बांग्लादेश को काटकर आजाद ईसाई देश बनाने की साजिश!

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बांग्लादेश को काटकर आजाद ईसाई देश बनाने की साजिश!

बांग्लादेश को काटकर आजाद ईसाई देश बनाने की साजिश!

ढाका/शिव कुमार यादव/- बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना ने दावा किया है कि उनके देश और म्यांमार के कुछ हिस्सों को तोड़कर ईस्ट तिमोर जैसा देश बनाने की साजिश हो रही है। बयान में हसीना ने हालांकि साजिशकर्ता का नाम नहीं लिया है।
           

भारत के पड़ोसी देश में लगातार कुछ न कुछ विवाद हो रहा है। कुछ वक्त पहले वहां विपक्षी पार्टियां भारतीय सामानों के बहिष्कार की बात कर रही थीं, जिसपर पीएम शेख हसीना ने पलटवार किया था। अब हसीना ने एक और बड़ी बात कह दी है। उन्होंने दावा किया कि बांग्लादेश को काटकर अलग देश बनाने की साजिश हो रही है, जैसा पूर्वी तिमोर के साथ हो चुका। उनके इस बयान से ईस्ट तिमोर चर्चा में है। लगभग 25 सालों तक इस पर मुस्लिम बहुल इंडोनेशिया का कब्जा रहा। इस दौरान धर्म परिवर्तन तो हुआ, लेकिन अलग तरह का जिसमें तिमोरी आबादी ने बहुदेववाद छोड़ ईसाई धर्म अपना लिया।  

पीएम हसीना ने क्या कहा था
एक इंटरव्यू के दौरान कई दूसरी बातें कहते हुए उन्होंने एक अलग ही बात कर दी। पीएम हसीना ने कहा कि बांग्लादेश के चट्टोग्राम को तोड़कर, और म्यांमार के कुछ हिस्सों को तोड़कर बंगाल की खाड़ी में एक ईसाई देश बनाने की साजिश हो रही है। बयान में हसीना ने हालांकि ये साफ नहीं किया कि साजिश दरअसल किस देश या सरकार की है। उन्होंने इस साजिश की तुलना ईस्ट तिमोर से कर दी। किसी समय पर मुस्लिम बहुसंख्यक इंडोनेशिया का हिस्सा रह चुका ये देश अब पूरी तरह से कैथोलिक बन चुका है।

           बांग्लादेश के जिस चट्टोग्राम का जिक्र हसीना ने किया, वो इस देश का काफी समृद्ध बंदरगाह है, जहां से काफी सारा इंटरनेशनल आयात-निर्यात होता आया है। फिलहाल ये इलाका मुस्लिम बहुल है, जहां हिंदू और बौद्ध आबादी भी रहती है। पीएम के बयान के बाद आशंका बढ़ गई है कि बंदरगाह होने की वजह से देश को काटने की साजिश हो रही है। बांग्लादेश में धर्म परिवर्तन की आजादी है इसलिए भी ये डर गहरा रहा है। हालांकि फिलहाल कुल आबादी में केवल 0.30 प्रतिशत हिस्सा ही ईसाई है।

क्यों की ईस्ट तिमोर से तुलना
इंडोनेशिया के अधीन आते इस देश में 1975 से लेकर अगले 25 सालों में धर्म परिवर्तन हुआ। ये इतना ज्यादा था कि नब्बे के दशक तक ही तिमोर की 90 प्रतिशत से ज्यादा आबादी ने मुस्लिम धर्म छोड़कर ईसाई धर्म अपना लिया लेकिन ये मास कन्वर्जन ऐसे ही नहीं हुआ, बल्कि गरीबों की मदद की आड़ में हुआ है।

किन वजहों से हुआ होगा धर्म परिवर्तन
धर्म परिवर्तन थ्योरी के पीछे कौन सा देश था, इसपर पक्की बात कहीं नहीं मिलती, न ही ये साफ है कि इसका क्या फायदा किसी को मिल सका है। कई मीडिया रिपोर्ट्स में जिक्र है कि पहले ईस्ट तिमोर पर राज कर चुके पुर्तगालियों ने ऐसा किया, ताकि इंडोनेशिया पूरी तरह से ताकतवर न हो सके। 
          बता दें कि 16वीं सदी से लेकर 1975 से पहले तक यहां पुर्तगाली बसे हुए थे। 1975 में देश ने जैसे ही अपनी आजादी का एलान किया, सालभर के भीतर इंडोनेशिया ने उसपर कब्जा कर लिया हालांकि यूनाइटेड नेशन्स के दखल के बाद साल 1999 में ही इंडोनेशिया ने इस पर से अपना कंट्रोल हटा लिया, लेकिन कब्जा हटाने के पीछे यूएन की समझाइश अकेली वजह नहीं थी। इंडोनेशिया मान रहा था कि पूर्वी तिमोर पहले ही उसके हाथ से निकल चुका है। इसकी वजह वहां हुआ मास कन्वर्जन था।

तेजी से हुआ कन्वर्जन
साल 1975 से 99 के दौरान भले ही मुस्लिम देश इंडोनेशिया का इसपर राज था, लेकिन बहुत तेजी से आबादी ईसाई धर्म अपना रही थी। इससे पहले वे बहुदेववादी हुआ करते थे। इंडोनेशिया ने उन्हें अपने धर्म में बदलने की बहुतेरी कोशिश की, लेकिन ईसाई धर्म की तरफ लोगों का रुझान बढ़ता ही चला गया, धर्म परिवर्तन किस तेजी से हुआ होगा, इसका अंदाजा एक मोटे आंकड़े से लगा सकते हैं। पचहत्तर के दशक में वहां लगभग 25 फीसदी आबादी ने कैथोलिक धर्म अपनाया था जो नब्बे की शुरुआत में ही 90 फीसदी से ऊपर चला गया। 
          तिमोर में चूंकि पहले बहुदेवपूजा का चलन था, और इंडोनेशिया का संविधान मोनोथिज्म की बात करता है, इसलिए भी जमीन का ये टुकड़ा लगातार नाराज रहा। हालात ये हुए कि अब वहां 99 प्रतिशत आबादी ईसाई हो चुकी, जबकि मुस्लिम धर्म को मानने वाले केवल एक प्रतिशत बाकी हैं।
          साउथ-ईस्ट एशिया की रिसर्च में यह दावा भी है कि एक से दूसरे हाथ जाती तिमोरी आबादी ने अपने दुख-दर्द को जीसस क्राइस्ट के ज्यादा करीब पाया, और इसलिए भी वे इस धर्म की तरफ जाने लगे। 

कैसा है तिमोर, कौन सी भाषा-धर्म
पूर्वी तिमोर का आधिकारिक नाम तिमोर लेस्ते हैं। दक्षिण-पूर्व एशिया में स्थित ये देश साइज में लगभग इजरायल जितना है। मई 2002 में यानी आज से लगभग दो दशक पहले ही ये देश इंडोनेशिया से कटकर आजाद मुल्क बना। तिमोर लेस्ते में फिलहाल धर्म तो लगभग एक ही है, लेकिन भाषाएं कई बाकी हैं। बहुत से लोग पुर्तगाली बोलते हैं, जबकि बाकी टेटुन. इंडोनेशियाई और अंग्रेजी को अब भी वहां सरकारी कामकाज की भाषा का दर्जा मिला हुआ है।

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