ब्रिक्स देशों संग रुपये में लेन-देन के लिए मंजूरी जरूरी नहीं

स्वामी,मुद्रक एवं प्रमुख संपादक

शिव कुमार यादव

वरिष्ठ पत्रकार एवं समाजसेवी

संपादक

भावना शर्मा

पत्रकार एवं समाजसेवी

प्रबन्धक

Birendra Kumar

बिरेन्द्र कुमार

सामाजिक कार्यकर्ता एवं आईटी प्रबंधक

Categories

September 2026
MTWTFSS
 123456
78910111213
14151617181920
21222324252627
282930 
September 26, 2026

हर ख़बर पर हमारी पकड़

ब्रिक्स देशों संग रुपये में लेन-देन के लिए मंजूरी जरूरी नहीं

-ट्रंप टैरिफ विवाद के बीच भारत का बड़ा फैसला, आरबीआई ने सभी बैंकों को जारी किया आदेश

नई दिल्ली/शिव कुमार यादव/- भारत पर अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप का 50 प्रतिशत टैरिफ लागू होने के बाद भारत ने एक और बड़ा फैसला लिया है। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने बैंकों को निर्देश दिया है कि वे ब्रिक्स देशों के साथ निर्यात-आयात का लेन-देन पूरी तरह से भारतीय करेंसी रुपये में करने की अनुमति व्यापारियों को दें। इसके लिए वोस्ट्रो अकाउंट का इस्तेमाल होगा और अब बैंकों को पहले से मंजूरी लेने की जरूरत भी नहीं होगी।

भारत सरकार ने क्यों लिया ये फैसला?
बता दें कि भारत सरकार का कदम रुपये की अंतरराष्ट्रीय भूमिका मजबूत करने और डॉलर पर निर्भरता घटाने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। खासकर उस समय जब अमेरिका ने भारतीय निर्यात पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगा दिया है। बता दें कि अभी भारतीय व्यापारी लगभग 85 फीसदी विदेशी व्यापार अमेरिकी कंरेंसी डॉलर में करते हैं, लेकिन 10 से 15 प्रतिशत लेन-देन रुपये में शिफ्ट होने से डॉलर पर करीब 100 अरब डॉलर वार्षिक की निर्भरता कम हो जाएगी।

क्या है ब्रिक्स और कितने देश हैं सदस्य?
बता दें कि ब्रिक्स एक इंटर-गवर्नमेंटल ऑर्गेनाइजेशन है, जिसके 10 मेंबर भारत, चीन, रूस, ब्राजील, दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, इथियोपिया, ईरान, इंडोनेशिया और संयुक्त अरब अमीरात हैं। पहले ब्रिक्स में सिर्फ 5 देश ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका थे, लेकिन 1 जनवरी 2024 के बाद 5 और देश इसके मेंबर बन गए। ब्रिक्स का कोई हेड ऑफिस नहीं है, क्योंकि चीन के शंघाई में ब्रिक्स के वित्तीय संस्थान ब्रिक्स न्यू डेवलपमेंट बैंक (छक्ठ) का हेड ऑफिस है। बारी-बारी ब्रिक्स के सदस्य देश हर साल शिखर सम्मेलन आयोजित करते हैं।

ब्रिक्स देशों के साथ भारत का व्यापार
बता दें कि ब्रिक्स देशों के साथ भारत अभी तक कपड़ों, केमिकल और मेडिसिन का बिजनेस कर रहा है, लेकिन अब बिजनेस कैटेगरी को बढ़ाने पर फोकस है, खासकर ट्रंप टैरिफ के बाद इस दिशा में भारत सरकार कदम बढ़ा सकती है। ब्रिक्स देशों के साथ व्यापारिक समझौते करके द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ावा दिया जा सकता है। साल 2008-09 से 2023-24 तक भारत का ब्रिक्स देशों के साथ व्यापार लगभग दोगुना हो गया है, लेकिन चीन और रूस के साथ व्यापार घाटा चुनौती है।

भारतीय करेंसी में व्यापार पर खास फोकस
व्यापार घाटे को कम करने के लिए भारत ब्रिक्स देशों के साथ अपनी करेंसी में व्यापार और लेन-देन को बढ़ावा दे रहा है, क्योंकि ब्रिक्स देशों के साथ व्यापार करने से इंटरनेशनल मार्केट में अपनी स्थिति को मजबूत करने का, इन्वेस्टमेंट को आकर्षित करने का मौका मिलता है। इसलिए इन देशों के साथ भारतीय करेंसी में व्यापार को बढ़ावा देने के लिए भारत सरकार ने कई कदम उठाए हैं। जैसे रुपये में व्यापार के लिए सरकार ने भारतीय व्यापारियों को विशेष वोस्ट्रो खाते दिए हैं।      
          ब्रिक्स देशों के अलावा भारत ने रूस, यूएई, मालदीव, मलेशिया, केन्या, श्रीलंका और बांग्लादेश के साथ जो व्यापार समझौते किए हैं, उनका लेन-देन भी भारतीय करेंसी रुपये में ही होगा।

About Post Author

Subscribe to get news in your inbox