सफेद कोट में टूटते सपने: एक डॉक्टर की दर्दनाक मौत

स्वामी,मुद्रक एवं प्रमुख संपादक

शिव कुमार यादव

वरिष्ठ पत्रकार एवं समाजसेवी

संपादक

भावना शर्मा

पत्रकार एवं समाजसेवी

प्रबन्धक

Birendra Kumar

बिरेन्द्र कुमार

सामाजिक कार्यकर्ता एवं आईटी प्रबंधक

Categories

September 2026
MTWTFSS
 123456
78910111213
14151617181920
21222324252627
282930 
September 19, 2026

हर ख़बर पर हमारी पकड़

सफेद कोट में टूटते सपने: एक डॉक्टर की दर्दनाक मौत

स्मिता सिंह/-  वह 31 साल की थी। वर्षों की कठिनाइयों और संघर्षों के बाद, आखिरकार उसका सपना साकार होने जा रहा था। वह एक डॉक्टर के रूप में अपने करियर की शुरुआत करने वाली थी, जो उसका बचपन का सपना था। उसने किशोरावस्था में यह सपना देखा था—सफेद कोट पहनकर अस्पताल में काम करने का। हर दिन जब वह अपने सफेद कोट को पहनती, तो उसे गर्व महसूस होता, जैसे वह अपने सपनों के और करीब पहुंच रही हो।

लेकिन किसे पता था कि उसी सफेद कोट में, उसी अस्पताल में, वह अपनी आखिरी साँसे लेगी? उसने कभी सोचा भी नहीं था कि एक दिन ऐसा आएगा जब वही सफेद कोट उसके टूटते सपनों का गवाह बनेगा। उस रात जब वह अस्पताल के सेमिनार हॉल में सोने के लिए गई, तो वह नहीं जानती थी कि उसका सपना उसी रात बिखर जाएगा।

उसे क्या पता था कि उसकी ज़िन्दगी का सबसे बड़ा सपना, जिसे उसने अपने खून-पसीने से सींचा था, एक ही रात में टूट जाएगा। सफेद कोट में उसने जिस दर्द और पीड़ा को सहा, वह अकल्पनीय है। उस रात उसकी पूरी दुनिया उजड़ गई, उसके सारे सपने बिखर गए।

सफेद कोट पहनकर उसने जो सम्मान, जो पहचान हासिल की थी, वही सफेद कोट उसकी असहायता और टूटे सपनों का प्रतीक बन गया। आज वह सफेद कोट उसकी मौत की गवाही दे रहा है, उस निर्दयी रात की गवाही दे रहा है, जिसने एक डॉक्टर के पूरे जीवन को निगल लिया।

क्या हमारा समाज कभी समझ पाएगा कि उस सफेद कोट के पीछे कितनी मेहनत, कितनी उम्मीदें और कितने सपने छिपे थे? क्या हम कभी समझ पाएंगे कि उस रात सिर्फ एक डॉक्टर की जान नहीं गई, बल्कि उसके सारे सपने, उसकी सारी मेहनत भी उसी के साथ खत्म हो गई?

इस घटना ने हम सबको सोचने पर मजबूर कर दिया है कि आखिर कब तक हमारी बेटियाँ ऐसे ही अपने सपनों की कीमत चुकाती रहेंगी? कब तक हम इस बर्बरता का शिकार होते रहेंगे?

About Post Author

आपने शायद इसे नहीं पढ़ा

Subscribe to get news in your inbox