प्रेम पच्चीसा(भाग 5)

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प्रेम पच्चीसा(भाग 5)

बिलासपुर, छत्तीसगढ़/-  रोहन और माया, दो साधारण दिलों की कहानी, भोपाल से शहर में शुरू हुई। रोहन एक संवेदनशील कवि था, जिसकी कविताएँ प्रकृति, प्रेम और जीवन के सूक्ष्म रंगों को बयां करती थीं। माया, एक चित्रकार, अपने रंगों और ब्रश से कैनवास पर जीवन की खूबसूरती उतारती थी। दोनों की मुलाकात एक साहित्यिक समारोह  में हुई थी, जहाँ रोहन अपनी कविता पढ़ रहा था और माया उसकी शब्दों की गहराई में खो गई थी। उनकी प्रेम कहानी एक कविता और चित्र की तरह धीरे-धीरे रंग भरती गई। शादी के बाद, दोनों ने एक साधारण मगर सुखी जीवन शुरू किया। शादी के एक साल बाद, माया ने एक खूबसूरत बालिका को जन्म दिया। उस दिन सुबह का सूरज कुछ अलग ही चमक रहा था। रोहन अस्पताल के कमरे में माया के पास बैठा था  जब नर्स ने उनकी बेटी को उनकी गोद में रखा। छोटी-सी, नन्हीं आँखों वाली उस बच्ची को देखकर रोहन की आँखें नम हो गईं। उसने बच्ची का नाम सुझाया राशि , जो उनके प्रेम और सपनों का प्रतीक थी। माया ने मुस्कुराते हुए सहमति दी।
           रोहन ने राशि  को अपनी बाहों में उठाया और धीरे से कहा, “तू मेरी सबसे सुंदर कविता है।” उस पल में, रोहन को लगा जैसे उसका जीवन अब पूर्ण हो चुका है। माया, जो अभी भी थकान और खुशी के मिश्रित भावों में थी, ने रोहन की ओर देखा और कहा, “अब हमारी कहानी में एक नया रंग जुड़ गया है।” हम दोनों की राशि के सभी गुण राशि में देखने मिलेंगे।
राशि  के आने से रोहन और माया का जीवन बदल गया। रोहन, जो पहले अपनी कविताओं में खोया रहता था, अब रातों को राशि  को सुलाने के लिए लोरियाँ लिखने लगा। उसकी कविताओं में अब एक नई गहराई थी—एक पिता का प्रेम, एक बच्ची की मुस्कान, और एक परिवार की उमंग। माया ने अपने चित्रों में राशि  की मासूमियत को उतारना शुरू किया। उसका कैनवास अब रंगों से नहीं, बल्कि भावनाओं से जीवंत हो उठा।
           हालांकि, नई जिम्मेदारियों ने उनके जीवन में चुनौतियाँ भी लाईं। रोहन को अपनी कविताओं के लिए समय निकालना मुश्किल होने लगा। माया को भी अपने चित्रों के लिए प्रेरणा ढूँढने में समय लगता  था। लेकिन दोनों ने एक-दूसरे का साथ कभी नहीं छोड़ा। रात को जब राशि  सो जाती, रोहन और माया एक-दूसरे के साथ खुले आसमान में छोटे से रेडियो पर  विविध भारती के मधुर छाया गीत सुन कर सो जाते अपने सपनों को फिर से बुनते।
           एक दिन, रोहन ने माया से कहा, “क्यों न हम राशि  के लिए कुछ खास करें? एक ऐसी दुनिया बनाएँ, जहाँ वह अपनी कल्पनाओं को उड़ान दे सके।” माया ने उत्साह से जवाब दिया, “हाँ, हम एक किताब बनाएँगे—तुम्हारी कविताएँ और मेरे चित्र। राशि के लिए, और उन सभी बच्चों के लिए जो सपने देखते हैं।” इस विचार ने उनके जीवन में नई ऊर्जा भर दी। रोहन ने बच्चों के लिए कविताएँ लिखना शुरू किया, जिसमें जादुई जंगल, बातें करने वाले पशु, और सितारों की कहानियाँ थीं। माया ने इन कविताओं को अपने रंगों से सजाया। राशि , जो अब कुछ महीनों की हो चुकी थी, अपनी माँ के चित्रों को देखकर हँसती और तालियाँ बजाती लेकिन उसे नींद पापा के कंधे पर आती ।
           रोहन और माया की कहानी अब केवल उनकी नहीं थी। राशि  के साथ, उनका जीवन एक नई कविता, सुख भरी कहानी  बन चुका था, जिसमें हर दिन एक नया छंद/ कथानक  जुड़ता  सभी पास पड़ोसी, रिश्तेदार राशि के पहले जन्म दिन पर जवाहर चौक भोपाल आए । बर्थ्डै केक रोहन – माया ने राशि के हाथ पकढ़ कर कटवाया तो सभी महबान गा उठे, बार बार ये दिन आए,,,। रोहन और माया ने न केवल अपनी बेटी के लिए, बल्कि हर उस बच्चे के लिए एक दुनिया रची, जो सपनों में विश्वास करता है। उनका जीवन पथ अब भी प्रगति के पथ पर अग्रसर है चुनौतियों और खुशियों के साथ। लेकिन हर कदम पर, रोहन की कविताएँ, माया के चित्र, और राशि  की मुस्कान उनकी कहानी को और सुंदर बनाती है ।
           देखते देखते राशि तीन साल कि हो गई । एक शाम रोहन , माया अपने स्कूटर पर राशि को आगे खड़ा  करके जहांगीराबाद अपने रिश्तेदार से मिलकर घर लौट रहे थे कि एक बकरी का बच्चा स्कूटर से टकराया ,,,,कि 

राजेंद्र रंजन गायकवाड़ सेवानिवृत्त केंद्रीय जेल अधीक्षक

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