थ, आत्मनिर्भर और सम्मानजनक जीवन जी सकते हैं। विशेषज्ञों ने परिवारों और समाज से भी आह्वान किया कि वे वरिष्ठ नागरिकों को सम्मान, सहयोग और भावनात्मक संबल प्रदान करें, जिससे स्वस्थ और सुखद वृद्धावस्था का वातावरण निर्मित हो सके।

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