‘सकारात्मक भारत’ का वैश्विक खाका: आरजेएस ने 2047 विजन के लिए 17

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September 9, 2026

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-सूत्रीय रोडमैप किया जारी

नई दिल्ली/उमा सक्सेना/-    राम जानकी संस्थान (आरजेएस) पॉजिटिव ब्रॉडकास्टिंग हाउस (पीबीएच) द्वारा आयोजित 519वें राष्ट्रीय वेबिनार में भारत को स्वतंत्रता के शताब्दी वर्ष 2047 तक एक सशक्त, जागरूक और सकारात्मक राष्ट्र बनाने का व्यापक संकल्प लिया गया। “अमृत काल का सकारात्मक भारत उदय” विषय पर केंद्रित इस वैश्विक संगोष्ठी में संचार कौशल, सकारात्मक सोच और सांस्कृतिक मूल्यों को आधार बनाते हुए 17 बिंदुओं पर आधारित एक विस्तृत कार्ययोजना प्रस्तुत की गई। कार्यक्रम गुरु रविदास जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित हुआ, जिसमें सामाजिक चेतना और रचनात्मक मीडिया की भूमिका पर विशेष चर्चा की गई।

संकल्प सभा के रूप में वेबिनार का आयोजन
राष्ट्रीय संयोजक उदय कुमार मन्ना ने कार्यक्रम को मात्र विचार-विमर्श नहीं, बल्कि “राष्ट्र निर्माण का संकल्प मंच” बताया। उन्होंने कहा कि सभी गतिविधियों का डिजिटल दस्तावेजीकरण किया जा रहा है ताकि भविष्य की पीढ़ियों को प्रेरणा मिल सके। साथ ही अगस्त 2026 में आंदोलन से जुड़े कार्यकर्ताओं के योगदान पर आधारित एक विशेष ग्रंथ प्रकाशित करने की घोषणा भी की गई। फरवरी माह में सकारात्मक अभियानों को आगे बढ़ाने के लिए दयाराम सारोलिया, राजेंद्र सिंह कुशवाहा, दयाराम मालवीय और कमल मालवीय ने नेतृत्व की जिम्मेदारी संभालने का निर्णय लिया।

विशेषज्ञों ने दिए सकारात्मकता और संचार के सूत्र
वेबिनार में अमेरिका से जुड़े हृदय रोग विशेषज्ञ और सांस्कृतिक दूत डॉ. पंकज पारीक, आकाशवाणी की वरिष्ठ समाचार वाचिका चंद्रिका जोशी, मीडिया शिक्षाविद डॉ. अरुणेश कुमार द्विवेदी और वैश्विक चिंतक राकेश मनचंदा ने अपने अनुभव साझा किए। डॉ. पारीक ने भारतीय चिकित्सा परंपरा की ऐतिहासिक उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए बताया कि टीकाकरण पद्धति का अभ्यास भारत में सदियों पहले से होता आ रहा था। उन्होंने युवाओं से इतिहास को प्रमाणों के आधार पर समझने का आह्वान किया।

संवेदनशील संचार पर जोर
चंद्रिका जोशी ने कहा कि प्रभावी संवाद केवल शब्दों का नहीं, बल्कि संवेदनाओं का माध्यम है। रेडियो प्रसारण के उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि कठिन समय में आवाज भी सहारा बन सकती है। वहीं डॉ. द्विवेदी ने मीडिया को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचने का सशक्त उपकरण बताते हुए सरल भाषा और सकारात्मक पत्रकारिता को अपनाने की सलाह दी।

17-सूत्रीय एजेंडा की रूपरेखा
आरजेएस द्वारा प्रस्तुत रोडमैप में प्रेरक व्यक्तित्वों की कहानियों को सामने लाने के लिए ‘रियल सक्सेस स्टोरी शो’, पार्कों में जनसंवाद केंद्र स्थापित करना, वैश्विक भारतीय समुदाय को जोड़ने के लिए ‘ग्लोबल डायस्पोरा टीम’ बनाना और मासिक सकारात्मक मीडिया न्यूज़लेटर जारी करना जैसे कदम शामिल हैं। उद्देश्य है कि सकारात्मक खबरों और समाधान आधारित दृष्टिकोण को समाज के हर वर्ग तक पहुँचाया जाए।

संस्कृति, युवाओं और आध्यात्मिक मूल्यों पर फोकस
कार्यक्रम में नई पीढ़ी को सकारात्मक सामग्री से जोड़ने, भावनात्मक मजबूती विकसित करने और मूल्यों पर आधारित शिक्षा देने पर भी बल दिया गया। संत रविदास के संदेशों को याद करते हुए सामाजिक समरसता और मानवता को सर्वोपरि बताया गया। सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने वातावरण को और भी प्रेरक बना दिया।

सकारात्मक सोच से सशक्त भारत का लक्ष्य
समापन सत्र में वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि 2047 तक विकसित भारत के निर्माण के लिए वैज्ञानिक दृष्टिकोण, रचनात्मक मीडिया और व्यक्तिगत जिम्मेदारी का समन्वय आवश्यक है। आगामी दिनों में मीडिया साक्षरता से जुड़े सेमिनारों और जन-जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से इस अभियान को और गति दी जाएगी।

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