मरणोपरांत सतपाल मलिक को राजकीय सम्मान न मिलना किसानों का अपमान : सोलंकी

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September 22, 2026

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मरणोपरांत सतपाल मलिक को राजकीय सम्मान न मिलना किसानों का अपमान : सोलंकी

-राष्ट्रीय युवा चेतना मंच ने जताया रोष


नई दिल्ली/अनीशा चौहान/- किसान नेता व पूर्व राज्यपाल सतपाल मलिक जी का 5 अगस्त को 79 वर्ष की आयु में निधन हो गया। किंतु, दुर्भाग्यवश उनकी अंत्येष्टि राजकीय सम्मान के साथ नहीं की गई। इस सरकारी उपेक्षा को लेकर समाज में व्यापक चर्चा और असंतोष व्याप्त है।

सतपाल मलिक का सार्वजनिक जीवन चार दशकों से अधिक का रहा। वे भारतीय संसद के सदस्य के रूप में राज्यसभा और लोकसभा दोनों सदनों में सक्रिय रहे तथा जम्मू-कश्मीर, गोवा और मेघालय के राज्यपाल पद पर गरिमापूर्ण सेवा दी। कृषि कानूनों के विरोध में किसानों के आंदोलन के दौरान उन्होंने किसानों का खुलकर समर्थन किया, जिसके कारण उन्हें “किसानों का मसीहा” भी कहा गया। उनकी स्पष्टवादिता, गहन राजनीतिक अनुभव और जनहित के मुद्दों पर निर्भीक आवाज सदा स्मरणीय रहेगी। किंतु, उनके निधन पर अपेक्षित राजकीय सम्मान का अभाव और 8 अगस्त को चिन्मय मिशन, लोधी रोड, नई दिल्ली में आयोजित प्रार्थना सभा में किसी भी भाजपा जनप्रतिनिधि की अनुपस्थिति अत्यंत खेदजनक है।

राष्ट्रीय युवा चेतना मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष रणबीर सिंह सोलंकी ने कहा कि सतपाल मलिक का व्यक्तित्व महाभारत के विदुर की भांति था—वे सदैव अन्याय और अत्याचार के विरुद्ध निर्भीक होकर खड़े रहे। उन्होंने प्रधानमंत्री से आग्रह किया कि इस उपेक्षा को सरकार की गंभीर चूक मानते हुए भविष्य में ऐसे सम्मानित व्यक्तित्वों के साथ न्याय सुनिश्चित किया जाए। सोलंकी ने कहा कि अपने अंतिम समय में दिए गए वक्तव्य में उन पर लगाए गए आरोपों का जिक्र करते हुए मलिक जी ने कहा था कि उनके पास चंद कुर्ते पैजामे और एक मकान के अतिरिक्त कुछ नहीं है जिसे जांच करना हो कर ले।
एक वक्तव्य में उन्होंने बताया कि कई राजनीतिक मामलों को लेकर उन्होंने प्रधानमंत्री जी को कई कूटनीतिक सलाह दी थी जिसे मान्य नहीं की गई।

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