रुद्रप्रयाग/अनीशा चौहान/- हिंदुओं की सबसे बड़ी धार्मिक यात्राओं में से एक केदारनाथ यात्रा को मौसम की खराबी के कारण अस्थायी रूप से रोक दिया गया है। मौसम विभाग द्वारा उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग और चमोली जिलों में भारी बारिश का पूर्वानुमान जताया गया है, जिस पर ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। इसी के चलते सभी यात्रियों को सोनप्रयाग और गौरीकुंड में ही रोक दिया गया है, ताकि उनकी सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
बारिश और भूस्खलन से बढ़ी मुश्किलें
उत्तराखंड में लगातार हो रही तेज बारिश के कारण भूस्खलन की घटनाएं भी सामने आ रही हैं। हाल ही में सोनप्रयाग में भारी भूस्खलन के चलते 40 से अधिक श्रद्धालु केदारनाथ से लौटते समय फंस गए थे, जिन्हें बाद में राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF) की टीम ने सफलतापूर्वक रेस्क्यू किया।
लगातार बारिश से बिजली और पानी की आपूर्ति भी बाधित हो रही है। कई गांवों और कस्बों में जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। कुछ दिन पहले बरकोट के पास बादल फटने की घटना भी दर्ज की गई थी, जिसने स्थिति को और गंभीर बना दिया।
चार जिलों में भूस्खलन की चेतावनी
मौसम विभाग ने 7 और 8 जुलाई को उत्तराखंड के टिहरी, रुद्रप्रयाग, चमोली और उत्तरकाशी जिलों में भूस्खलन की आशंका जताई है। प्रशासन ने स्थानीय लोगों और यात्रियों को सतर्क रहने और अनावश्यक यात्रा से बचने की सलाह दी है। यात्रा मार्गों की स्थिति की लगातार निगरानी की जा रही है।
केदारनाथ यात्रा का धार्मिक महत्व
केदारनाथ यात्रा हिन्दू धर्म की एक अत्यंत पवित्र तीर्थयात्रा है। यह भगवान शिव को समर्पित केदारनाथ मंदिर तक की यात्रा होती है, जो समुद्र तल से 3,583 मीटर की ऊंचाई पर हिमालय की गोद में स्थित है। यह मंदिर चार धाम यात्रा (यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ) का एक प्रमुख हिस्सा है और इसे 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक माना जाता है।


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