लाल किले से पीएम मोदी का संबोधन: आत्मनिर्भर भारत, आतंक पर सख्त संदेश और ऑपरेशन सिंदूर का जिक्र

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May 6, 2026

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लाल किले से पीएम मोदी का संबोधन: आत्मनिर्भर भारत, आतंक पर सख्त संदेश और ऑपरेशन सिंदूर का जिक्र

नई दिल्ली अनीशा चौहान/- भारत ने आज 79वां स्वतंत्रता दिवस हर्षोल्लास के साथ मनाया। 15 अगस्त 1947 को अंग्रेजी हुकूमत से मिली आज़ादी की याद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले की प्राचीर से 12वीं बार तिरंगा फहराया और राष्ट्र को संबोधित किया। अपने संबोधन में पीएम मोदी ने आत्मनिर्भर भारत, ऊर्जा और रक्षा क्षेत्र में प्रगति, आतंकवाद के खिलाफ कड़ा रुख, तथा ऑपरेशन सिंदूर में सेना के पराक्रम पर विशेष जोर दिया।

आत्मनिर्भर भारत की दिशा में बड़ा कदम
पीएम मोदी ने कहा कि 50 साल पहले दबाई गई सेमीकंडक्टर की फाइल को अब नया जीवन मिला है। चार नए सेमीकंडक्टर प्लांट्स को मंजूरी दी गई है और इस साल के अंत तक ‘मेड इन इंडिया’ चिप्स बाजार में उपलब्ध होंगी। ऊर्जा के क्षेत्र में भारत ने सौर ऊर्जा उत्पादन को 11 वर्षों में 30 गुना बढ़ाया है, जिससे ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में मजबूत कदम बढ़े हैं।

रक्षा क्षेत्र में स्वदेशी ताकत का प्रदर्शन
प्रधानमंत्री ने ऑपरेशन सिंदूर का जिक्र करते हुए कहा कि मेड इन इंडिया हथियारों ने दुश्मन को हैरान कर दिया। “दुश्मन को भी पता नहीं चला कि कौन-कौन से हथियार थे,” उन्होंने कहा। पीएम मोदी ने बताया कि रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता के मिशन ने सेना को बिना रुकावट और बिना हिचकिचाहट अपने पराक्रम का प्रदर्शन करने की शक्ति दी।

एकता और संकल्प का पर्व
प्रधानमंत्री ने कहा कि आज देश के 140 करोड़ नागरिक तिरंगे के रंग में रंगे हैं। उन्होंने इस दिन को संकल्प और सामूहिक सिद्धियों का पर्व बताया। धारा 370 हटाकर देश की एकता को मजबूत करने के फैसले को उन्होंने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी को सच्ची श्रद्धांजलि बताया।

आतंकवाद और न्यूक्लियर ब्लैकमेल पर सख्त रुख
पीएम मोदी ने पाकिस्तान में हुई तबाही का जिक्र करते हुए कहा कि आतंक को पनाह देने और उसे ताकत देने वालों में कोई फर्क नहीं है। भारत ने तय कर लिया है कि न्यूक्लियर धमकियों को अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट कहा कि न्यूक्लियर ब्लैकमेल लंबे समय से हो रहा है, लेकिन अब भारत इसे सहन नहीं करेगा।

अगर आप चाहें तो मैं इसका एक छोटा, दमदार और अखबार जैसी हेडलाइन भी बना सकता हूँ, जो पूरे भाषण के सार को पकड़ ले।

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