न्यू इंडिया को-ऑपरेटिव बैंक के महाप्रबंधक पर गबन का केस; 122 करोड़ के गबन का मामला

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September 7, 2026

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न्यू इंडिया को-ऑपरेटिव बैंक के महाप्रबंधक पर गबन का केस; 122 करोड़ के गबन का मामला

-सहकारी बैंक की 28 शाखाऐं मुंबई में, दो सूरत में और एक पूणे में

मुंबई/शिव कुमार यादव/- मुंबई पुलिस ने न्यू इंडिया को-ऑपरेटिव बैंक के महाप्रबंधक, लेखा प्रमुख और उनके सहयोगियों के खिलाफ 122 करोड़ रुपये के गबन का मामला दर्ज किया है। एक अधिकारी ने शनिवार को बताया कि मामले को आगे की जांच के लिए शहर पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) को सौंप दिया गया है।पुलिस अधिकारी ने बताया, ’बैंक के कार्यवाहक मुख्य कार्यकारी अधिकारी देवर्षि घोष ने शुक्रवार को मध्य मुंबई के दादर पुलिस थाने में जाकर पैसे के दुरुपयोग की शिकायत दर्ज कराई।’ शिकायत के अनुसार उन्होंने बताया, ’बैंक के महाप्रबंधक और लेखा प्रमुख हितेश मेहता ने अन्य सहयोगियों के साथ मिलकर साजिश रची। बैंक के प्रभादेवी और गोरेगांव कार्यालयों की तिजोरियों में रखे धन से 122 करोड़ रुपये का गबन किया।’उन्होंने बताया कि शिकायत के आधार पर मेहता और अन्य के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 316 (5) (लोक सेवकों, बैंकरों और भरोसेमंद पदों पर बैठे अन्य लोगों द्वारा आपराधिक विश्वासघात), 61 (2) (आपराधिक साजिश) के तहत मामला दर्ज किया गया है। उन्होंने बताया कि जांच के दायरे को देखते हुए मामले को ईओडब्ल्यू को सौंप दिया गया है। एजेंसी ने जांच शुरू कर दी है।

सहकारी बैंक की 28 शाखाओं में से अधिकांश मुंबई महानगर में
इस सहकारी बैंक की 28 शाखाओं में से अधिकांश मुंबई महानगर में स्थित हैं। इसके अलावा पड़ोसी गुजरात के सूरत में भी इसकी दो शाखाएं हैं। बैंक की एक शाखा पुणे में भी है। बैंक के खिलाफ आरबीआई की कार्रवाई से इसके ग्राहकों में खलबली मच गई, जो शुक्रवार को सुबह से ही अपनी बचत निकालने की उम्मीद में इसकी शाखाओं में उमड़ पड़े, लेकिन उन्हें परिसर में प्रवेश नहीं करने दिया गया।

बचत, चालू या किसी भी खाते से किसी भी राशि की निकासी पर रोक
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने न्यू इंडिया को-ऑपरेटिव बैंक को ऋण देने या नवीनीकृत करने, नई जमा राशियां स्वीकार करने, निवेश करने, अपनी देनदारियों के लिए कोई भुगतान करने या अपनी किसी भी संपत्ति को बेचने से रोक दिया है। नियामक ने एक बयान में कहा कि बैंक में हाल के भौतिक घटनाक्रमों से उत्पन्न पर्यवेक्षी चिंताओं और बैंक के जमाकर्ताओं के हितों की रक्षा के कारण यह रोक लगाई गई है।

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