मसूद अजहर का ‘72 हूरों’ का फरेब उजागर, डर के साए में अफगानिस्तान में छिपा

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मसूद अजहर का ‘72 हूरों’ का फरेब उजागर, डर के साए में अफगानिस्तान में छिपा

पाकिस्तानी/सिमरन मोरया/- भारत के “ऑपरेशन सिंदूर” से दहशत में आए जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर की अब सांसें अटकने लगी हैं। जो कभी 72 हूरों का सपना बेचकर लोगों को मारने भेजता था, अब खुद जान बचाकर अफगानिस्तान में छिपा बैठा है। खुफिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अजहर पाकिस्तान छोड़ चुका है और अब तालिबान की पनाह में आतंकी कैंप में शरण लिए हुए है, ताकि भारतीय कार्रवाई से बच सके।

जो कभी आतंकियों को ‘जन्नत’ का सपना दिखाकर मौत के रास्ते भेजता था, आज वही खुद मौत के डर से भागा-भागा फिर रहा है। भारत के ऑपरेशन सिंदूर ने पाकिस्तान के पाले हुए खूंखार आतंकियों की नींद उड़ा दी है। ताजा रिपोर्ट्स के मुताबिक, जैश-ए-मोहम्मद का सरगना मसूद अजहर अब पाकिस्तान छोड़कर अफगानिस्तान भाग गया है। बताया जा रहा है कि वह तालिबान की शरण में एक आतंकी ट्रेनिंग कैंप में छिपा हुआ है।

मसूद अजहर अब खुलकर सामने आने से बच रहा है। ऑपरेशन सिंदूर के तहत भारत ने जिस सटीकता और आक्रामकता से जवाबी कार्रवाई की है, उससे पाकिस्तान और उसके आतंकी संगठन बुरी तरह से घबराए हुए हैं। अजहर को डर है कि अगला निशाना वह खुद हो सकता है। ऐसे में उसने गुपचुप तरीके से अपना ठिकाना बदल लिया है।

अफगानिस्तान के आतंकी कैंप में छिपा अजहर
सूत्रों के मुताबिक मसूद अजहर इस वक्त अफगानिस्तान के खोस्त प्रांत के गुरबुज जिले में लश्कर-ए-तैयबा के एक ट्रेनिंग कैंप में छिपा हुआ है। गंभीर दिल की बीमारी से जूझ रहा अजहर समय-समय पर कराची जाकर इलाज भी करवा रहा है, लेकिन वह बेहद गोपनीय तरीके से यह काम करता है ताकि उसकी जानकारी किसी को न लग सके। डॉक्टरों ने उसे कम बोलने की सख्त हिदायत दी है।

ऑपरेशन सिंदूर से हिला जैश-ए-मोहम्मद
भारत द्वारा चलाए जा रहे ऑपरेशन सिंदूर में मसूद अजहर के कई करीबी रिश्तेदार मारे जा चुके हैं। इसी डर से वह न सिर्फ खुद छिपा, बल्कि अपने भाई मौलाना तल्हा को भी अफगानिस्तान ले गया और आतंकी कैंप की जिम्मेदारी सौंप दी है। अजहर को अच्छे से पता है कि भारत अब सिर्फ चेतावनी नहीं देता, बल्कि सीधी कार्रवाई करता है।

तालिबान से ‘पुरानी यारी’ बनी मददगार
हालांकि अफगान तालिबान सरकार यह दावा करती है कि वो आतंकियों को पनाह नहीं देती, लेकिन हकीकत यह है कि तालिबान के कई पुराने कमांडर आज भी जैश, लश्कर जैसे संगठनों से गहरे संबंध रखते हैं। यही वजह है कि मसूद अजहर को अफगानिस्तान में सुरक्षित ठिकाना मिल गया है। सिर्फ अजहर ही नहीं, अल-कायदा से जुड़े डॉक्टर अब्दुल रऊफ भी कुनार प्रांत में आतंकी ट्रेनिंग सेंटर में छिपा बैठा है।

जान की भीख मांग रहा है आतंकी सरगना
जो कभी माइक पर खड़े होकर 72 हूरों की बात करता था, ‘शहादत’ का पाठ पढ़ाता था, आज वही मसूद अजहर जान बचाने के लिए दर-दर भटक रहा है। ऑपरेशन सिंदूर ने आतंक के उन अड्डों को भी खत्म किया है जिन्हें पहले कोई छूने की हिम्मत नहीं करता था। अब हालात ये हैं कि जो अपने लड़ाकों को मौत के मुंह में धकेलता था, वह खुद मौत से खौफ खाकर एक कोने में दुबका बैठा है।

भारत की रणनीति से कांप उठा आतंकी नेटवर्क
भारतीय खुफिया एजेंसियों की सटीक रणनीति और ऑपरेशन सिंदूर जैसी कार्रवाइयों ने आतंकी संगठनों की कमर तोड़ दी है। अब पाकिस्तान में पल रहे आतंकी भी महसूस करने लगे हैं कि भारत अब पलटवार करने से पीछे नहीं हटता। यही कारण है कि मसूद अजहर जैसे सरगना अब न तो पाकिस्तान में सुरक्षित महसूस कर रहे हैं और न ही खुलकर साजिश रच पा रहे हैं।

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