बहादुरगढ़ में 100 दिन में दिखने लगा मियावाकी जंगल का असर, पौधों की तेजी से बढ़ी लंबाई

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October 24, 2026

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बहादुरगढ़ में 100 दिन में दिखने लगा मियावाकी जंगल का असर, पौधों की तेजी से बढ़ी लंबाई

एक एकड़ में लगाए गए 2500 पौधे, औसत ऊंचाई 4 से 5 फीट तक पहुंचने का दावा; क्लीन एंड ग्रीन ट्रस्ट की पहल से बढ़ी हरियाली की उम्मीद
नजफगढ़ मेट्रो न्यूज/बहादुरगढ़/शिवकुमार यादव । शहर में हरित क्षेत्र बढ़ाने की दिशा में क्लीन एंड ग्रीन ट्रस्ट बहादुरगढ़ की ओर से विकसित किए जा रहे मियावाकी जंगल के सकारात्मक परिणाम सामने आने लगे हैं। 12 जुलाई 2026 को शुरू की गई इस परियोजना के 100 दिन पूरे होने पर ट्रस्ट ने पौधों की अच्छी वृद्धि का दावा किया है।
परियोजना के तहत एक एकड़ भूमि में करीब 2500 पौधे लगाए गए थे, जिनकी औसत ऊंचाई अब 4 से 5 फीट तक पहुंचने की बात कही जा रही है।
ट्रस्ट के अनुसार, कुछ पौधों की ऊंचाई 12 से 15 फीट तक हो गई है। पौधारोपण के समय पौधों की औसत ऊंचाई करीब एक फीट थी। कम समय में पौधों की वृद्धि को शहर में हरियाली बढ़ाने के प्रयास की दिशा में उत्साहजनक माना जा रहा है।
कम जमीन में सघन हरियाली तैयार करने की तकनीक
मियावाकी तकनीक के तहत स्थानीय जलवायु और मिट्टी के अनुकूल विभिन्न प्रजातियों के पौधे अपेक्षाकृत कम दूरी पर लगाए जाते हैं। इसका उद्देश्य सीमित भूमि पर सघन वन विकसित करना और समय के साथ हरित क्षेत्र को बढ़ावा देना है। इस पद्धति से तैयार किए जाने वाले वन शहरी क्षेत्रों में हरियाली बढ़ाने के प्रयासों का एक विकल्प बन सकते हैं।
सामाजिक संस्थाओं ने भी दिया सहयोग
इस परियोजना में विभिन्न सामाजिक संस्थाओं ने भी सहयोग किया है। ट्रस्ट की इस पहल का उद्देश्य शहर में हरियाली बढ़ाने के साथ पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता को बढ़ावा देना है। पौधों की शुरुआती वृद्धि के बाद अब उनकी नियमित देखभाल, सिंचाई और संरक्षण पर ध्यान देना महत्वपूर्ण होगा।
नियमित देखभाल से तय होगी सफलता
विशेषज्ञों के अनुसार, किसी भी पौधारोपण अभियान की वास्तविक सफलता केवल पौधों की ऊंचाई से नहीं, बल्कि उनके लंबे समय तक जीवित रहने, स्वस्थ विकास और जैव विविधता बढ़ने से आंकी जाती है। ऐसे में मियावाकी जंगल की सफलता का आकलन आने वाले समय में पौधों की जीवित रहने की दर और विकसित होने वाली वनस्पति के आधार पर किया जा सकेगा। यदि यह प्रयास निरंतर सफल रहता है, तो बहादुरगढ़ में छोटे भूखंडों पर हरित क्षेत्र विकसित करने के लिए एक प्रेरणादायक मॉडल साबित हो सकता है।

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