
नई दिल्ली/- दिल्ली पंचायत संघ ने पंचायत प्रमुखों के साथ बैठक में राजधानी सहित ग्रामीण इलाकों में जानलेवा मांझों और प्लास्टिक पतंगों की बिक्री पर गहरी चिंता जताई है। और सभी पंचायत प्रमुखों से अपील की कि वे अपने-अपने गांवों व क्षेत्रों में ऐसे मांझे की बिक्री पर रोक लगाने में सक्रिय भूमिका निभाएं, जो न केवल लोगों की जान ले रहे हैं बल्कि बेजुबान पक्षियों के लिए भी घातक साबित हो रहे हैं।
पंचायत संघ प्रमुख थान सिंह यादव ने कहा कि प्रतिबंध के बावजूद चाइनीज कोटेड व इसी तरह के मांझे बाजारों में कहां से मिल जाते हैं। ये मांझे बेहद धारदार होते हैं और हर वर्ष कई लोगों,खासकर दोपहिया वाहन चालकों और पक्षियों की जान ले लेते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे मांझे बेचने वाले थोड़े से मुनाफे के लिए लोगों की जिंदगी को खतरे में डाल रहे हैं, जबकि इन्हें खरीदने वाले समाज और पर्यावरण के प्रति गैर-जिम्मेदार रवैया अपना रहे हैं।
सह प्रमुख सुनील शर्मा व पंच प्रमुख अधिवक्ता यमन यादव ने प्लास्टिक की पन्नी से बनी पतंगों के उपयोग पर भी गहरी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि ये पतंगें पर्यावरण के लिए हानिकारक है और नदियों, नालों और पेड़ों में फंसकर प्रदूषण को बढ़ावा देती हैं। साथ ही ये भी पक्षियों की जान जाने का एक बड़ा कारण बन रही हैं।
पंचायत संघ प्रमुख थान सिंह यादव ने मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता से अपील की है कि इस गंभीर विषय को प्राथमिकता पर लें और प्रशासन को सख्त निर्देश दें कि वे प्रतिबंधित मांझों की बिक्री और उपयोग पर रोक लगाने के लिए तत्काल प्रभाव से अभियान चलाएं। साथ ही संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों को जवाबदेह बनाया जाए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके। पंचायत संघ के वरिष्ठ सह प्रमुख शिवकुमार यादव शकूरपुर ने यह भी स्पष्ट किया कि यह केवल कानून-व्यवस्था का नहीं, बल्कि नैतिक और सामाजिक जिम्मेदारी का मामला है, जिसमें सरकार, प्रशासन और आम जनता सभी की भागीदारी जरूरी है।





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