मौसम/अनीशा चौहान/- भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने जानकारी दी है कि दक्षिण-पश्चिम मानसून इस साल सामान्य तिथि 1 जून से लगभग एक सप्ताह पहले, 27 मई तक केरल पहुंच सकता है। यदि ऐसा होता है, तो यह 2009 के बाद सबसे जल्दी मानसून आगमन का रिकॉर्ड होगा। 2009 में मानसून ने 23 मई को केरल में दस्तक दी थी।
पिछले कुछ दिनों से अरब सागर में बन रही चक्रवाती प्रणाली और निम्न दबाव का क्षेत्र, मानसून के जल्दी आने के लिए अनुकूल परिस्थितियाँ बना रहे हैं। इनकी वजह से केरल में भारी बारिश दर्ज की जा रही है, जो मानसून के आगमन का स्पष्ट संकेत है।
मौसम विभाग का कहना है कि इस बार मानसून के रास्ते में कोई बड़ी बाधा नजर नहीं आ रही है। इससे संभावना है कि केरल में मानसून तय समय से पहले ही पहुंच जाएगा। विभाग का यह भी अनुमान है कि इस साल सामान्य से अधिक वर्षा होगी।
समय पर मानसून आने से देश की कृषि को बड़ा लाभ मिल सकता है। खरीफ फसलें, जिनकी बुआई जून से शुरू होती है, पूरी तरह से बारिश पर निर्भर रहती हैं। अच्छी बारिश से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिल सकती है।
वर्तमान में देश के कई हिस्से भीषण गर्मी से जूझ रहे हैं। तापमान कई स्थानों पर 45 डिग्री के पार जा चुका है। ऐसे में लोगों को मानसून के आगमन का बेसब्री से इंतज़ार है। उम्मीद है कि बारिश शुरू होते ही लोगों को गर्मी से राहत मिलेगी।
भारत में जून से सितंबर तक लगभग 70 प्रतिशत वार्षिक वर्षा होती है। ऐसे में मानसून का समय पर आना न केवल पर्यावरण बल्कि कृषि और जनजीवन के लिए भी बेहद अहम माना जाता है।


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