धनतेरस की धूम: दिल्ली के डिप्टीगंज बाजार में खरीदारों का सैलाब, पीतल और कांसे के बर्तनों की बढ़ी डिमांड, जानें इस बाजार का इतिहास

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धनतेरस की धूम: दिल्ली के डिप्टीगंज बाजार में खरीदारों का सैलाब, पीतल और कांसे के बर्तनों की बढ़ी डिमांड, जानें इस बाजार का इतिहास

-पुरानी दिल्ली का ऐतिहासिक डिप्टीगंज बर्तन बाजार में इस बार कांसे के बर्तनों की बहुत ज्यादा डिमांड है.

नजफगढ़ मेट्रो न्यूज/नई दिल्ली/ ब्यूरो,: धनतेरस से पहले राजधानी दिल्ली के प्रमुख बाजारों में त्योहारी रौनक देखने को मिल रही है. पुरानी दिल्ली के सदर बाजार से सटे ऐतिहासिक डिप्टीगंज बर्तन बाजार में ग्राहकों की भीड़ उमड़ रही है. सोना-चांदी के साथ बर्तन खरीदने की परंपरा के चलते बाजार में स्टील, पीतल, कांसे, तांबे और एल्युमिनियम के बर्तनों की मांग बढ़ गई है. खास बात यह है कि इस बार स्टील के साथ पारंपरिक धातुओं से बने बर्तनों की ओर भी ग्राहकों का रुझान बढ़ा है. बाजार में खरीदारी, गिफ्टिंग और थोक कारोबार को लेकर व्यापारियों में उत्साह है. हालांकि, धातुओं की बढ़ती कीमतों और महंगाई का असर भी कारोबार पर देखने को मिल रहा है.

150 साल पुराना है डिप्टीगंज बर्तन बाजार

डिप्टीगंज स्टेनलेस स्टील यूटेंसिल्स ट्रेडर्स एसोसिएशन के चेयरमैन भारत शर्मा के मुताबिक, बाजार में करीब 250 से 300 दुकानें हैं. यहां स्टेनलेस स्टील, एल्युमिनियम, कॉपर और पीतल के बर्तनों का थोक और खुदरा कारोबार होता है. बाजार की कई दुकानें 100 से 150 साल पुरानी हैं. यहां दिल्ली के अलावा देश के अलग-अलग राज्यों से व्यापारी और ग्राहक खरीदारी करने पहुंचते हैं. धनतेरस के दिन बाजार में इतनी भीड़ होती है कि पैर रखने तक की जगह नहीं मिलती.

पीतल और कांसे के बर्तनों की बढ़ी मांग

इस साल बाजार में पारंपरिक धातुओं से बने बर्तनों की मांग में बढ़ोतरी देखने को मिल रही है. वर्ष 1954 से बर्तनों का कारोबार कर रहे दुकानदार मोहित जैन बताते हैं कि इस बार कांसे के बर्तनों की काफी मांग है. पीतल के बर्तनों को लेकर भी ग्राहकों का रुझान बढ़ा है. लोग अब इन बर्तनों को केवल गिफ्टिंग के लिए नहीं, बल्कि अपने व्यक्तिगत इस्तेमाल के लिए भी खरीद रहे हैं.

भारत शर्मा के अनुसार, पिछले 10-15 दिनों से बाजार में स्टील, एल्युमिनियम और तांबे-पीतल के गिफ्ट पैक की खरीदारी हो रही है. हालांकि, इस साल तांबे और पीतल की कीमतों में करीब 70 से 80 फीसदी तक बढ़ोतरी हुई है. इसके बावजूद पारंपरिक बर्तनों की मांग बनी हुई है. वहीं, स्टील के बर्तन अपेक्षाकृत सस्ते होने के कारण आम ग्राहकों की पसंद बने हुए हैं.

कॉर्पोरेट गिफ्टिंग में कमी, रिटेल बाजार में उत्साह

धनतेरस के मौके पर बाजार में कॉर्पोरेट गिफ्टिंग के साथ व्यक्तिगत खरीदारी भी जोर पकड़ रही है. व्यापारी प्रशांत अमर अपने कारखाने के 16 कर्मचारियों के लिए उपहार खरीदने पहुंचे. उन्होंने बताया कि इस बार कर्मचारियों के लिए स्टील सेट और हांडी सेट खरीदे हैं. वहीं, गाजियाबाद से परिवार के साथ पहुंचे ग्राहक फारूक ने बताया कि वह रिश्तेदारों और व्यावसायिक सहयोगियों को देने के लिए थोक भाव में 40 से 50 बर्तन सेट खरीदने आए हैं.

दुकानदार मोहित जैन के मुताबिक, वैश्विक परिस्थितियों और महंगाई के कारण बर्तनों की लागत में करीब 15 से 20 फीसदी तक बढ़ोतरी हुई है. इसका असर ग्राहकों की खरीदारी क्षमता और कॉर्पोरेट गिफ्टिंग पर पड़ा है. हालांकि, धनतेरस के दिन खुदरा बाजार में बड़ी संख्या में ग्राहक पहुंचते हैं. कोई चम्मच खरीदता है तो कोई गिलास और पूरा बर्तन सेट.

दो से तीन महीने पहले शुरू हो जाती हैं तैयारियां

धनतेरस पर अचानक बढ़ने वाली मांग को पूरा करने के लिए व्यापारी दो से तीन महीने पहले ही तैयारियां शुरू कर देते हैं. भारत शर्मा बताते हैं कि समय रहते स्टॉक नहीं किया जाए तो त्योहार के दौरान माल की उपलब्धता मुश्किल हो जाती है. बाजार में आने वाले बर्तन मुंबई, जगाधरी, जोधपुर, अहमदाबाद, मद्रास और दिल्ली के कारखानों से मंगाए जाते हैं.

सुरक्षा के इंतजाम, रात 3 बजे तक खुलेंगी दुकानें

धनतेरस पर उमड़ने वाली भीड़ को देखते हुए बाजार एसोसिएशन की ओर से सुरक्षा गार्ड और महिला सुरक्षा गार्ड तैनात किए जाते हैं. इसके अलावा साफ-सफाई, पेयजल और महिला-पुरुष शौचालयों की व्यवस्था भी की जाती है. दुकानदार उमेश गोयल के मुताबिक, धनतेरस के दिन खुदरा ग्राहकों की संख्या सबसे ज्यादा रहती है. आम दिनों में सुबह 10-11 बजे खुलने और शाम 7-8 बजे बंद होने वाला डिप्टीगंज बाजार धनतेरस पर सुबह 8 बजे से ही गुलजार हो जाता है. दुकानदार मोहित जैन बताते हैं कि इस दिन दुकान बंद करने का कोई निश्चित समय नहीं होता. आखिरी ग्राहक के जाने के बाद ही शटर गिराया जाता है. आमतौर पर दुकानें रात 11-12 बजे तक खुली रहती हैं, जबकि बाजार में कारोबार रात 2 से 3 बजे तक चल सकता है. धनतेरस पर डिप्टीगंज बाजार की रौनक केवल खरीदारी तक सीमित नहीं है. पीढ़ियों पुराने इस बाजार में पारंपरिक बर्तनों की चमक और ग्राहकों की भीड़ आज भी त्योहार की रौनक को खास बना रही है.

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