हरियाणा के सिरसा में अनोखा संयोग: महिला ने दिए चार बच्चों को जन्म, दो लड़के और दो लड़कियाँ, गांव में खुशी का माहौल

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August 24, 2026

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हरियाणा के सिरसा में अनोखा संयोग: महिला ने दिए चार बच्चों को जन्म, दो लड़के और दो लड़कियाँ, गांव में खुशी का माहौल

सिरसा/अनीशा चौहान/-  हरियाणा के सिरसा जिले के टीटू खेड़ा गांव में एक अनोखा और चमत्कारी संयोग देखने को मिला है। यहां एक महिला ने एक साथ चार बच्चों को जन्म दिया है—दो बेटे और दो बेटियाँ। यह मामला ना सिर्फ गांव में बल्कि सिरसा शहर और आस-पास के इलाकों में भी चर्चा का विषय बना हुआ है।

डिलीवरी से पहले थी एक बेटी की चाह, मिला चौंकाने वाला तोहफ़ा
परिवार ने बताया कि डिलीवरी से पहले उनकी बस इतनी ही इच्छा थी कि एक बेटी हो जाए, लेकिन जब डॉक्टरों ने बताया कि एक साथ चार बच्चों का जन्म हुआ है, तो परिवार की खुशी का ठिकाना नहीं रहा।
परिजन इसे किसी चमत्कार से कम नहीं मान रहे हैं। चारों नवजात और उनकी माँ पूरी तरह स्वस्थ हैं और घर का पूरा परिवार बच्चों की देखभाल में जुटा हुआ है।

गाँव में खुशी की लहर, लोग दे रहे बधाइयाँ
जैसे ही यह खबर फैली, आसपास के लोग बधाई देने उनके घर पहुँचने लगे। बच्चे किसी मेले की तरह लोगों का ध्यान खींच रहे हैं। हर कोई उन्हें देखने और आशीर्वाद देने पहुंच रहा है। परिवार के लोगों का कहना है कि चार बच्चों की देखरेख में पूरा परिवार लगा हुआ है—कभी कोई बच्चे को गोद में लेता है, तो कभी कोई।

बच्चों के माता-पिता की कहानी
बच्चों के पिता सोनू खेती-बाड़ी और मज़दूरी का काम करते हैं। उनकी पत्नी रज्जो की डिलीवरी १४ मई को सिरसा के सिविल अस्पताल में सिजेरियन ऑपरेशन के जरिए हुई थी। चारों बच्चों को अस्पताल से ४ जून को छुट्टी दी गई। सोनू और रज्जो की शादी को अभी सिर्फ एक साल ही हुआ है।

सरपंच ने की मदद की अपील
गांव के सरपंच सोनू ने कहा कि पूरे गांव में खुशी का माहौल है और यह वाकई चमत्कार जैसा है। उन्होंने बताया कि वर्षों पहले भी गांव में एक साथ तीन बच्चों का जन्म हुआ था, लेकिन चार बच्चों का जन्म पहली बार हुआ है।
सरपंच ने सरकार से अपील की कि इस परिवार की आर्थिक मदद की जाए। साथ ही उन्होंने कहा कि गांव की पंचायत की ओर से भी परिवार को जितनी हो सके, उतनी सहायता दी जाएगी।

क्या कहता है समाज?
यह घटना न केवल एक चमत्कारी अनुभव है, बल्कि ग्रामीण परिवेश में जन्म लेने वाले बच्चों और उनके माता-पिता के लिए एक नई चुनौती भी है। ऐसे में सरकार और समाज दोनों की ज़िम्मेदारी बनती है कि वे इस परिवार को सहायता और संसाधन प्रदान करें।

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