चंद्रग्रहण पर लड्डू गोपाल सेवा के शास्त्रीय नियम

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चंद्रग्रहण पर लड्डू गोपाल सेवा के शास्त्रीय नियम

-साल का अंतिम चंद्रग्रहण

धर्म/सिमरन मोरया/-  आज साल का अंतिम चंद्रग्रहण लग रहा है। जिसका सूतक काल आरंभ हो चुका है। ग्रहण लगने के 9 घंटे पहले चंद्रग्रहण का सूतक आरंभ हो जाता है। शास्त्रों में सूतक काल और ग्रहण काल के दौरान भगवान की पूजा के लिए विशेष नियम बताए गए हैं। ऐसे में जो लोग लड्डू गोपाल की सेवा करते हैं उनके मन में सवाल है कि क्या ग्रहण काल के दौरान लड्डू गोपाल की सेवा कैसे करें यानी उन्हें भोग और सुलाने के क्या नियम रहेंगे। यहां जानें ग्रहण के दौरान कैसे करें लड्डू गोपाल की सेवा।

शास्त्रों में बताया गया है कि सूतक काल जब लगता है तो मूर्तियों का स्पर्श नहीं किया जाता है। ऐसे में जो लोग लड्डू गोपाल की सेवा करते हैं उन्हें कुछ नियमों का पालन करना चाहिए। ऐसा कहा जाता है कि लड्डू गोपाल की पूजा मानसिक रूप से करनी चाहिए। अगर आप लड्डू गोपाल को रोजाना शयन कराते हैं तो इसके बाद ग्रहण जब आरंभ हो जाए तो उस समय उन्हें शयन न कराएं। बल्कि, उस दौरान खुद भी आप शयन न करें और इष्ट देव के मंत्रों का जप करें।

लड्डू गोपाल को चंद्र ग्रहण के दौरान कब सुलाएं
चंद्रग्रहण रात में 1 बजकर 26 मिनट पर समाप्त होगा। ऐसे में चंद्रग्रहण समाप्त होने से बाद सबसे पहले खुद स्नान करें फिर मंदिर को अच्छे से साफ करके गंगाजल छिड़क कर इसके बाद लड्डू गोपाल को स्नान कराएं। अगर रात के समय ऐसा करना मुश्किल है तो अगले दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त में कान्हा जी को स्नान कराकर उन्हें भोग लगाएं और फिर अपना पूजा पाठ सामान्य रूप से करें।

चंद्रग्रहण 2025 का समय
चंद्रग्रहण का आरंभ आज रात में 9 बजकर 57 मिनट पर होगा।
खग्रास आरंभ रात में 11 बजकर 1 मिनट पर होगा।
चंद्रग्रहण का समापन रात में 1 बजकर 26 मिनट पर।

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