
नई दिल्ली/– दिल्ली उच्च न्यायालय ने सड़कों पर अवरोध और यातायात जाम की समस्या पैदा करने वाले मानव रहित बैरिकेड लगाने के लिए मंगलवार को दिल्ली पुलिस को आड़े हाथ लिया। अदालत ने पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी को उसके सामने पेश होने का निर्देश भी दिया। न्यायमूर्ति मुक्ता गुप्ता और न्यायमूर्ति अनीश दयाल की पीठ ने कहा, च्च्ये सब क्या है। सड़कें परिवहन के लिए होती हैं या फिर इस तरह से अवरुद्ध किए जाने के वास्ते।’’ उच्च न्यायालय एक ऐसे मामले की सुनवाई कर रहा था, जिसमें अदालत ने पहले प्रधानमंत्री को लिखे एक पत्र का स्वतः संज्ञान लिया था। इस पत्र को बाद में दक्षिणी दिल्ली की कई सड़कों पर मानवरहित बैरिकेड लगाने के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए दिल्ली उच्च न्यायालय के पास भेजा गया था।
शुरुआत में पीठ ने देखा कि शाम के व्यस्त समय में पुलिसकर्मी सड़कों पर बैरिकेड लगाते हैं और यातायात नियंत्रण पर ध्यान दिए बिना एक तरफ खड़े रहते हैं। पीठ ने कहा, ’एक मानवरहित बैरिकेड भी एक बड़े यातायात जाम का कारण बनता है। आप क्या सभी मार्गों को अवरुद्ध करके यातायात का प्रबंधन करते हैं। अगर किसी को चिकित्सकीय इमरजेंसी है तो उसे पहले आधा घंटा उस रास्ते को पार करने में लगाना होगा और संभव है कि बीमार व्यक्ति समय पर अस्पताल न पहुंच पाए।’’ पीठ ने कहा, ’जिसे भागना होता है, वह वैसे भी आपको चकमा देने में कामयाब हो जाता है। शाम छह बजे जब ट्रैफिक अपने चरम पर होता है तो आप ये बैरिकेड लगा देते हैं और सड़कों को अवरुद्ध कर देते हैं।’’
उच्च न्यायालय ने कहा कि दिल्ली पुलिस ने अपनी स्थिति रिपोर्ट में बताया है कि ‘मोबाइल बैरिकेड की खरीद, रखरखाव और परिचालन उपयोग’ से जुड़े एक स्थायी आदेश को 2021 में संशोधित किया गया है और यह निर्देश दिया गया है कि किसी भी परिस्थिति में बैरिकेड को मानवरहित नहीं छोड़ा जाना चाहिए। इस्तेमाल में न होने पर बैरिकेड को सड़क और फुटपाथ से हटा दिया जाना चाहिए, ताकि वे यातायात में किसी भी तरह की बाधा या मोटर चालकों और पैदल राहगीरों के लिए संभावित खतरे का कारण न बनें।’’

अदालत के मुताबिक, पुलिस ने पुलिस मुख्यालय के चार मार्च 2022 के एक पत्र को भी रिकॉर्ड में रखा है, जो 2021 के स्थायी आदेश में निहित निर्देशों का सावधानीपूर्वक अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए कर्मचारियों को संवेदनशील बनाने के वास्ते जारी किया गया था। पीठ ने कहा, ’विशेष पुलिस आयुक्त (कानून और व्यवस्था) सुनवाई की अगली तारीख पर अदालत में इस बारे में विस्तृत रिपोर्ट के साथ पेश होंगे कि 2021 के स्थायी आदेश का अनुपालन कैसे सुनिश्चित किया जाएगा।’’ अदालत ने मामले की अगली सुनवाई के लिए पांच सितंबर की तारीख निर्धारित की।





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