निमिषा प्रिया के समर्थन में सामने आए ग्रैंड मुफ्ती, कहा– ‘इस्लाम में कानून अलग है

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August 24, 2026

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निमिषा प्रिया के समर्थन में सामने आए ग्रैंड मुफ्ती, कहा– ‘इस्लाम में कानून अलग है

-शेख अबू बकर की पहल से जगी नई उम्मीद -यमन की जेल में बंद निमिषा प्रिया को मिली फांसी से राहत

अनीशा चौहान/-  यमन की राजधानी सना की जेल में बंद केरल की नर्स निमिषा प्रिया के लिए एक नई सुबह की उम्मीद जगी है। 34वर्षीय निमिषा, जिन्हें अपने बिजनेस पार्टनर की हत्या और शव के टुकड़े करने के आरोप में मौत की सजा सुनाई गई थी, अब कुछ और समय जीने का मौका मिला है। यह चमत्कार संभव हुआ है भारत के ग्रैंड मुफ्ती शेख अबू बकर कंथापुरम की पहल से, जिन्होंने यमन के इस्लामिक विद्वानों से संपर्क कर इस सजा को टालने में सफलता हासिल की। बुधवार, 16 जुलाई को होने वाली फांसी अब स्थगित हो चुकी है, और यह खबर निमिषा के परिवार वालों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है।

इस्लामिक कानून और मानवता की जीत
शेख अबू बकर ने इस्लामिक कानून के उस प्रावधान का सहारा लिया, जिसमें पीड़ित परिवार को हत्यारे को माफ करने का अधिकार होता है। उन्होंने यमन के विद्वानों से संपर्क कर ‘ब्लड मनी’ (दीया) के जरिए सजा माफ करने की अपील की। एएनआई से बातचीत में उन्होंने कहा, “इस्लाम मानवता को सर्वोपरि मानता है। मैंने यमन के जिम्मेदार लोगों से इस मामले में हस्तक्षेप की गुजारिश की, और उन्होंने सजा की तारीख स्थगित कर दी।” शेख अबू बकर ने भारत सरकार और प्रधानमंत्री कार्यालय को भी इस प्रक्रिया से अवगत कराया है। उनकी यह कोशिश न केवल निमिषा के लिए, बल्कि भारत में अंतर धार्मिक सद्भाव को बढ़ावा देने के लिए भी एक मिसाल है।

सुन्नी विद्वान और सामाजिक कार्यकर्ता
94वर्षीय शेख अबू बकर कंथापुरम, जो ऑल इंडिया सुन्नी जमीयतुल उलमा के महासचिव और जामिया मरकज के चांसलर हैं, लंबे समय से सहिष्णुता और शांति के प्रतीक रहे हैं। 2014में आईएसआईएस के खिलाफ फतवा जारी करने वाले इस सूफी विद्वान ने मरकज नॉलेज सिटी जैसे कल्याणकारी प्रोजेक्ट्स के जरिए लाखों लोगों को लाभ पहुंचाता है। केरल के मुख्यमंत्री पिनरई विजयन ने भी उनकी इस पहल की सराहना करते हुए कहा, “यह मानवता और भाईचारे का परिणाम है।” निमिषा के लिए अब चल रही बातचीत से उम्मीद है कि ‘ब्लड मनी’ के जरिए उनकी सजा को पूरी तरह खत्म किया जा सकता है।

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