क्या समाजवादी पार्टी को फिर चोट देगी बीजेपी?

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क्या समाजवादी पार्टी को फिर चोट देगी बीजेपी?

-26 और 27 के फेर में फंसा यूपी में राज्यसभा चुनाव

नजफगढ़ मेट्रो न्यूज/ नई दिल्ली/राज्य ब्यूरो, : उत्तर प्रदेश में 10 राज्यसभा सीटों के चुनाव में 10वीं सीट को लेकर बीजेपी और सपा के बीच शह-मात का खेल शुरू हो गया है. बीजेपी जहां 2024 का ‘संजय सेठ मॉडल’ दोहराकर 8वीं सीट जीतने की फिराक में है, वहीं सपा अपने ‘सरप्राइज’ दांव से बीजेपी के समीकरण बिगाड़ने की तैयारी कर रही है.

विधायकों के मौजूदा आंकड़ों के हिसाब से बीजेपी सात सीटें आसानी से जीत लेगी. दो सीटों पर सपा की जीत तय मानी जा रही है. असली मुकाबला 10वीं सीट को लेकर है, जिस पर दोनों के बीच शह-मात का खेल चल रहा है. चुनाव को लेकर सपा की सोमवार को लखनऊ में बैठक हुई. सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने नेताओं के साथ मीटिंग के बाद मीडिया से बात की.

उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी राज्यसभा चुनाव में सरप्राइज देगी. इसके बाद माना जा रहा है कि सपा 2 की जगह 3 उम्मीदवार उतारेगी. वहीं, बीजेपी की कोर कमेटी की राज्यसभा चुनाव को लेकर बैठक हो चुकी है, जिसमें पार्टी ने 8 उम्मीदवार उतारने का फैसला किया है. बीजेपी सपा को चोट देने की तैयारी में है. ऐसे में सवाल यह उठता है कि क्या बीजेपी ने 2024 के राज्यसभा चुनाव वाला ‘संजय सेठ दांव’ एक बार फिर दोहराने का प्लान बनाया है?

क्या था 2024 का ‘संजय सेठ मॉडल’?

उत्तर प्रदेश में साल 2024 के राज्यसभा चुनाव में सपा के पास अपने दो उम्मीदवारों को आसानी से जिताने भर के वोट थे. जबकि तीसरे उम्मीदवार के लिए कुछ वोटों की कमी थी. बीजेपी ने अपने 7 तय उम्मीदवारों के अलावा अचानक उद्योगपति संजय सेठ को 8वें उम्मीदवार के रूप में मैदान में उतारकर पूरा गणित बिगाड़ दिया था.

उस समय सपा के मुख्य सचेतक मनोज कुमार पांडेय, राकेश प्रताप सिंह, अभय सिंह, पूजा पाल समेत 7 विधायकों ने बगावत करते हुए क्रॉस वोटिंग की थी. इससे बीजेपी के 8वें प्रत्याशी संजय सेठ की जीत हुई थी. सपा के तीसरे कैंडिडेट रहे आलोक रंजन चुनाव हार गए थे, जो अखिलेश के लिए बड़ा झटका था.

सपा और बीजेपी में फिर दो साल पुरानी फाइट

यूपी विधानसभा के कुल 403 सदस्यों में से वर्तमान में 397 विधायक हैं. ऐसे में राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए 38 प्रथम वरीयता वोटों की जरूरत है. एनडीए के पास कुल 292 विधायक हैं, जबकि सपा गठबंधन के पास 103 विधायक हैं. एनडीए में बीजेपी के 256, अपना दल (एस) के 13, आरएलडी के 9, सुभासपा के 6 और निषाद पार्टी के 5 विधायक हैं.

दो विधायक राजा भैया की पार्टी के हैं. इन्हें मिलाकर यह आंकड़ा 291 विधायकों का होता है. वहीं, सपा और कांग्रेस को मिलाकर कुल 103 विधायक हैं. बीजेपी को सात सीटें जीतने के लिए 266 विधायक चाहिए होंगे, जिसके बाद उसके पास 26 सरप्लस (अतिरिक्त) वोट बचेंगे. वहीं, आठवीं सीट जीतने के लिए 12 अतिरिक्त वोटों की जरूरत होगी.

वहीं, राज्यसभा की 2 सीटों को जिताने के लिए सपा को 76 वोटों की जरूरत है. इसके बाद सपा के पास भी करीब 27 सरप्लस वोट बचते हैं. सपा को तीसरी सीट जीतने के लिए 11 अतिरिक्त वोटों की दरकार होगी. यही 11-12 वोटों का अंतर इस चुनाव को बेहद दिलचस्प बना रहा है.

26 और 27 के फेर में कैसे फंसा राज्यसभा चुनाव?

एक तरफ जहां अखिलेश ने 3 प्रत्याशी उतारने का ऐलान कर ‘सरप्राइज’ देने की बात कही है और बीजेपी के सहयोगी दलों (जैसे सुभासपा या निषाद पार्टी) में सेंधमारी की उम्मीद लगा रहे हैं; वहीं दूसरी ओर बीजेपी भी शांत नहीं बैठी है. बीजेपी ने 8 उम्मीदवार उतारने का प्लान बनाया है. बीजेपी 8वीं सीट जीतने के लिए सपा से निष्कासित और बागी विधायकों पर नजर गड़ाए हुए है. बीजेपी के साथ सपा के बागी विधायक आ सकते हैं, जिन्हें मिलाकर यह आंकड़ा 32 पर पहुंच जाएगा. इसके बाद भी उसे 6 वोट चाहिए होंगे, लेकिन सबसे बड़ी चुनौती सहयोगी दलों के विधायकों को एकजुट रखने की है.

वहीं, सपा की नजर सुभासपा और आरएलडी के कुछ विधायकों पर है, जिन्हें मिलाकर अखिलेश अपना सियासी गणित बैठाना चाहते हैं. सुभासपा के 6 में से 4 विधायक पहले से ही सपा का झंडा लगाकर घूम रहे हैं. इसके अलावा आरएलडी के 9 में से 3 विधायक सपा बैकग्राउंड वाले हैं. इसीलिए सपा ने अपनी तीसरी सीट जीतने का नंबर जुटाने का दांव तैयार कर रखा है.

बीजेपी और सपा में शह-मात का खेल

यूपी में 10वीं सीट का यह संग्राम सिर्फ एक राज्यसभा सांसद चुनने का नहीं है, बल्कि 2027 के यूपी विधानसभा चुनाव से पहले दोनों दलों के बीच मनोवैज्ञानिक बढ़त बनाने की एक बड़ी सियासी जंग बन चुका है. इसीलिए सपा और बीजेपी दोनों ही दांव चल रहे हैं, लेकिन क्रॉस वोटिंग का खतरा दोनों ही तरफ बना हुआ है.

बीजेपी राज्यसभा के लिए 8वां उम्मीदवार ऐसे नेता को बनाना चाहती है जो सपा के सियासी गणित को बिगाड़ सके. सपा भी ऐसे चेहरे की तलाश में है, जो पीडीए समीकरण को मजबूत बनाए रखते हुए राज्यसभा चुनाव में जीत का परचम फहरा सके. इस तरह सपा और बीजेपी के बीच शह-मात का खेल शुरू हो गया है.

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