गांव के नाम ने बढ़ाई मुश्किलें: ‘रूपवार तवायफ’ पहचान बनी अभिशाप, बदलाव की मांग तेज

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August 7, 2026

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-नाम की वजह से झेलना पड़ रहा सामाजिक तिरस्कार -युवाओं और बेटियों के भविष्य पर असर

उत्तर प्रदेश/उमा सक्सेना/-   उत्तर प्रदेश के बलिया जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने समाज की सोच और व्यवस्था दोनों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिले का एक छोटा सा गांव केवल अपने नाम के कारण वर्षों से उपेक्षा और असहजता का सामना कर रहा है। ‘रूपवार तवायफ’ नाम से पहचाने जाने वाले इस गांव के लोग बताते हैं कि ‘तवायफ’ शब्द उनके लिए कलंक की तरह बन गया है। भले ही गांव के हालात और रहन-सहन किसी भी सामान्य ग्रामीण इलाके की तरह ही हों, लेकिन जब भी उन्हें बाहर अपनी पहचान बतानी पड़ती है, तो उन्हें शर्मिंदगी और असहजता महसूस होती है।

ग्रामीणों का कहना है कि पढ़ाई, नौकरी या किसी सरकारी प्रक्रिया के दौरान जब गांव का नाम दस्तावेजों में सामने आता है, तो लोग अजीब निगाहों से देखते हैं और सवाल करने लगते हैं। युवाओं के मुताबिक, यह नाम उनके आत्मविश्वास को प्रभावित करता है और कई बार अवसरों में भी रुकावट पैदा करता है। सरकारी रिकॉर्ड, आधार कार्ड और अन्य प्रमाण पत्रों में यही नाम दर्ज होने से उन्हें बार-बार स्पष्टीकरण देना पड़ता है, जिससे मानसिक दबाव बढ़ता है।

गांव के बुजुर्गों का मानना है कि यह नाम किसी पुराने ऐतिहासिक संदर्भ से जुड़ा हो सकता है, लेकिन वर्तमान पीढ़ी का उससे कोई संबंध नहीं है। वहीं परिवारों का कहना है कि बेटियों के रिश्ते तय करते समय भी यह नाम बाधा बन जाता है और कई बार सामने वाले लोग केवल नाम सुनकर ही दूरी बना लेते हैं। गांव के बच्चे और युवा पढ़-लिखकर बेहतर जीवन और सम्मानजनक पहचान बनाना चाहते हैं, इसलिए ग्रामीण प्रशासन से गांव का नाम बदलने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि एक सकारात्मक और सम्मानजनक नाम ही उनके भविष्य की राह आसान कर सकता है।

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