भावुक हुए श्रद्धालु, प्राचीन श्री रामलीला हल्द्वानी में दिन में राम वनगमन और रात्रि में ताड़का वध की लीला से

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भावुक हुए श्रद्धालु, प्राचीन श्री रामलीला हल्द्वानी में दिन में राम वनगमन और रात्रि में ताड़का वध की लीला से

-प्राचीन श्री रामलीला मैदान में राम राज्याभिषेक की तैयारी, कैकेयी-मंथरा संवाद और राम वनगमन के प्रसंगों ने दर्शकों को किया भावविभोर; वृंदावन के श्री बृजेश्वरी लीला मंडल की प्रस्तुतियों को लेकर श्रद्धालुओं में उत्साह

नजफगढ़ मेट्रो न्यूज / उत्तराखंड / हल्द्वानी ब्यूरो। नगर की ऐतिहासिक प्राचीन श्री रामलीला संचालन समिति की ओर से आयोजित रामलीला महोत्सव में सोमवार को मर्यादा, त्याग और भक्ति से ओतप्रोत प्रसंगों का मंचन किया गया। दिन की लीला में राम राज्याभिषेक की तैयारियों से लेकर कैकेयी-मंथरा संवाद, कैकेयी-दशरथ संवाद और भगवान श्रीराम के वनगमन तक के प्रसंग प्रस्तुत किए गए। इन भावुक दृश्यों को देखकर रामलीला मैदान में मौजूद अनेक श्रद्धालुओं की आंखें नम हो गईं। संपूर्ण मंचन व्यास पुष्कर दत्त शास्त्री के निर्देशन में संपन्न हुआ।

दिन की लीला में दिखाया गया कि अयोध्या में भगवान श्रीराम के राज्याभिषेक की तैयारियां चल रही थीं, लेकिन मंथरा के बहकावे में आकर कैकेयी ने राजा दशरथ से अपने दो वरदान मांग लिए। कैकेयी ने भरत के लिए राजगद्दी और श्रीराम के लिए चौदह वर्ष का वनवास मांगा। अपने वचन से बंधे राजा दशरथ इस मांग के सामने विवश हो गए। पिता की आज्ञा और रघुकुल की मर्यादा का पालन करते हुए भगवान श्रीराम ने बिना किसी विरोध के राजसिंहासन का त्याग कर वन जाने का निर्णय लिया।

राम वनगमन के प्रसंग ने दर्शकों को किया भावुक

भगवान श्रीराम के वनगमन का मंचन रामलीला का प्रमुख आकर्षण रहा। राजमहल में उत्सव की तैयारियों के बीच वनवास का निर्णय, राजा दशरथ की व्याकुलता और श्रीराम का सहज भाव से पिता की आज्ञा स्वीकार करना दर्शकों के हृदय को छू गया। मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के त्याग, कर्तव्यनिष्ठा और आदर्श पुत्र के स्वरूप ने श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। मंचन के माध्यम से कलाकारों ने पारिवारिक मर्यादा, वचनपालन और धर्म के प्रति समर्पण का संदेश दिया।

रात्रि की लीला में श्रीराम जन्म और ताड़का वध का मंचन

समिति के अनुसार, रात्रिकालीन लीला में वृंदावन से आए श्री बृजेश्वरी लीला मंडल की ओर से भगवान श्रीराम के जन्म, महर्षि विश्वामित्र के अयोध्या आगमन और ताड़का वध के प्रसंगों का मंचन निर्धारित था। पुत्रेष्टि यज्ञ के बाद अयोध्या में चारों राजकुमारों के जन्मोत्सव तथा महर्षि विश्वामित्र द्वारा श्रीराम और लक्ष्मण को अपने साथ ले जाने के प्रसंग को भव्य रूप में प्रस्तुत करने की तैयारी की गई।

रात्रि की लीला में ताड़का वध के माध्यम से भगवान श्रीराम के पराक्रम, धर्म की रक्षा और ऋषि-मुनियों के यज्ञों की सुरक्षा के प्रसंग को दर्शाया जाना था। इन धार्मिक एवं पौराणिक प्रसंगों को देखने के लिए श्रद्धालुओं में उत्साह बना रहा।

समिति पदाधिकारियों और श्रद्धालुओं की रही उपस्थिति

रामलीला का आयोजन प्राचीन रामलीला मैदान, हल्द्वानी में किया जा रहा है। इस अवसर पर समिति के बसंत अग्रवाल, मनोज गुप्ता, भोलानाथ केसरवानी, विनीत अग्रवाल, अजय राजौर और अमित जोशी सहित सैकड़ों श्रद्धालु उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान शैलेंद्र बाली, अंजू बाली, अमरनाथ जोशी और सौरभ सिंघल ने व्यास पूजन किया।

राम सेवा में अनमोल संकल्प सिद्धि फाउंडेशन, पुनर्वा महिला समिति, महिला व्यापार मंडल और आकृति सोसाइटी के साथ संजय गोयल, महेश राजा, वंश गुप्ता, अतुल जायसवाल, कपिल अग्रहरि और तनिष्क सनवाल सहित अन्य लोगों का सहयोग रहा।

समिति ने नगरवासियों से रामलीला महोत्सव में समय पर पहुंचकर धार्मिक एवं सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का आनंद लेने की अपील की। रामलीला के माध्यम से भगवान श्रीराम के आदर्शों, मर्यादा, त्याग और धर्म के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।

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