फसल अवशेष प्रबंधन को लेकर कृषि विज्ञान केंद्र उजवा ने लगाया किसान मेला

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फसल अवशेष प्रबंधन को लेकर कृषि विज्ञान केंद्र उजवा ने लगाया किसान मेला

-अलीपुर ब्लॉक के दरियापुर गांव में दादा मालदेव मंदिर में किया गया आयोजन, 450 किसानों ने मेले में लिया भाग

नजफगढ़ मैट्रो न्यूज/अलीपुर/नई दिल्ली/शिव कुमार यादव/भावना शर्मा/- फसल अवशेष प्रबंधन को लेकर कृषि विज्ञान केंद्र उजवा ने अलीपुर ब्लॉक के दरियापुर गांव के दादा मालदेव मंदिर उत्तरी दिल्ली में एक दिवसीय किसान मेले का आयोजन किया। इस मेंले में लगभग 450 किसानों के साथ-साथ  प्रसार कार्यकर्ता, उद्यमी, सरकारी संस्थान, बीज एवं खाद बनाने वाली कंपनियों ने भागीदारी की। इस मेले का उद्घाटन श्री मधु व्यास सचिव संयुक्त विकास विभाग महिला व बाल विकास विभाग एवं सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार ने किया। इस अवसर पर जिलाधीश सुश्री ईशा खोसला उपायुक्त उत्तरी दिल्ली, डॉ. रणधीर सिंह, सहायक महानिदेशक (कृषि प्रसार) भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद पूसा भारत सरकार नई दिल्ली डॉ बीएस तोमर संयुक्त निदेशक (प्रसार) एवं अध्यक्ष (सब्जी विज्ञान विभाग) भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, पूसा, नई दिल्ली विशिष्ट अतिथि के रुप एवं डॉक्टर एम हसन प्रधान वैज्ञानिक (कृषि अभियांत्रिकी) भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, पूसा, नई दिल्ली, श्री राजवीर गर्ग वरिष्ठ समन्वयक, कृषि विज्ञान केंद्र, पानीपत, हरियाणा एवं श्री ए पी सैनी संयुक्त निदेशक कृषि विभाग दिल्ली सरकार आदि व्याख्यान विशेषज्ञ के रूप में उपस्थित थे।


