जम्मू-कश्मीर में मिला लिथियम का विशाल भंडार, चीन और ऑस्ट्रेलिया की बादशाहत होगी खत्म

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October 24, 2026

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जम्मू-कश्मीर में मिला लिथियम का विशाल भंडार, चीन और ऑस्ट्रेलिया की बादशाहत होगी खत्म

-भारत के खनन मंत्रालय ने रियासी क्षेत्र में 5.9 मिलियन टन लिथियम के भंडारों का पता लगाया

नजफगढ़ मैट्रो न्यूज/नई दिल्ली/शिव कुमार यादव/- भविष्य की एनर्जी मानी जाने वाले लिथियम खनिज पर अब जल्द ही विश्व में चीन व ऑस्ट्रेलिया की बादशाहत खत्म होने वाली है। भारत के खनन मंत्रालय ने एक बहुत बड़ी खबर दी है। जिसमें यह संभावना जताई गई है कि जम्मू-कश्मीर में लिथियम के बड़े भंडार का पता लगा है।
               सरकार ने गुरुवार को कहा कि देश में पहली बार जम्मू-कश्मीर में लिथियम के भंडार का पता लगा है। आने वाला भविष्य और वर्तमान को जो एक चीज एनर्जी दे रही है वो है लिथियम। फिलहाल इस लिथियम पर ऑस्ट्रेलिया और चीन की बादशाहत है। इन दोनों देशों को पास कई लाख टन का लिथियम के रिजर्व हैं। लेकिन भारत के खनन मंत्रालय ने बहुत बड़ी खबर दी है। सरकार ने गुरुवार को कहा कि देश में पहली बार जम्मू-कश्मीर में लिथियम के भंडार का पता लगा है।
               खनन मंत्रालय के अनुसार, भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण ने पहली बार जम्मू-कश्मीर के रियासी जिले के सलाल-हैमाना क्षेत्र में 5.9 मिलियन टन के लिथियम अनुमानित संसाधन का पता लगाया है। खनन सचिव विवेक भारद्वाज ने कहा, “पहली बार लिथियम के भंडार की खोज की गई है और वह भी जम्मू-कश्मीर में पाए गए हैं।“ भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (जीएसआई) द्वारा अन्वेषण पर, जम्मू और कश्मीर के रियासी जिले में लिथियम के भंडार पाए गए हैं।

लिथियम के लिए दूसरे देशों पर निर्भर है भारत
दरअसल लिथियम एक ऐसी ’अलौह’ धातु है जो किसी भी बैटरी में एक अहम घटकों में से एक है। इससे पहले, खान मंत्रालय ने कहा था कि उभरती तकनीकों के लिए महत्वपूर्ण खनिज सप्लाई चेन को मजबूत करने के लिए सरकार ऑस्ट्रेलिया और अर्जेंटीना से लिथियम सहित खनिजों को सुरक्षित करने के लिए कई सक्रिय उपाय कर रही है। वर्तमान में, भारत लिथियम (सपजीपनउ), निकल (दपबामस) और कोबाल्ट (बवइंसज) जैसे कई खनिजों के लिए आयात पर निर्भर है।

फोन से लेकर सोलर पैनल तक लिथियम की जरूरत
केंद्रीय भूवैज्ञानिक प्रोग्रामिंग बोर्ड की 62वीं बैठक में खनन सचिव विवेक भारद्वाज ने कहा कि चाहे वह मोबाइल फोन हो या सोलर पैनल, हर जगह महत्वपूर्ण खनिजों की आवश्यकता होती है। उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भर बनने के लिए देश के लिए महत्वपूर्ण खनिजों का पता लगाना और उन्हें संसाधित करना बहुत जरूरी है। उन्होंने यह भी कहा कि अगर सोने का आयात कम किया जाता है, तो “हम आत्मनिर्भर बन जाएंगे।“

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