नई दिल्ली/सिमरन मोरया/- राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ ने संविधान की प्रस्तावना में समाजवादी और धर्मनिरपेक्ष शब्दों की समीक्षा करने का बड़ा मुद्दा उठाया है। आरएसएस में नंबर-2कद के माने जाने वाले दत्तात्रेय होसबोले ने कहा है कि समाजवादी और धर्मनिरपेक्ष शब्द इमरजेंसी के दौरान शामिल किए गए थे और ये कभी भी उस संविधान का हिस्सा नहीं थे, जिसे बीआर आंबेडकर ने तैयार किया था।
कब जोड़े गए थे ये शब्द?
आरएसएस महासचिव दत्तात्रेय होसबाले ने कहा कि बाबा साहेब आंबेडकर ने जो संविधान बनाया, उसकी प्रस्तावना में ये शब्द कभी नहीं थे। इमरजेंसी के दौरान जब मौलिक अधिकार निलंबित कर दिए गए, संसद काम नहीं कर रही थी, न्यायपालिका भी पंगु हो गई थी, तब ये शब्द जोड़े गए। दत्तायेत्र होसबोले ने कहा कि इस मुद्दे पर बाद में चर्चा हुई लेकिन प्रस्तावना से उन्हें हटाने का कोई प्रयास नहीं किया गया। होसबाले ने कहा, इसलिए उन्हें प्रस्तावना में रहना चाहिए या नहीं, इस पर विचार किया जाना चाहिए।
इमरजेंसी को लेकर आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर बाद में भी चर्चा हुई लेकिन कभी इसे प्रस्तावना से हटाने पर विचार नहीं किया गया। होसबोले ने कहा-इन शब्दों को प्रस्तावना में रहना चाहिए या नहीं, इस पर विचार किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, प्रस्तावना शाश्वत है। क्या समाजवाद के विचार भारत के लिए एक विचारधारा के रूप में शाश्वत हैं?


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