                          कार्यक्रम के उद्घाटन के अवसर पर डॉ पी के गुप्ता अध्यक्ष कृषि विज्ञान केंद्र के निदेशक एनएचआरडीएफ नई दिल्ली ने मुख्य अतिथि सहित माननीय अतिथि गण, कृषक बंधु, मीडिया कर्मी, प्रदर्शनी लगाने वाले संस्थानों व कंपनियों का स्वागत करते हुए कृषि विज्ञान केंद्र के द्वारा किसान मेला को आयोजित करने के उद्देश्य के बारे में विस्तृत जानकारी दी।
                         मेले का उद्घाटन करते हुए मुख्य अतिथि श्री मधु व्यास ने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली को पर्यावरण को प्रदूषण से मुक्त करने के लिए दिल्ली सरकार एवं कृषि विज्ञान केंद्र के पराली प्रबंधन की पहल की प्रशंसा करते हुए बताया कि पूसा संस्थान के द्वारा विकसित पोषण डी कंपोजर का छिड़काव विगत लगभग 800 हैक्टेयर मैं किया गया जिससे किसानों को पराली प्रबंधन में मदद मिली एवं इस वर्ष भी छिड़काव करने की कार्ययोजना तैयार हो चुकी है जिसकी जल्द ही शुरुआत की जाएगी। श्री व्यास ने पराली को प्रबंधन करने वाली विभिन्न मशीनों पर सरकार के द्वारा अनुदान के बारे में अवगत कराते हुए बताया कि राज्य सरकार किसानों के द्वारा व्यक्तिगत रूप से मशीने खरीदने पर 50 फीसदी का अनुदान एवं कस्टम हायरिंग सेंटर स्थापित करने के लिए 80 फीसदी तक का अनुदान दे रही है। श्री व्यास ने सभी प्रदर्शनी का अवलोकन करते हुए सभी कृषि इनपुट कंपनी एवं संस्थानों को बधाई दी।
                     सुश्री ईशा खोसला ने कृषि विज्ञान केंद्र के कार्यों की पहल की प्रशंसा करते हुए केंद्र से उत्तरी दिल्ली में मशरूम उत्पादन में पराली से जैविक खाद केचुआ खा एवं खाद्य प्रसंस्करण आदि को बढ़ावा देने हेतु गुजारिश की। कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि डॉ रणधीर सिंह  सहायक महानिदेशक (कृषि प्रसार) ने किसानों को धान की पराली जलाने से मृदा पर्यावरण एवं प्रदूषण से स्वास्थ्य पर होने वाले नुकसान के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि पराली जलाने से वायु प्रदूषण से जलवायु में होने वाले दूरगामी परिवर्तन अच्छे नहीं होने वाले हैं। इसी क्रम में विशिष्ट अतिथि डॉ बीएस तोमर संयुक्त निदेशक एवं अध्यक्ष सब्जी विज्ञान भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान पूसा ने किसानों को वर्तमान समय एवं बाजार में उपभोक्ता की मांग को देखते हुए कम समय कम क्षेत्र में अधिक आय के कृषि में विविधीकरण के लिए आग्रह किया। उन्होंने किसानों को कहा कि आप दिल्ली क्षेत्र को ध्यान में रखकर बागवानी की उच्च एवं संरक्षित तकनीकी को बढ़ावा दें।
                      कार्यक्रम के दूसरे सत्र की शुरुआत में डॉ पी के गुप्ता ने किसानों को संबोधित करते हुए बताया कि कृषि विज्ञान केंद्र उजवा दिल्ली वर्ष 2018 से 2019 से भारत सरकार की महत्वाकांक्षी फसल अवशेष की स्थान प्रबंधन परियोजना पर कार्य कर रहा है जिसके अंतर्गत विभिन्न क्षेत्रों में प्रशिक्षण, जागरूकता, किसान मेला, मशीनों के द्वारा प्रदर्शन एवं राज्य स्तरीय दिल्ली पर्यावरण प्रतियोगिता के माध्यम से राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में पराली एवं अन्य अवशेष जलाने के नुकसान का संदेश जन-जन तक पहुंचा रहा है। डॉक्टर गुप्ता ने बताया कि वर्ष 2021 में भी 50 मशीनों के द्वारा प्रदर्शन एवं छिड़काव  करने की कार्य योजना है जिससे काफी किसान मशीनों की नई तकनीकी से पराली प्रबंधन से लाभान्वित होंगे। श्री राजवीर गर्ग ने गेहूं की बुवाई के लिए सुपर सीडर और हैप्पी सीडर के संचालन संबंधी दिशा निर्देश एवं डॉ एम हसन ने इन सीटू और एक्स सीटू फसल अवशेष प्रबंधन के लिए कृषि मशीनरी की भूमिका के बारे में किसानों को विस्तृत जानकारी दी।
                       श्री कैलाश विशेषज्ञ कृषि प्रसार कृषि विज्ञान केंद्र नई दिल्ली ने किसानों एवं अतिथियों का कार्यक्रम में शामिल होने के लिए हार्दिक आभार प्रकट किया। श्री सत्यवान, श्री कुलदीप, हरिओम एवं मनीष ने किसान मेला को सफल बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। इस कार्यक्रम को सफल करने में डॉक्टर रितु सिंह, श्री राकेश कुमार, डॉ डीके राणा, डॉ अमरपाल सिंह, डॉक्टर जयप्रकाश, डॉक्टर रमेश बाना, श्री सूबेदार पांडे, श्री आत्माराम, श्री विशाल, श्री सुधीर सिंह, डॉक्टर शरद तिवारी एवं श्री सुभाष तिवारी का सहयोग सराहनीय रहा।

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