
-किसानों को फसल अवशेषों को मिट्टी में मिलाने के लिए यह घोल होगा मददगार साबित, बढेगी मिट्टी की उर्वरकता

नजफगढ़ मैट्रो न्यूज/द्वारका/नई दिल्ली/शिव कुमार यादव/भावना शर्मा/- शनिवार को कृषि विज्ञान केंद्र उजवा दिल्ली में भारत सरकार की परियोजना फसल अवशेष का संस्थान प्रबंधन के अंतर्गत ाडी कंपोजर के घोल के निर्माण कार्य का प्रारंभ किया गया। इसकी शुरूआत डॉक्टर नवीन अग्रवाल जिलाधीश व उपायुक्त दक्षिण पश्चिम दिल्ली ने किया। इस अवसर पर श्री अमित काले, उप जिलाधिकारी नजफगढ़ व केविके के अध्यक्ष डा. पी के गुप्ता भी उपस्थित रहे।
इस मौके पर डॉ अग्रवाल ने बताया कि किसानों को भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान पूसा नई दिल्ली के द्वारा विकसित बायो पूसा डी कंपोजर तकनीक को अपनाना चाहिए जिससे किसानों को कृषि प्रणाली प्रबंधन में मदद मिलेगी। वहीं डॉ पी के गुप्ता अध्यक्ष कृषि विज्ञान केंद्र उजवा दिल्ली ने बायो डी कंपोजर का घोल बनाने की विधि एवं छिड़काव के बारे में सभी को अवगत कराया तथा मृदा में जीवांश पदार्थ की बढ़ोतरी की उपयोगिता के बारे में बताते हुए किसानों को सलाह दी कि डी कंपोजर का प्रयोग धान की पराली के साथ-साथ अन्य फसलों के अवशेषों को मिट्टी में मिला कर मृदा में जीवांश पदार्थ की मात्रा में बढ़ोतरी कर सकते हैं। इस वर्ष कृषि विज्ञान केंद्र का 50 हेक्टेयर में पूसा डी कंपोजर के घोल के छिड़काव की योजना दक्षिण-पश्चिम दिल्ली, उत्तरी दिल्ली व उत्तरी पश्चिमी दिल्ली में है। ताकि किसानों को ज्यादा से ज्यादा फायदा मिल सके और उनकी जमीन की मृदा जीवांश की ताकत बढ़ सके। इस अवसर पर किसानों को इसके छिड़काव की विधि को भी बताया गया। एसडीएम अमित काले ने सभी उपस्थित अतिथियों का आभार प्रकट किया।






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